एक ऐसा गांव जहाँ बैन है मर्दों की एंट्री

नवम्बर 3, 2017

हम सभी इस चीज़ से वाकिफ हैं कि दुनिया में ऐसी कई जगह हैं जहाँ महिलाओं को जाने से मनाही है उदहारण के तौर पर भारत में ही कुछ दिनों पहले तक शनि मंदिर, हाजी अली दरगाह मे महिलाओं की एंट्री बैन थी। इसी तरह वेटिकन सिटी में भी सिर्फ पुरुष ही रहते हैं। पर दुनिया मे एक ऐसा भी गांव है जहां मर्दों की एंट्री बैन है।

उत्तरी केन्या में स्थित उमोजा गांव एक ऐसा गांव है जहाँ पुरुषों के रहने पर मनाही है। इस गांव की स्थापना 1990 मे रिबेका लोलोसली ने 14 अन्य महिलाओं जो स्थानीय ब्रिटिश सैनिकों द्वारा बलात्कार की शिकार थी ने साथ मिलकर की थी। ये सभी महिलाएं सम्बुरु जनजाति की महिलाएं हैं। द गार्जियन अख़बार के अगस्त 2015 के आंकड़े के अनुसार वहां 47 महिलाएं और लगभग 200 बच्चे थे। और ये गांव यौन उत्पीडन, बाल विवाह जैसे महिला विरोधी सामाजिक बुराइयों से लड़ने का केंद्र बन चुका है। आज यहाँ एक स्कूल और क्लिनिक भी है।

1990 के पहले इस क्षेत्र में सम्बुरु जनजाति जो मुख्य रूप पितृ सत्तात्मक रहती थी। यहाँ औरतों को जमीन खरीदने या रखने का अधिकार नहीं था और उन्हें पुरुषों की जागीर समझा जाता था।बच्चियों की शादी बुड्ढों से कर दी जाती थी। 1990 के दशक की शुरुआत मे लगभग 600 महिलाओं का ब्रिटिश सैनिकों द्वारा बलात्कार करने का मामला सामने आया। इन महिलाओं को उनके पतियों ने अपवित्र होने के नाम पर छोड़ दिया। कुछ महिलाओं को उनके पतियों ने बलात्कार पीड़ित पत्नी से एड्स या ऐसी कोई अन्य बीमारी होने के डर के कारण छोड़ दिया। इन्ही महिलाओं में से 15 ने इस गांव को बसाया। शुरुआत मे उन्हें इसके लिए बहुत मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा पर अंत में इन महिलाओं ने सफलता प्राप्त कर ली।

उमोजा गांव केन्या के उत्तरी भाग मे राजधानी नैरोबी से लगभग 280 किलोमीटर दूर सम्बरू काउंटी में स्थित है। यहाँ खुले घास के मैदानों मे मिट्टी और गाय के गोबर की मिश्रण से झोपड़ी तैयार की जाती है और जिसके चारों ओर कांटे की फेंसिंग की जाती है।

इस गांव के आय का मुख्य स्त्रोत मनके के आभूषण बनाना है इसके अलावा इस गांव की औरतें गांव के बाहरी हिस्से मे टूरिस्ट कैंप भी चलाती हैं जिससे अतिरिक्त आमदनी हो जाती है। इसके अलावा घरों में कम अल्कोहल की बियर भी बनाई जाती है जिससे अतिरिक्त आमदनी हो जाती है। सभी महिलाएं कुल आमदनी का दस प्रतिशत हिस्सा टैक्स के रूप देती हैं जिससे स्कूल अस्पताल और अन्य बुनियादी जरूरतें पूरी की जाती हैं। इस गांव की अपनी एक वेबसाइट भी है।

शिक्षा के लिए यहाँ एक प्राइमरी स्कूल और एक नर्सरी स्कूल है। गांव की महिलाएं महिला अधिकारों के सम्बन्ध में जागरूकता फ़ैलाने के लिए अन्य गावों में जाती हैं। गांव और यहाँ रहने वाली महिलाओं से सम्बंधित कोई भी निर्णय सामूहिक रूप से “ट्री ऑफ़ स्पीच” के नीचे लिए जाते हैं। रिबेका लोलोसली इस गांव की मुखिया हैं और सभी महिलाओं को समान अधिकार मिले हुए हैं।

यहां की महिलाएं पुरुष विरोधी नहीं हैं यहाँ पुरुषों को एक टूरिस्ट के रूप में और अन्य कामों के लिए आने दिया जाता पर ठहरने नहीं दिया जाता। यह गांव महिला सशक्तिकरण का एक अनूठा उदाहरण है।

“दुनिया के सबसे विचित्र गांव”

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