ग्लूटेन क्या है?

सितम्बर 9, 2018

ग्लूटेन क्या है और किसमे पाया जाता है – ग्लूटेन एक प्रकार का लसलसा पदार्थ होता है जो प्रोटीन का ही एक प्रकार है। इसकी सबसे अधिक मात्रा गेहूँ, जौ, राई जैसे अनाजों में अधिक पाई जाती है। इसलिए इनसे बनी हर चीज में भी ग्लूटेन की मात्रा होती ही है। जैसे की रवा, पास्ता, ब्रेड, मैदा, सेवईया, दलिया सभी गेहूँ से ही बनते है इसलिए इनमें भी कम या अधिक रूप में ग्लूटेन होता ही है। प्रोटीन का यह लसलसा पदार्थ खाने की चीजों को एक आकार में बनाए रखने का काम करता है। यह पूरी तरह से सोडियम फ्री होता है। ग्लूटेन दो अलग-अलग प्रोटीन से मिलकर बनता है और यह दोनों ही प्रोटीन 80% गेहूँ के बीजों में निहित है।

क्या होता है ग्लूटेन के सेवन से – अधिकतर भारतीय घरों में गेहूँ से बने भोजन को ही प्राथमिकता दी जाती है। लेकिन सोचिए अगर आपको अचानक से आपका डॉक्टर गेहूँ या गेहूँ से बनी चीजों को खाने से रोक दे और कहे यह आपके लिए जहर है ऐसा सुनते ही एक बार तो आप शॉक हो जायेंगे। शायद आपका तर्क भी यह रहे की सदियों से तो लोग गेहूँ का ही सेवन करते आ रहे है फिर अब क्यों नहीं? रोज-रोज भला चना, मक्का, बाजरा, रागी या ज्वार की रोटी तो नहीं खाई जा सकती ना। दोस्तों, सदियों पहले वाले जमाने में और आज की खेती के तरीक़ो में जमीन आसमान का बदलाव आया है। समस्या उस समय भी होती थी लेकिन हजारों में एक को। आपको बता दे भारतीय गावों में आज भी ऐसे अनाज की रोटियाँ बनाई जाती है जो पौष्टिकता के साथ-साथ ऊर्जावान भी होती है। जिन्हें देखते हुए शहरी लोग भी अब अपने खान-पान में ऐसी रोटियों को शामिल कर रहे है। बच्चों को बचपन से ही सब तरह के अनाज की आदत डालिए जिससे उन्हें बराबर पोषण मिलता रहे।

आपके तर्क को मानते हुए डॉक्टर कुछ दिन के लिए अगर आपको गेहूँ ना खाने का कहे और ऐसा करने पर आपका शरीर हल्का फील करे तो इसका मतलब है गेहूँ से आपको असहजता है। एक स्टडी के अनुसार 10% से अधिक की आबादी ग्लूटेन से संबंधित बीमारियों से ग्रसित है। समय रहते ध्यान ना दिया गया तो यह समस्या गंभीर रूप भी ले सकती है। एक उचित मात्रा में यह शरीर को क्षति नहीं पहुँचाता। लेकिन मात्रा अधिक होने पर शरीर में असहजता नजर आती है जैसे पेट का फूलना या पेट के अन्य रोग, हृदय रोग, कैंसर, गैस, डायरिया, अस्थमा, उल्टी, माइग्रेन जैसी समस्या हो सकती है और जिन लोगों में सैलिएक रोग हो या गेहूँ से एलर्जी हो उन्हें गेहूँ ना खाने की ही सलाह दी जाती है। क्योंकि सैलिएक रोगी ग्लूटेन के प्रति पूरी तरह से असहनशील होता है। इसलिए अच्छा तो यही होता है लक्षणों को पहले ही भांप लिया जाए और सुधार की दिशा में फैसले लिए जाए।

ग्लूटेन कब असहनशील हो जाता है – ग्लूटेन नामक प्रोटीन जब पेट की कोशिकाओं में विपरीत प्रतिक्रिया पैदा कर देता है उस स्थिति में ग्लूटेन असहनशील हो जाता है। फिर रोग की अवस्था, प्रकार, बढ़ती तीव्रता, आनुवांशिकता पर अधिक निर्भर करता है की रोगी को गेहूँ से एलर्जी है या सैलिएक रोग से पीड़ित है।

क्या होता है सैलिएक रोग और किसे होता है – यह बीमारी 150 में से किसी एक व्यक्ति को होती है। जब शरीर ग्लूटेन नामक प्रोटीन को अवशोषित करने में सक्षम नहीं होता तब यह रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। सैलिएक छोटी आंत की समस्या है इसे साबुत अनाजों से होने वाली एक तरह की एलर्जी भी कह सकते है। कई बार ग्लूटेन से निकला भोजन पाचन तंत्र को विपरीत रूप से प्रभावित करता है जिस कारण सैलिएक जैसा रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। यह रोग किसी भी आयुवर्ग के लोगों में हो सकती है। कई बार यह रोग परिजनों के द्वारा भी बच्चों में स्थानांतरित हो सकता है।

रोगी के लक्षण के आधार पर रक्त जांच से इसका पता किया जाता है। बीमारी के पुख्ता होने पर ऐसे रोगी को आजीवन ग्लूटेन फ्री आहार लेने की सलाह दी जाती है दवा या अन्य किसी भी तरह से इसका उपचार संभव नहीं है। ऐसे आहार से सैलिएक के लक्षणों को कंट्रोल किया जाता है जिससे बीमारी गंभीर रूप ना ले। आज तक इस बीमारी का कोई निश्चित कारण सामने नहीं आया है। जब व्यक्ति किसी बुरी परिस्थिति से गुजरता है तब इसके लक्षण सामने आते है जैसे बच्चे का जन्म, कोई गंभीर रोग, सर्जरी, इंफेक्शन, वजन का बढ़ना या कम होना, एनिमिया, जोड़ों या हड्डियों में दर्द, चक्कर आना, त्वचा पर दाग, मासिक धर्म का अनियमित आदि कई लक्षण होते है जो सभी व्यक्ति में समान हो यह जरूरी नहीं।

ग्लूटेन फ्री आहार क्या होते है – बीन्स, ब्राउन राइस, कुट्टू का आटा, मक्का, चिकन, मछली, अंडा, चावल, चना, फल, बाजरा, ड्राई फ्रूट, फलियाँ, कम वसा का दूध, जौ, ऑलिव ऑयल, सब्जियाँ, दही, सोयाबीन्स, शकरकंदी आदि कई भोज्य पदार्थ होते है। डॉक्टर की सही सलाह आपका सही मार्गदर्शन करेगी।

सामान्य लोगो को ग्लूटेन फ्री डाइट की सलाह नहीं दी जाती। क्योंकि ग्लूटेन फ्री डाइट के बगैर एक संतुलित भोजन को ले पाना बहुत ही मुश्किल है। हाँ यह सलाह जरूर दी जाती है की ग्लूटेन फ्री आहार कम ले। इस बात पर भी गौर करे मार्केट में मिलने वाले उत्पादों पर ग्लूटेन फ्री का लेबल लगा दिया जाता है की यह आहार हेल्दि है। लेकिन ऐसा दावा सच हो यह जरूरी नहीं। ग्लूटेन फ्री खाने में कई ऐसी चीज भी हो सकती है जो आपके लिए सही ना हो जैसे सैचुरेटेड फैट, ट्रांस फैट, शुगर, नमक, कोलेस्ट्रॉल आदि। इसलिए किसी भी खाने की चीज को लेने से पहले लेबल को जरूर पढ़े और हो सके तो किसी अच्छे ब्रांड को ही प्राथमिकता दे। वो कहते है ना महँगी चीज एक बार रूलाती है लेकिन सस्ती चीजें बार-बार। हमारा शरीर भी कोई सस्ता नहीं है की कुछ भी खाके इसकी सेहत के साथ समझौता करे।

दोस्तों, आप जो भी खाते-पीते है क्या वो चीज़े शुद्ध प्रामाणिकता की कसौटी पर खरी उतरती है। यह जानना जरूरी है क्योंकि हम बहुत बड़ी कीमत अदा करते है इन चीजों के लिए। इसलिए किसी भी चीज को खाने के बाद आपको बार-बार असहजता महसूस हो रही है तो उसकी जांच करवाना एक जागरूक नागरिक का फर्ज होता है। इसलिए सुनी सुनाई या लिखी हुई बातों पर विश्वास करने से अच्छा है स्वयं जागरूक बन जाए।

हमने आपसे सिर्फ ज्ञानवर्धक जानकारी साझा की है। अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर ले। सदैव खुश रहे और स्वस्थ रहे।

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