ईएसआर ब्लड टेस्ट क्या होता है?

कई बार जब बिना चोट लगे ही शरीर में सूजन और जलन रहने लगे तो इसे सामान्य नहीं समझा जाना चाहिए और शरीर में इस तरह के बदलावों की जांच करने के लिए ईएसआर ब्लड टेस्ट किया जाता है। इसके बारे में जानना आपके लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है इसलिए आइये, आज इसी ब्लड टेस्ट के बारे में जानते हैं-

शरीर में होने वाली जलन और सूजन का पता लगाने के लिए किया जाने वाला एक सामान्य सा ब्लड टेस्ट होता है ईएसआर ब्लड टेस्ट, जिसमें ब्लड सैंपल में लाल रक्त कोशिकाओं यानी एरिथ्रोसाइट्स के नीचे गिरने की गति को मापा जाता है इसलिए इसे एरिथ्रोसाइट्स सेडीमेंटशन रेट के नाम से जाना जाता है।

ईएसआर ब्लड टेस्ट कब करवाना चाहिए-

जब कभी शरीर में इस तरह की कोई तकलीफ बनी रहे –

  • गठिया का कोई प्रकार
  • बुखार
  • सिर दर्द
  • गर्दन या कंधे में दर्द
  • एनीमिया
  • पेल्विक में दर्द
  • भूख कम लगना
  • जोड़ों का अकड़ना
  • वजन का कम होना

शरीर की सूजन कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकती है इसलिए ईएसआर टेस्ट के साथ-साथ कुछ अन्य टेस्ट भी किये जा सकते हैं।

ईएसआर टेस्ट क्यों किया जाता है-

इस टेस्ट को करने से किसी बीमारी के बारे में पता नहीं चलता है बल्कि ये टेस्ट डॉक्टर को ये जानने में मदद करता है कि मरीज के शरीर में किसी तरह की सूजन या जलन है या नहीं। उसके बाद बाकी टेस्ट के साथ ईएसआर टेस्ट के रिजल्ट्स की जांच करके बीमारी तक पहुंचा जाता है। अगर ईएसआर का लेवल सामान्य से अधिक आता है तो ये संकेत शरीर की किसी पुरानी चोट से आयी सूजन, इम्यून सिस्टम से सम्बंधित किसी विकार या इन्फेक्शन की ओर इशारा करते हैं।

ईएसआर टेस्ट कैसे किया जाता है-

ब्लड सैंपल की जांच की जाती है जिसके 1 से 2 घंटे बाद रिजल्ट पता चल जाता है।

टेस्ट के दौरान रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्त कोशिकाएं) को लम्बी और पतली ट्यूब में रखा जाता है और अगले 1 घंटे में उनके ट्यूब में नीचे गिरने की गति को मापा जाता है।

शरीर में सूजन होने की स्थिति में, ब्लड में मौजूद असामान्य प्रोटीन रेड ब्लड सेल्स के गुच्छे बना देगी और गुच्छों का वजन ज्यादा होने के कारण वो जल्दी नीचे गिर जाएंगे।

ईएसआर टेस्ट के रिजल्ट्स को मिलीमीटर प्रति घंटा में मापा जाता है।

आइये, अब आपको ईएसआर की सामान्य रेंज के बारे में बताते हैं –

ईएसआर की सामान्य रेंज-

• 50 साल से कम उम्र वाले पुरुषों में ईएसआर 15 मिमी/घंटा से नीचे होना चाहिए।
• 50 साल से कम उम्र वाली महिलाओं का ईएसआर 20 मिमी/घंटा से नीचे होना चाहिए।
• 50 साल से ज्यादा उम्र वाले पुरुषों में ईएसआर 20 मिमी/घंटा से नीचे होना चाहिए।
• 50 साल से ज्यादा उम्र वाली महिलाओं का ईएसआर 30 मिमी/घंटा से नीचे होना चाहिए।
• नवजात शिशुओं का ईएसआर 2 मिमी/घंटा के अंदर होना चाहिए।
• युवावस्था में प्रवेश करने वाले बच्चों का ईएसआर 2 से 13 मिमी/घंटा के अंदर होना चाहिए।

ईएसआर टेस्ट के हाई रिजल्ट्स-

शरीर में ईएसआर लेवल को बढ़ाने वाले कई कारक हो सकते हैं जैसे –

  • खून की कमी
  • लिंफोमा
  • बुढ़ापा
  • टेम्पोरल आर्टेराइटिस
  • प्रेगनेंसी
  • मल्टीपल मायलोमा
  • रूमेटाइड आर्थराइटिस
  • थाइरॉइड

अगर टेस्ट का रिजल्ट ज्यादा आता है तो ये समस्या ऑटोइम्यून विकार से भी जुड़ी हो सकती है।

रिजल्ट में ईएसआर का लेवल लो आना कोई समस्या तो नहीं हैं लेकिन इसका लेवल अगर बहुत ही कम आता है तो ये ऐसी कुछ बीमारियों का संकेत जरूर हो सकता है-

  • सिकल सेल एनीमिया
  • ल्यूकोसाइटोसिस
  • पोलिसिथिमिया
  • हाइपरविस्कॉसिटी
  • कंजेस्टिव हार्ट फेलियर

दोस्तों, अब आप ईएसआर टेस्ट के बारे में जानकारी प्राप्त कर चुके हैं। उम्मीद है कि ये जानकारी आपके लिए फायदेमंद साबित होगी।

हमने आपसे सिर्फ ज्ञानवर्धक जानकारी साझा की है। कोई भी प्रयोग आजमाने से पहले अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल जरूर करे और अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर ले। सदैव खुश रहे और स्वस्थ रहे।

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