हेयर ट्रांसप्लांट क्या है?

जून 16, 2018

शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जिसे घने, मजबूत बालों की चाह ना हो लेकिन आज की इस अनहेल्दी और स्ट्रेस से भरपूर लाइफ ने साइड इफ़ेक्ट के तौर पर बालों के उड़ने और गंजेपन जैसी समस्याएं उपहार स्वरुप दी हैं लेकिन इसी मॉडर्न लाइफस्टाइल ने इस मुश्किल का हल भी निकाल लिया हेयर ट्रांसप्लांट के रूप में, जो एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे सिर के उड़े हुए बाल फिर से उगाये जा सकते हैं। ऐसे में आपको भी हेयर ट्रांसप्लांट से जुड़ी जानकारी लेनी चाहिए। तो चलिए, आज बात करते हैं हेयर ट्रांसप्लांट के बारे में –

भारत में पिछले दो दशक में ये तकनीक काफी प्रचलित हो गयी है लेकिन महँगी तकनीक होने की वजह से शुरुआत में केवल रईस लोग और फिल्म स्टार्स ही इसका फायदा उठाया करते थे लेकिन धीरे-धीरे इससे जुड़ी नयी तकनीकें आ जाने से आम आदमी तक इसकी पहुँच हो गयी और अब हेयर ट्रांसप्लांट कराना तुलनात्मक रूप से सरल और सस्ता हो गया है।

हेयर ट्रांसप्लांट क्या है – हेयर ट्रांसप्लांट एक ऐसी सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें सिर के पीछे या साइड से घने बाल लेकर सिर के उस एरिया में प्लांट कर दिए जाते हैं जहाँ बाल नहीं होते हैं। इस प्रक्रिया में आठ से दस हफ्ते का समय लगता है और ये सर्जरी एक्सपर्ट डॉक्टर्स द्वारा ही की जाती है।

सामान्य तौर पर तो सिर के बालों को ही ट्रांसप्लांट किया जाता है लेकिन अगर किसी व्यक्ति के सिर पर ज्यादा बाल ना हो तो दाढ़ी के बालों को भी प्लांट किया जा सकता है।

ये तकनीक कैसे काम करती है – इस प्रक्रिया में एक हफ्ते में एक सर्जरी की सीटिंग होती है जिसमें पांच से छह घंटे का समय लगता है और इस दौरान व्यक्ति के सिर पर कुछ ही बाल ट्रांसप्लांट किये जाते हैं। एक्सपर्ट्स की टीम द्वारा किये जाने वाले इस ट्रांसप्लांट के लिए कई सीटिंग की जाती है।

स्ट्रिप मैथड – स्ट्रिप मैथड में व्यक्ति के बालों की हिस्ट्री का अध्ययन किया जाता है। उसके बाद सर्जरी के दौरान सिर के डोनर एरिया से बालों की एक लम्बी स्ट्रिप निकालकर, बिना बालों वाले हिस्से में टांकों की मदद से लगा दी जाती है।

फॉलिकल प्रक्रिया – अगर सिर के आगे के हिस्से में बाल कम हों तो स्ट्रिप मैथड से उसे ठीक नहीं किया जा सकता। ऐसे में मरीज को बेहोश करके एक-एक बाल को बहुत सावधानी से ग्राफ्ट करना होता है। इस तकनीक में सिर पर टांकें के कोई निशान भी नहीं पड़ते हैं।

इसमें कितना खर्च आता है – हेयर ट्रांसप्लांट की इस तकनीक में हर एक बाल की कीमत तय होती है। जहाँ स्ट्रिप मेथड में एक बाल की ग्राफ्टिंग में 30 से 40 रुपये का खर्चा आता है, साथ ही इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का खर्चा भी जोड़ा जाता है वहीं फॉलिकल मैथड जैसी एडवांस तकनीक में एक बाल की ग्राफ्टिंग का खर्च 50 से 60 रुपये तक आता है।

हेयर ट्रांसप्लांट का क्या प्रभाव पड़ता है – हेयर ट्रांसप्लांट करवाने के दो से तीन हफ्ते बाद बालों का उगना शुरू होता है और ये बाल एकदम नेचुरल होते हैं। एक बार छोटे-छोटे बाल आते हैं जो धीरे-धीरे लम्बे हो जाते हैं और इस तरह गंजेपन की समस्या दूर हो जाती है क्योंकि एक बार हेयर ट्रांसप्लांट के बाद वो बाल हमेशा सिर की जड़ों से उगते रहते हैं।

हेयर ट्रांसप्लांट करवाने से नुकसान क्या है – हेयर ट्रांसप्लांट करवाना जहाँ गंजेपन जैसी समस्या से निजात दिलाता है वहीं इससे जुड़ी कुछ गंभीर समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है जैसे हेयर ट्रांसप्लांट के बाद सिर में खुजली होना, ब्लीडिंग होना और इन्फेक्शन का ख़तरा होना।

दोस्तों, हर नयी तकनीक अपने साथ ढेरों फायदे और कुछ नुकसान लेकर आती है। ऐसा ही हेयर ट्रांसप्लांट की तकनीक के साथ भी है जो अब काफी प्रचलित हो चुकी है। ऐसे में जरुरी ये है कि इस तकनीक का इस्तेमाल करने से पहले एक्सपर्ट से खुलकर बात की जाएं और अपनी स्किन से जुड़ी सभी परिस्थितियां स्पष्ट करने के बाद ही इसके लिए तैयार हुआ जाएँ। उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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