अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए महिलाओं द्वारा गर्भनिरोधक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इन दवाओं का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा है और इनके कई विकल्प आज बाज़ार में मौजूद हैं। ये गर्भनिरोधक दवाएं भले ही बहुत छोटे आकार की होती है लेकिन ये बहुत प्रभावी रूप से अपना काम करती हैं। इन गर्भनिरोधक दवाओं का चलन भले ही बहुत बढ़ गया है लेकिन इनका ज़्यादा सेवन महिलाओं की सेहत पर विपरीत प्रभाव भी डाल सकता है। ऐसे में ये जानना बेहतर होगा कि ये गर्भनिरोधक दवाएं कैसे काम करती हैं। तो चलिए, आज आपको बताते हैं कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स यानी गर्भनिरोधक दवाओं के बारे में।

महिला द्वारा असुरक्षित सम्भोग के बाद 3 दिन के अंदर इस गोली का सेवन किया जा सकता है, वैसे इसका सेवन जितना जल्दी किया जाए, उतना बेहतर होता है। इसके सेवन के 5 दिन बाद शरीर पर इसका असर होने लगता है।

गर्भनिरोधक दवाएं कैसे काम करती है? 1

इमरजेंसी पिल्स में ऐसे हार्मोन का इस्तेमाल होता है जिससे शरीर में भ्रूण का निषेचन रुक जाता है और गर्भ नहीं ठहरता है। इन गोलियों का सेवन, गर्भाशय में मौजूद अंडे को निषेचित होने से रोक सकता है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, ये गोलियां बेहतरीन काम करती हैं लेकिन अगर इनका सेवन हमेशा या लम्बे समय तक किया तो शरीर पर इसका बुरा असर पड़ने लगता है, जैसे – लगातार गर्भनिरोधक दवाएं लेने से दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना और रक्त पर भी दुष्प्रभाव पड़ना।

इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को कम कर देती हैं जिससे गर्भधारण नहीं होता लेकिन इसके सेवन से हार्टअटैक और दौरे पड़ने का ख़तरा बना रहता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों की बजाये, गर्भनिरोधक गोलियां ज़्यादा बेहतर विकल्प होती है क्योंकि इनमें एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन हार्मोन होते हैं जो गर्भाशय के लिए नुकसानदायक नहीं होते हैं।

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लेकिन निरोध के रूप में, गर्भनिरोधक दवाओं की अपेक्षा पुरुष द्वारा कंडोम का इस्तेमाल करना ही सबसे सुरक्षित और बेहतर उपाय होता है।

अब आप जान चुके हैं कि गर्भ निरोधक गोलियां सेहत को किस तरह प्रभावित करती है और अगर इमरजेंसी पिल्स ली जाएँ तो शरीर पर बहुत बुरे प्रभाव पड़ सकते हैं। ऐसे में सही विकल्प का चुनाव करना ज़रूरी है ताकि अनजाने में सेहत के साथ कोई खिलवाड़ ना हो।

“पेट में जाने के बाद दवाएं कैसे काम करती हैं?”