फरवरी में 28 या 29 दिन ही क्‍यों होते हैं?

नवम्बर 21, 2018

एक साल में 12 महीने होते हैं, ये तो आप अच्छे से जानते हैं और आपको ये भी पता है कि ज्यादातर महीने 30 या 31 दिन के होते हैं। बस एक फरवरी का महीना ही है जो 28 दिन का होता है और चार साल में एक बार 29 दिन का हो पाता है। क्या आप जानते हैं फरवरी में 28 या 29 दिन होने का क्या कारण है? अगर नहीं, तो चलिए आज आपको इसी बारे में बताते हैं।

फरवरी में हर चौथे साल में 29 दिन होने का कारण ये है कि पृथ्वी को सूर्य की परिक्रमा लगाने में 365 दिन और 6 घंटे का समय लगता है और हर साल के ये अतिरिक्त 6 घंटे बचाकर रख दिए जाते हैं। तीन साल बाद अगले साल में ये घंटे जोड़ दिए जाते हैं और इस तरह 28 दिन की फरवरी में एक दिन जुड़ जाने से फरवरी 29 दिन की हो जाती है।

अब सवाल ये उठता है कि फरवरी में 28 दिन ही क्यों है? इसका जवाब इतिहास से जुड़ा है। माना जाता है कि इसमें रोमन लोगों का हाथ है क्योंकि आज जो कैलेंडर हमारे द्वारा इस्तेमाल किया जाता है वह रोमन कैलेंडर से मिलता-जुलता है।

ये कहानी प्रचलित है कि रोम के पहले शासक रोमुलुस के समय ऐसा कैलेंडर प्रचलित था जिसमें मार्च से दिसम्बर तक ही महीने हुआ करते थे। वहां सर्दी में कृषि नहीं हो पाने की वजह से उस समय का रोमन लोगों के लिए कोई महत्व नहीं था इसलिए उन्होंने सर्दी के समय को अपने कैलेंडर का हिस्सा ही नहीं बनाया।

रोम के दूसरे शासक नुमा पोम्पिलियुस ने कैलेंडर को ज्यादा सटीक करने के लिए चाँद के अनुसार एक वर्ष पूरा करने का विचार किया। उस समय एक चंद्र वर्ष 354 दिन का होता था। इसलिए कैलेंडर में दिसंबर के बाद जनवरी और फरवरी महीने जोड़े गए ताकि बाकी बचे दिनों की गिनती हो सके। उस समय दोनों ही महीनों को 28 दिनों का रखा गया ताकि चंद्र वर्ष के हिसाब से बचे हुए 56 दिन पूरे हो सकें।

रोम में 28 नम्बर को बुरा समझा जाता था इसलिए नुमा ने जनवरी में एक और दिन जोड़कर उसे 29 दिन का बना दिया लेकिन नुमा ने फरवरी में एक और दिन क्यों नहीं जोड़ा, इसका कारण ज्ञात नहीं हो पाया है। इतने प्रयासों के बाद भी कैलेंडर मौसम में होने वाले बदलावों के अनुसार नहीं बन पाया। बाद में रोम के प्रसिद्ध शासक जूलियस सीजर ने 45 BC में कैलेंडर को सूर्य के अनुसार बनवाया। अब कैलेंडर के हर साल में 10 दिन जोड़ें गए और हर चौथे साल में एक और दिन जोड़ने पर हर साल 365 दिन और 6 घंटे लम्बा हो गया।

इसके बाद हर महीने के दिनों की संख्या को भी बदल दिया गया जिसके अनुसार फरवरी में 29-30 रखे गए। कुछ वक्त बाद इसमें फिर बदलाव हुआ और अगस्त में रखे गए 30 दिन को बढ़ाकर 31 कर दिया गया और फरवरी में दिनों की संख्या 28-29 कर दी गयी। तब से ये क्रम ऐसा ही चलता आ रहा है।

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