दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत होने का गौरव माउन्ट एवरेस्ट को प्राप्त है जो नेपाल में स्थित है। इसकी समुद्र तल से ऊंचाई 8,850 मीटर है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस पर्वत की ऊंचाई हर साल 2 सेंटीमीटर बढ़ती जा रही है।

संस्कृत में इसे ‘देवगिरि’ कहा जाता है, तिब्बत में इसे ‘चोमोलंगमा’ नाम से जाना जाता है जिसका अर्थ होता है ब्रह्माण्ड की देवी और नेपाल में इसे ‘सागरमाथा’ कहा जाता है जिसका अर्थ आकाश की देवी होता है। इन दोनों ही देशों में इस पर्वत की पूजा की जाती है।

दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत 1

दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत

माउन्ट एवरेस्ट का नाम वेल्स के सर्वेयर और जियोग्राफर जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर रखा गया था। जॉर्ज एवरेस्ट ने ही पहली बार इस पर्वत की सही ऊंचाई और लोकेशन बताई थी इसलिए उनके सम्मान में साल 1865 में दुनिया के इस सबसे ऊँचे पर्वत को माउन्ट एवरेस्ट नाम दिया गया।

माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने के 18 अलग-अलग रास्ते हैं। माउन्ट एवेरस्ट के शिखर तक पहुँचने की चाहत रखकर लगातार कोशिश करने वाले 200 से भी ज्यादा लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। सबसे ज्यादा मौतें शिखर के पास होती है इसलिए इसे डेथ जोन कहा जाता है जहाँ चढ़ाई करते समय चूकते ही पर्वतारोही अपनी जान गँवा देते हैं।

इस पर चढ़ाई करने वाले हर दस में से एक शख्स वापिस बेस कैंप तक नहीं पहुंच पाता।

पानी 100 डिग्री सेल्सियस पर उबलता है लेकिन माउन्ट एवरेस्ट के शिखर पर पानी 71 डिग्री सेल्सियस पर ही उबल जाता है।

साल 1974 के बाद साल 2015 में कोई पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट के शिखर तक नहीं पहुँच सका क्योंकि उस साल नेपाल में भयंकर भूकंप आया था।

माउन्ट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने का सबसे अच्छा समय मार्च से मई के बीच माना जाता है। इस समय बर्फ ताज़ा होती है, बारिश भी ना के बराबर होती है और धूप खिली रहने के कारण मौसम अच्छा रहता है।

उम्मीद है जागरूक पर दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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