हड्डियां कमजोर क्यों हो जाती हैं?

आप जानते हैं कि हमारे शरीर को बनाने में हर एक अंग का विशेष महत्व है जिनमें से हड्डियां भी बेहद ज़रूरी भाग है क्योंकि इन हड्डियों के कारण ही हमारा शरीर खड़ा हो पाता है। हमारे शरीर में 206 हड्डियां पायी जाती हैं जिनकी संख्या उम्र बढ़ने के साथ-साथ कम होती जाती है क्योंकि समय के साथ इन हड्डियों में से कुछ गल जाती है और कुछ आपस में जुड़ जाती हैं। हमारे शरीर को मजबूती के साथ खड़ा रखने वाली ये हड्डियां कैल्शियम, फॉस्फोरस, सोडियम और आवश्यक मिनरल्स से बनी होती हैं लेकिन जब इन पोषक तत्वों की शरीर में कमी होने लगती है तो हड्डियों का क्रैक होना शुरू हो जाता है जिसकी वजह से फ्रैक्चर जैसी परेशानियां भी उठानी पड़ सकती हैं। हड्डियों को कमज़ोर करने वाला रोग ऑस्टिओपोरेसिस है, जिसमें हड्डियां इतनी पतली और कमज़ोर हो जाती है कि ज़रा सी चोट लगते ही टूटने लगती हैं। इस रोग को साइलेंट रोग भी कह सकते हैं क्योंकि इस बीमारी में हड्डियां कमजोर होती जाती हैं लेकिन इसका अंदाजा हम लगा नहीं पाते हैं। ऐसे में ये जान लेना बेहद ज़रूरी है कि आखिर किन कारणों से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। तो चलिए, आज बात करते हैं हड्डियों के कमज़ोर होने के कारणों की –

कैल्शियम की कमी – हड्डियों को मजबूत बनाये रखने के लिए कैल्शियम बहुत ज़रूरी होता है और अगर आपके आहार में कैल्शियम की मात्रा काफी कम है तो हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और लम्बे समय तक कैल्शियम की कमी रहने से हड्डियां टूटने भी लग सकती हैं। इसके अलावा विटामिन-डी की कमी से भी हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।

असंतुलित जीवनशैली – हड्डियों की मजबूती बनाये रखने के लिए शरीर का सक्रिय बने रहना ज़रूरी होता है, व्यायाम करने और एक्टिव रहने से हड्डियां मजबूत बनती हैं लेकिन आज की जीवनशैली में आराम को ज़्यादा महत्व दिया जाता है और ऐसी आरामपसंद दिनचर्या और पोषणरहित आहार के कारण हड्डियां कमजोर होती जाती है।

धूम्रपान और तम्बाकू का सेवन – तम्बाकू में मौजूद निकोटिन हड्डियों को भी कमजोर बनाता है। इसके सेवन से हड्डियों और जोड़ों के दर्द बढ़ जाते हैं और रीढ़ की हड्डी कमज़ोर होने लगती है। तम्बाकू के सेवन से ऑस्टिओपोरेसिस रोग हो सकता है, साथ ही बोन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के लिए भी तम्बाकू का सेवन और धूम्रपान उत्तरदायी हैं।

थाइरॉइड – थाइरॉइड रोग का सम्बन्ध भी हड्डियों की सेहत से जुड़ा है। थाइरॉइड होने की स्थिति में भी हड्डियां कमजोर होने लगती हैं क्योंकि थाइरॉइड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन थाइरॉक्सिन की मात्रा जब ज्यादा हो जाती है तो हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

बढ़ती उम्र – उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां कमजोर होने की समस्या महिलाओं में ज़्यादा पायी जाती है। रजोनिवृत्ति के बाद शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं जिनके कारण हड्डियों में कैल्शियम की कमी हो जाती है और एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी हो जाने से हड्डी का घनत्व भी कम होने लगता है।

आनुवंशिकता – हड्डियों का रोग ऑस्टिओपोरेसिस एक आनुवंशिक रोग हैं यानि माता-पिता में ये रोग होने पर बच्चों की हड्डियां कमजोर होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

दवाओं का सेवन – कैंसर, अस्थमा, मिरगी जैसे रोगों में ली जाने वाली दवाएं भी हड्डियों को कमज़ोर करने लगती हैं। इसके अलावा नींद की गोली लेने से भी हड्डियों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और स्टेरॉइड्स या हार्मोनल दवा लेने से भी हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं।

भले ही हड्डियों के कमजोर होते जाने का अंदाजा हम नहीं लगा पाते हैं लेकिन अब आप ये तो जान चुके हैं कि हड्डियां कमजोर होने के पीछे कारण क्या है और अच्छी बात ये है कि अपनी हड्डियों को मजबूत बनाये रखने के लिए आपको ज़्यादा मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है, बस अपनी डाइट को हेल्दी रखने के साथ उसमें कैल्शियम की मात्रा को बैलेंस कर लीजिये, विटामिन-डी भी लेते रहिये और अपनी डेली लाइफ को थोड़ा-थोड़ा करके ही सही, एक्टिव बना लीजिये। ऐसा करने से ना केवल आपकी हड्डियां मजबूत होंगी बल्कि आपकी पूरी सेहत को बहुत फायदा मिलेगा। तो बस, अभी से एक्टिव हो जाइये ताकि आपकी हड्डियां भी कमज़ोर होने की बजाये हमेशा एक्टिव बनी रहें।

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