गिनी गुणांक क्या है?

गिनी गुणांक को गिनी अनुपात या सामान्यीकृत गिनी सूचकांक भी कहा जाता है। ये एक सांख्यिकीय फैलाव का माप है जिसका उद्देश्य किसी देश के निवासियों के आय वितरण का प्रतिनिधित्व करना है और ये सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला असमानता का माप है। ऐसे में आपको भी इससे जुड़ी थोड़ी जानकारी जरूर लेनी चाहिए। तो चलिए, आज बात करते हैं गिनी गुणांक क्या है।

समाज में व्याप्त आय और संपत्ति के असमान वितरण की माप सांख्यिकी आधार पर करना गिनी गुणांक कहलाता है। इसका विकास इतालवी सांख्यिकीविद और समाजशास्त्री कोराडो गिनी ने किया और इसे उनके 1912 के पत्र ‘वरिएबिलिटी एंड म्युटेबिलिटी’ में प्रकाशित किया गया।

गिनी गुणांक का मान जितना ज्यादा होता है, समाज में विषमता उतनी ही अधिक होती है। इसके विपरीत गिनी गुणांक का मान जितना कम होता है उतनी ही समाज में आर्थिक विषमता कम होती है।

अगर गिनी गुणांक का मान शून्य हो या शून्य के करीब हो तो इसका अर्थ है कि समाज में आर्थिक असमानता कम है यानी समाज में व्यक्तियों की आय में समानता है लेकिन अगर गिनी गुणांक का मान एक या एक के करीब हो तो समाज में आर्थिक असमानता ज्यादा होगी।

दोस्तों, उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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