घर का मुख्य द्वार वास्तु शास्त्र के अनुसार कैसा और कहाँ होना चाहिए?

हम सभी अपने घर-परिवार में खुशहाली चाहते हैं और इसके लिए दिन-रात जतन भी किया करते हैं लेकिन अगर इसके साथ-साथ हम घर के वास्तु पर भी गौर करें तो परिवार में खुशहाली की हमारी ये इच्छा बहुत आसानी से पूरी हो सकती है। यूँ तो घर का हर कोना अपना महत्व रखता है लेकिन घर के मुख्य द्वार का महत्व बहुत अधिक होता है। ऐसे में घर के मेन गेट यानी मुख्य द्वार के वास्तु शास्त्र को जानना बेहतर साबित होगा। तो चलिए, आज जानते हैं कि घर का मुख्य द्वार वास्तु शास्त्र के अनुसार कैसा और कहाँ होना चाहिए-

  • ऐसा माना जाता है कि हमारे शरीर में जितना महत्व मुख का होता है उतना ही महत्व घर के मुख्य द्वार का होता है। घर का मुख्य द्वार घर के बाकी सभी द्वारों से बड़ा होना चाहिए।
  • मुख्य द्वार के लिए पूर्व या उत्तर दिशा सबसे अच्छी मानी जाती है और जहाँ तक संभव हो, घर का मुख्य द्वार मध्य पश्चिम या दक्षिण में नहीं बनाना चाहिए।
  • मुख्य द्वार चार भुजाओं की चौखट वाला होना चाहिए यानी इसमें दहलीज भी होनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि दहलीज आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को रोकती है।
  • घर के मुख्य द्वार पर रोशनी की अच्छी व्यवस्था रखनी चाहिए।
  • अगर आपके घर के शुरुआत में पर्याप्त स्थान है तो आपको दो दरवाजे बनवाने चाहिए। एक अंदर आने के लिए और एक बाहर जाने के लिए।
  • अगर आप दो दरवाजे बनवाते हैं तो ये ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है कि बाहर जाने वाले द्वार का आकार, अंदर आने वाले मुख्य द्वार से छोटा होना चाहिए।
  • मुख्य द्वार के दोनों तरफ और ऊपर कुमकुम, रोली, केसर और हल्दी को मिलाकर स्वास्तिक या ॐ का चिन्ह बनाना चाहिए।
  • अगर घर दक्षिण या पश्चिम मुखी हो तो उसमें कभी भी सिर्फ एक ही मुख्य द्वार नहीं बनवाना चाहिए।
  • मुख्य द्वार हमेशा अंदर और घड़ी की दिशा में ही खुलना चाहिए।
  • मुख्य द्वार को खोलने और बंद करने में किसी तरह की आवाज़ नहीं होनी चाहिए।
  • अगर एक द्वार के ऊपर दूसरा द्वार बनवाना पड़े तो ये ध्यान रखें कि ऊपर वाला द्वार मुख्य द्वार से छोटा होना चाहिए और एक सीध में होना चाहिए।
  • घर का मुख्य द्वार और रसोई आमने-सामने नहीं होने चाहिए लेकिन अगर आपके घर में ऐसी स्थिति है तो रसोई घर के दरवाजे पर पर्दा लगा लें।
  • घर के वास्तु दोष को कम करने के लिए, घर के मुख्य द्वार पर 4*4 इंच का ताम्बे से निर्मित वास्तु दोष निवारण यंत्र लगाया जा सकता है।
  • मुख्य द्वार से सम्बंधित वास्तु दोष को दूर करने के लिए इस द्वार पर घंटियों की झालर लगायी जा सकती है जिससे उत्पन्न होने वाली आवाज़ नकारात्मक ऊर्जा को घर से दूर रखेगी।

दोस्तों, वास्तुशास्त्र का सहयोग लेकर आप अपने घर के हर कोने से नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकते हैं और घर-परिवार की खुशहाली की अपनी चाहत को आसानी से पूरा भी कर सकते हैं इसलिए अगर आप घर बनवा रहे हैं तो घर के मुख्य द्वार से जुड़ी इन बातों पर जरूर गौर करें और अगर आपके घर के मुख्य द्वार में वास्तु दोष है तो आसान से उपाय करके इन्हें दूर कर लीजिये ताकि नेगेटिव एनर्जी बाहर ही रहे और आपके घर में सिर्फ पॉजिटिव एनर्जी ही प्रवेश कर सके।

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“घर का नक्शा वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा होना चाहिए”

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