गंगाजल कभी खराब क्यों नहीं होता?

फरवरी 15, 2018

हिन्दू धर्म में गंगा नदी का एक ख़ास स्थान है और इसे सबसे पवित्र नदी माना गया है और इससे जुडी सबसे ख़ास बात ये है की इस नदी का पानी कभी ख़राब नहीं होता। ऐसा माना जाता है की गंगा नदी में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं। साधारण पानी को कई दिनों तक रखा जाये तो वो ख़राब हो जाता है लेकिन गंगा जल को चाहे कितने भी समय रखो वो खराब नहीं होता। ऐसा कहा जाता है की पुराने समय में जब अंग्रेज भारत से इंग्लैंड जाते थे तो अपने पीने के लिए पानी ले जाते थे लेकिन वो रास्ते में खराब हो जाता था इसीलिए वो अपने साथ गंगाजल लेकर जाते थे क्योंकि वो ख़राब नहीं होता।

सिर्फ हिन्दू मान्यता ही नहीं बल्कि वैज्ञानिकों के शोध में भी ये पाया गया है की गंगा का पानी कभी ख़राब नहीं होता और इसमें बैक्टीरिया को मारने की क्षमता है। लेकिन ये सवाल आपके मन में भी आता होगा की ऐसी क्या खासियत है की गंगा का पानी कभी ख़राब नहीं होता? तो आइये आपको बताते हैं इसके पीछे के वैज्ञानिक कारण के बारे में।

दरअसल गंगा नदी हिमालय की कोख गंगोत्री से निकल कर कई चट्टानों से होती हुई हरिद्वार में अलकनंदा से मिलती है और इसमें गंधक, सल्फर, खनिज, खास लवण और जड़ीबूटियां मिल जाती हैं और इसी कारण ये जल कहीं ज्यादा शुद्ध और औषधीय गुणों से परिपूर्ण हो जाता है।

वैज्ञानिक शोधों के अनुसार गंगाजल में ऐसे जीवाणु होते हैं जो पानी को सड़ाने वाले कीटाणुओं को पैदा ही नहीं होने देते और इसी वजह से गंगा का पानी लंबे समय तक खराब नहीं होता। वैज्ञानिकों के अनुसार गंगाजल में एक ख़ास बैक्टीरिया पाया जाता है जिसका नाम है बैट्रिया फोस जो पानी के अंदर रसायनिक क्रियाओं के जरिये ऐसे बैक्टीरिया को नष्ट करता रहता है जो पानी को ख़राब करते हैं और ऐसे में ये जल हमेशा शुद्ध बना रहता है। इसके अलावा गंगाजल में कई भू-रासायनिक क्रियाएं भी होती रहती हैं जो इस जल को ख़राब करने वाले कीड़े पनपने ही नहीं देती।

देश विदेश के कई महान वैज्ञानिकों ने गंगाजल पर अपना शोध किया और माना की गंगाजल सबसे शुद्ध और पवित्र है। वैज्ञानिकों के अनुसार गंगाजल से स्नान करने और इसे पीने से हैजा, प्लेग, मलेरिया और अन्य बिमारियों वाले कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। इसी कारण वैज्ञानिकों ने भी माना है की गंगाजल सही मायनों में पीने लायक है।

गंगाजल की शुद्धता के प्रमाण के लिए एक बार ब्रिटिश सरकार के डॉ. हैकिन्स भारत आये और उन्होंने गंगाजल में हैजे के कीटाणु डाले और परिणामस्वरूप ये कीटाणु मात्र 6 घंटें में ही मर गए जबकि इन्ही कीटाणुओं को साधारण पानी में डाला गया तो कुछ ही देर में इन कीटाणुओं की संख्या बढ़ गई। ऐसे ही कई वैज्ञानिक शोधों से इस बात के प्रमाण मिले की गंगाजल सबसे शुद्ध जल है जो कभी ख़राब नहीं होता और वैज्ञानिकों ने भी माना की ये जल सबसे पवित्र है।

हिंदू धर्म में गंगाजल को अमृत माना गया है जिससे स्नान करने से हमारे सभी पाप और रोग दूर हो जाते हैं। हिन्दू धर्म में माना जाता है की मृत्यु से पहले अगर कोई गंगाजल का सेवन करता है तो उसे मरणोपरांत स्वर्ग में स्थान मिलता है।

तो अब आप सभी को भी यकीन हो गया होगा की क्यों गंगाजल सबसे पवित्र और शुद्ध जल है।

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