फर्जी हाऊस रेंट स्लिप लगाकर टैक्स बचाने वालों के लिए बुरी खबर

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हम टैक्स बचाने के लिए कई तरह के निवेश करते हैं और उन्हीं में से एक है हाउस रेंट स्लिप जिसके जरिए हम टैक्स में बचत कर सकते हैं। लेकिन कई लोग ऐसे हैं जो खुद के घर में रहते हुए भी टैक्स बचाने के लिए फर्जी रेंट स्लिप दिखाते हैं लेकिन अब फर्जी रेंट स्लिप दिखाकर टैक्स बचाने वालों के लिए एक बुरी खबर है क्योंकि अब रेंट स्लिप दिखाकर एचआरए क्लेम लेने वालों से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट किराये पर रहने और किराये की राशि से जुड़े पुख्ता सबूत मांग सकता है। अब हाउस रेंट स्लिप दिखाकर टैक्स में छूट लेने वालों को पुख्ता सबूत देने होंगे कि वह दी गई स्लिप वाले पते पर वास्तव में किराएदार के तौर पर रहता है या नहीं तभी Tax में छूट मिल सकेगी वरना इसे निरस्त कर दिया जायेगा।

सबूत के तौर पर आयकर विभाग मकान मालिक के साथ लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट, हाऊसिंग सोसायटी को लिखा गया पत्र, बिजली या पानी का बिल इत्यादि सबूत के तौर पर मांग सकता है। अगर आयकर विभाग के अधिकारियों को किसी कर्मचारी के हाउस रेंट स्लिप में दिखाए गए पते या राशि पर शक होता है या उन्हें लगता है कि यह रेंट स्लिप नकली है तो उस कर्मचारी पर जांच बैठ सकती है और फिर उस किरायेदार कर्मचारी को साबित करना होगा कि वह अपनी रेंट स्लिप पर बताये पते पर वास्तव में किरायेदार के तौर पर रहता है।

फिलहाल HRA (हाउस रेंट अलाउंस) छूट के ये हैं नियम ?

कोई भी वेतन भोगी कर्मचारी हाउस रेंट स्लिप दिखाकर HRA का 60% तक छूट ले सकता है। अभी तक यह नियम है की सालाना 1 लाख तक किराए की रसीद दिखाकर हम टैक्स में छूट प्राप्त कर सकते हैं। सालाना 1 लाख से ऊपर किराया दिखाने पर मकान मालिक का पैन नंबर दिखाना जरूरी होता है।

क्यों लेना पड़ा आयकर विभाग को यह फैसला ?

कुछ लोग टैक्स बचाने के लिए खुद ही के घर में रहते हुए भी नकली हाउस रेंट स्लिप दिखाकर टैक्स में छूट पा लेते थे। कुछ लोग अपने किराए की राशि को बढ़ा करना भी टैक्स में छूट का फायदा उठा लेते थे। इन सब मामलों पर शिकंजा कसने के लिए आयकर विभाग ने ऐसे कड़े नियम जारी किए हैं ताकि ऐसे फर्जी मामलों को पकड़ा जा सके। अब हाउस रेंट स्लिप देने वाले कर्मचारियों से आयकर विभाग पुख्ता सबूत मांग सकता है जिसमे कर्मचारी को साबित करना होगा की वो जिस मकान में रह रहा है वहां वो किरायदार के तौर पर रहता है।

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