क्या कभी आपने सोचा है कि कैप्सूल दो रंगों का क्यों होता है ?

हम सभी ने अपने जीवन में कई बार दवाइयों का सेवन किया होगा लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि कैप्सूल दो रंगों का क्यों होता है?? आमतौर पर लिया जाने वाला कैप्सूल हमेशा से ही दो रंगो का होता है लेकिन हम में से कई लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते।

बीमारी में कैप्सूल का सेवन तो हम कर लेते हैं लेकिन इस बात पर शायद ही कोई व्यक्ति होगा जिसका ध्यान गया होगा तो चलिए आज हम आपको इस बारे में पूरी जानकारी देते हैं।

सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि कैप्सूल दो भागों में विभाजित होता है जिसमें से एक भाग बड़ा और दूसरा भाग छोटा होता है। बड़ा भाग कैप्सूल का कंटेनर होता है और छोटा भाग उसकी कैप अब आपको विस्तारपूर्वक रंगों के विभाजन के कारन बताते है।

जब भी कैप्सूल को फिल किया जाता है तो कंटेनर वाले भाग को मशीन में लगा दिया जाता है और दवाई को जब इसके अंदर डाला जाता है उसके बाद कैप को इसमें मशीन के द्वारा ही फिक्स किया जाता है। इस काम में कोई गड़बड़ी ना हो इसीलिए कैप्सूल को दो रंग में विभाजित किया जाता है।

दूसरा कारण यह माना जाता है कि रंगबिरंगा होने की वजह से बच्चे इस दवाई को आसानी से खा लेते हैं मुख्य तौर पर कैप्सूल विभिन्न रंगों का भी बनाया जाता है।

तीसरा कारण यह माना जाता है की अलग-अलग दवाइयों को विभाजित करने के लिए इन्हें अलग-अलग रंग का बनाया जाता है ताकि बनाते समय इस बात का पूर्ण रुप से ध्यान रहे कौन सी दवाई कितनी मात्रा में डाली गई है।

हम आशा करते हैं यह जानकारी आपके लिए रोचक सिद्ध हुई होगी और आप इसे अपने मित्रों के साथ अवश्य शेयर करेंगे।

“क्या आपने कभी सोचा है की एरोप्लेन की खिड़की में एक छोटा छेद क्योँ होता है”
“क्या आपने कभी सोचा है की घडी के विज्ञापन में समय 10:10 ही क्यों होता है”
“क्या आपने कभी सोचा है कि iPhone में ‘i’ का मतलब क्या है ?”