टायर काले ही क्यों होते हैं?

अक्टूबर 10, 2016

हम सभी ने अपने जीवन में टायर देखे ही होंगे लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि टायर काले रंग के ही क्यों होते हैं? इनको पीला, लाल, सफेद या कोई और रंग क्यों नहीं दिया जाता और भारत में ही नहीं विदेशों में भी टायर काले रंग के होते हैं। शायद यह सवाल अब आपको परेशान कर रहा होगा तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि टायर काले ही क्यों होते हैं। यह बात तो हम सभी जानते हैं कि टायर रबड़ का होता है। लेकिन इस प्राकृतिक रबड़ का रंग सलेटी होता है तो फिर टायर काला कैसे हैं? दरअसल इसको बनाते समय इसका रंग बदल जाता है यह सलेटी से काला बन जाता है इस प्रक्रिया को वल्कनाइज़ेशन कहा जाता है।

आपको बता दें कि रबड़ प्राकृतिक रूप से बहुत ज्यादा मजबूत नहीं होता और घिसता भी बहुत जल्दी है। टायर जो कि वाहनों में इस्तेमाल किया जाएगा अगर उसमें साधारण रबड़ लगा दिया जाए तो वह बहुत जल्दी घिस जाएगा और ज्यादा दिन चलेगा नहीं। इसीलिए इसमें कार्बन ब्लैक मिलाया जाता है जिससे यह बहुत अधिक मजबूत हो जाता है और कार्बन ब्लैक इसे जल्दी घिसने नहीं देता। कार्बन युक्त टायर सादा रबर के टायर से 10 गुना से भी ज़्यादा चलता है। काले कार्बन की कई श्रेणियाँ होती है। रबर कितना सख़्त या मुलायम होगा ये इस बात पर निर्भर करता है की कौनसी श्रेणी का कार्बन मिलाया गया है।

इसके अलावा इसमें सल्फर भी मिलाया जाता है। कार्बन ब्लैक से टायर का रंग काला हो जाता है। इसके काले रंग के पीछे एक कारण यह भी है कि यह अल्ट्रावायलेट किरणों से रबड़ को बचाता है। बच्चों की साइकिल में रंग-बिरंगे टायर इसलिए देखने को मिलते हैं क्योंकि वह रोड पर ज्यादा नहीं चलती और उनमें कार्बन ब्लैक नहीं मिलाया जाता जिससे वह टायर बहुत जल्दी घिस जाता है और वह निम्न कोटि के टायर होते हैं।

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