गर्भनिरोधक गोली के जानलेवा खतरे

जून 23, 2017

पिछले कुछ दशको में दुनिया में बहुत कुछ बदला है। बदलाव विकास की पहचान है। समय के साथ लोगों ने खुद में भी परिवर्तन किया हैं। इसी परिवर्तन में परिवार नियोजन भी एक बहुत बड़ा मुद्दा रहा है। बढ़ती आबादी को देखते हुए यह जरूरी भी था। इसी पर अंकुश लगाने के लिए एक उपाय आज बहुत ही आम है उसका नाम है गर्भनिरोधक गोली यानी एंटीबेबी पिल। इसके बिना परिवार नियोजन तो क्या नारी को समानता दिलाने में भी सफलता नहीं मिलती, जो सम्मान नारी के पास आज हैं। गर्भनिरोधक गोलियों का चलन लगभग 50 सालों से चल रहा है। अलग-अलग कंपनियाँ अलग-अलग नाम से इन गोलियों को बाजार में बड़ी सफलता से चला रही है। यह गोलियाँ प्रचलन में भी बहुत तेजी से आई, क्योंकि अनचाहे गर्भ से बचने का यह सबसे आसान तरीका भी हैं।

दिखने में यह छोटी गोलियाँ बड़े काम की चीज है। किसी भी दवाई की दुकान से आसानी से इन्हें खरीदा जा सकता है। नव दंपति कुछ समय एक दूसरे को देना पसंद करते है और बच्चे के जन्म में भी समय लेना चाहते है। लेकिन क्या आपने सोचा है जितनी सरल इनकी उपलब्धि है उतनी सरलता से इन दवाओं का घातक परिणाम भी है। हर दवाई की तरह गर्भनिरोधक गोली के भी कुछ साइड इफेक्ट है। साइड इफेक्ट्स के अलावा इन गोलियों को कुछ खास परिस्थितियों में ना खाने की भी सलाह दी जाती है। इन गोलियों में दो तरह के हार्मोन होते है इन हार्मोन की मात्रा पर निर्भर करता है कि किस गोली में कौन से ख़तरे या उपप्रभाव छिपे हुए हैं। गर्भनिरोधक गोलियाँ में आम तौर पर दो अलग-अलग वर्गों के हार्मोन होते हैं। एक को एस्ट्रोजन और दूसरे को गेस्टाजन कहते हैं। तथ्यों के आधार पर आपको इनसे होने वाले परिणामों के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। इतनी सरल उपलब्धि कितनी खतरनाक साबित हो सकती है इस लेख के माध्यम से पढ़े। इसमें कोई संदेह नहीं इन गोलियों के नकारात्मक प्रभाव होते है।

कारण चाहे जो भी हो परिणाम महिलाओं के हिस्से ही आता है। गोली एक तरह की होती है लेकिन सभी महिलाओं में हार्मोन अलग-अलग होता है। इसलिए इसके परिणाम भी हर मरीज में अलग-अलग आते है। आइये अब गर्भनिरोधक गोली के दुष्प्रभाव के बारे में जानें।

1. माहवारी में परेशानी – कई बार गर्भनिरोधक गोली लेते ही मासिक धर्म शुरू हो जाता है तो कई बार समय आगे-पीछे हो जाता है। पीरियड के समय कई बार भारी रक्तस्त्राव और तेज दर्द की शिकायत होती है। इससे प्रजनन प्रणाली पर भी विपरीत असर पड़ता है। इसका असर मासिक चक्र पर भी पड़ता है। अनियमित पीरियड की परेशानी का अनुभव भी उठाना पड़ सकता है।

2. शारीरिक दर्द – लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोली के इस्तेमाल से पीरियड के समय पेट दर्द, कमर दर्द, छाती में दर्द या भारीपन आदि शारीरिक समस्या हो सकती है। ब्लिडिंग भी अधिक हो सकती है जिससे कमजोरी की समस्या भी आ जाती है। समस्या अधिक बढ़े उससे पहले ही डॉक्टर से राय जल्दी ले।

3. वजन और मोटापा – शादी-शुदा महिलाओं में यह समस्या आम है। दरअसल गर्भनिरोधक गोलियों में मौजूद हार्मोन के साइड इफेक्ट से शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाती है जिससे स्त्रियों का वजन भी बढ़ने लग जाता है। बर्थ कंट्रोल में भारी मात्रा में एस्ट्रोजन होता है जो भूख को खत्म करने के बाद भी वजन में इजाफ़ा करता है। इन गोलियों के सेवन के कुछ ही हफ्तों में आपको महसूस होने लगता है की आपकी चर्बी बढ़ रही है।

4. गर्भधारण में समस्या – गर्भनिरोधक गोलियों के अधिक सेवन से गर्भाशय की झिल्ली धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है। इस परेशानी का सामना गर्भधारण के समय अनुभव होता है। गर्भपात और प्रेगनेंसी के बीच लंबे अंतराल के खतरे बढ़ जाते हैं। शोध के अनुसार इसका असर बर्थ चाइल्ड पर भी पड़ सकता है उनकी प्रतिरोधक क्षमता घट सकती है। परेशानी का सामना हर बार करने से बेहतर है आप जल्द अपने डॉक्टर से संपर्क करे।

5. शारीरिक समस्या – इस गोली के लगातार सेवन से काफी आम शारीरिक समस्या शुरू हो जाती है। यह गोलियां हार्मोन बैलेंस को प्रभावित करती हैं। खासकर एस्ट्रोजन वाली गर्भनिरोधक गोलियां खाने के बाद। अपने आपको शारीरिक रूप से कमजोर समझना। पेट में दर्द, मुंहासे, चक्कर आना, जी मिचलाना, उल्टी, अधिक नींद, घबराहट, बदन दर्द, सिर दर्द जैसी कई समस्या सामने आती है जिससे आपको लगता है आप गर्भवती है। कोई भी धारणा बनाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले।

6. स्तनों में समस्या – गर्भनिरोधक गोलियों में एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा अधिक होती है जो शरीर में जरूरत से ज्यादा हो जाए तो महिलाओं में स्तन से जुड़ी समस्याएं शुरू हो जाती है। इसके कारण स्तन कैंसर का खतरा भी बना रहता है।

7. योनि इंफेक्शन – अधिक मात्रा में इन गोली के सेवन से खुजली, जलन और योनि इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। यह समस्या उन औरतों में अधिक होती है जिन्हें मधुमेह की शिकायत हो या जो अधिक मीठा, शराब और धूम्रपान का सेवन करती हो। इस स्थिति में या तो इन चीजों से परहेज करे या गर्भनिरोधक के दूसरे विकल्प का चुनाव करे।

8. आँखों पर – जो महिलाएँ चश्मा लगाती है और इन गोलियों का सेवन करती है उनकी आँखों के आगे धूंधलापन आने लगता है। आँखों के हार्मोन में बदलाव आने से आँखों की पुतली में सूजन की समस्या भी आ सकती है। आँखों की रोशनी के साथ और भी कई समस्या आ सकती है। ऐसे में इन गोलियों के सेवन में सावधानी बरते।

9. खून का थक्का जमना – जो महिलाएँ 35 के पार है या जिसने हाल ही में बच्चे को जन्म दिया है या जिनका वजन अधिक है, ऐसी औरतों में यह समस्या अधिक होती है. सांस में तकलीफ, सीने में दर्द या जलन, पैरों या बाहों में सूजन महसूस हो तो दिल या फेफड़ों में खून का थक्का जमने का संकेत हो सकता है। यह कई स्थिति में जानलेवा भी हो सकता है। इसलिए इस आशंका को अनदेखा बिल्कुल ना करे।

10. फिजिकल रिलेशनशिप में अरुचि – यह हार्मोन गोलियाँ होती है जो सेक्स हार्मोन का प्रोडक्शन रोक देती है। जिससे महिलाओं में सेक्स के प्रति आकर्षण घटता जाता है। अधिक गोली के सेवन से सेक्स के प्रति रूचि में कमी आती जाती है जिसका कारण है सेक्स के दौरान दर्द का अधिक होना।

कुछ परिस्थिति में इन गोलियों का सेवन सही नहीं है। क्योंकि स्वास्थ्य के लिए यह सही नहीं रहती। लेकिन इसका निर्णय डॉक्टर से सलाह मशवरा लेकर आप ले सकती है। किंतु निम्न में से कुछ अवस्था आप पर लागू होती है तो आप चिकत्सक की सलाह जरूर ले, गर्भनिरोधक गोली के सेवन से पहले।

उपरोक्त कोई भी समस्या से आप पीड़ित रही हो या आक्षेपरोधी या क्षय रोग की दवाएं ले रही हो तो संभवतः आपके चिकित्सक आपको मिनिपिल लेने की सलाह नहीं देंगे।

आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों को बेहद संवेदनशील माना जाता है। इनके लगातार सेवन से हार्मोन पैटर्न बुरी तरह प्रभावित हो सकते है। कई महिलाएं इन गोलियों का सेवन बहुत ही अधिक मात्रा में करती है। तो कुछ महिलाएं बार-बार गर्भ ठहर जाने की स्थिति में अधिक करती है। फिजिकल रिलेशनशिप के 72 घंटे के अंदर इस गोली के सेवन से गर्भ नहीं ठहरता। इस बात की जानकारी के कारण यह गोलियाँ महिलाओं को अधिक प्रेरित करती हैं, बिना परिणाम जानें। आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन केवल इमरजेंसी में करे, इसे लगातार इस्तेमाल करना हानिकारक हो सकता है। इन छोटी गोलियों के बहुत बड़े-बड़े नुकसान है। आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन के बाद भी कई बार पूर्ण रूप से गर्भपात नहीं होता जिससे संक्रमण की सम्भावना बढ़ जाती है। यह महिला के लिए अतिरिक्त जोखिम है। शरीर में जरा भी असावधानी दिखे, तो जितना जल्दी संभव हो ध्यान दे। इसमें लापरवाही जान का जोखिम बढ़ा सकती है। हम महिलाओं को यह सलाह देना चाहेंगे एबार्शन का यह एक मात्र तरीका नही है और भी विकल्प होते है डॉक्टर के पास। क्योंकि यह आप नहीं समझ सकते यह गोलियाँ कैसे काम करती है लेकिन इसके घातक परिणाम का असर आपके पूरे जीवन पर पड़ सकता है।

शुरू से ही सावधानी बरतना सबसे अच्छा विकल्प होता है। लेकिन अनहोनी भी संभव है। अब सवाल निति या सुझाव का नही, बल्कि सवाल यह है की आपके फैसले से आने वाली पीढ़ी पर क्या असर होगा। एबार्शन और गर्भनिरोधक गोलियों में कुछ जोखिम तो होता है, लेकिन अनुभवी और कुशल विशेषज्ञ की सलाह पर इनका उपयोग किया जाए तो यह जोखिम कम हो जाता है। महिला जब बार-बार एबार्शन या गर्भ ना ठहरने की समस्या से पीड़ित होती है तो भीतर से नकारत्मक, मनोवैज्ञानिक, तनावपूर्ण और भावात्मक दर्द के प्रभाव से गुजरती है। गर्भपात चाहे वह स्वयं की इच्छा से हो या किसी सामाजिक और पारिवारिक दवाब की वजह से. परिणाम औरतों के हिस्से ही आता है। इस परेशानी से निदान पाने का एक तरीका है इन गोलियों के बारे में संपूर्ण जानकारी और चिकित्सक से समय-समय पर सलाह।

किसी भी कारण से अगर आप गर्भनिरोधक गोली ले रही है तो उसमें नियमितता जरूर रखे। गर्भनिरोधक गोली को एक ही समय पर रोजाना लेना सही रहता है। किसी भी दिन छूटनी नहीं चाहिए। लेकिन एक ताजा रिसर्च से यह पता चला है कि इन गोलियों के इस्तेमाल के नुकसान तो हैं। ऐसे में गर्भनिरोधक के रूप में और अधिक सुरक्षित व सरल उपाय को खोजने की जरूरत बढ़ गई। अगर आपका शरीर किसी भी रूप में इन गोलियों को स्वीकार नहीं कर रहा है तो तुरंत डॉक्टर के संपर्क में आए और कोई अन्य विकल्प का चयन करे। जान है तो जहान है।

गर्भनिरोधक गोली के सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से अच्छा कोई मार्गदर्शक नहीं होता। हमने जानकारी के आधार पर यह लेख लिखा है। हमने आपसे सिर्फ ज्ञानवर्धक जानकारी साझा की है। अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल हमेशा करे। सदैव खुश रहे और स्वस्थ रहे।

“क्यों नहीं पीना चाहिए खड़े होकर पानी”

अगर आप हिन्दी भाषा से प्रेम करते हैं और ये जानकारी आपको ज्ञानवर्धक लगी तो जरूर शेयर करें।
शेयर करें