गणित की खोज किसने की?

महान गणितज्ञ गाउस ने कहा था कि ‘गणित सभी विज्ञानों की रानी’ है। विज्ञान और टेक्नोलॉजी का एक महत्वपूर्ण टूल गणित है इसलिए भौतिकी, रसायन शास्त्र और खगोल विज्ञान जैसी विधाएँ गणित के बिना समझना संभव नहीं है। गणित की कई शाखायें हैं जैसे अंकगणित, रेखागणित, त्रिकोणमिति, सांख्यिकी, बीजगणित आदि। घड़ी में समय देखना हो या बाजार से खरीदे सामान का हिसाब लगाना हो या मैच का स्कोर ही लिखना हो, हम सभी अपने रोजमर्रा के कामों में गणित का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में ये जानना रोचक होगा कि गणित को हम तक पहुंचाया किसने? तो चलिए, आज बात करते हैं गणित की खोज की।

आज से 4000 साल पहले बेबीलोन और मिस्र सभ्यताएं गणित का इस्तेमाल पंचांग बनाने के लिए करती थी जिससे उन्हें ये जानकारी मिल जाती थी कि फसल की बुआई कब की जानी चाहिए या नील नदी में कब बाढ़ आ सकती है। इसके अलावा वर्ग समीकरणों को हल करने में भी गणित का इस्तेमाल किया जाता था।

इन सभ्यताओं के लोग व्यापार का हिसाब-किताब रखने में अंकगणित का प्रयोग करते थे और खेतों के चारों तरफ की सीमाओं का निर्धारण और पिरामिड जैसे स्मारकों का निर्माण करने के लिए ज्यामिति का उपयोग करते थे।

सबसे पहला सैद्धांतिक गणितज्ञ मिलेटस निवासी थेल्स (645-546 ईसा पूर्व) को माना जाता है जिन्होंने बताया कि किसी भी वस्तु की ऊंचाई का मापन छड़ी द्वारा निक्षेपित परछाई से तुलना करके मापा जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने एक सूर्य ग्रहण के बारे में भविष्यवाणी भी की थी। उनके शिष्य पाइथोगोरस ने ज्यामिति को यूनानियों के बीच एक मान्य विज्ञान का स्वरुप दिलाकर यूक्लिड और आर्किमिडीज के लिए आगे का मार्ग आसान बनाया।

अगर भारत के योगदान की बात करें तो बारहवीं सदी तक गणित की सम्पूर्ण विकास यात्रा में, गणित के विकास के लिए जितने भी महत्वपूर्ण प्रयास किये गए, उनमें से ज्यादातर प्रयास भारतीय गणितज्ञों की खोजों पर ही आधारित थे।

दोस्तों, इस तरह इतिहास के पन्नों से निकलकर गणित ने अपने क्षेत्र को व्यापक बनाया और आज गणित के बिना विज्ञान और प्रौद्योगिकी की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

“पीने के पानी का टीडीएस कितना होना चाहिए?”