हाथ पैर क्यों सो जाते हैं?

थोड़ी देर अगर हम बैठ जाएँ तो कई बार हमारे हाथ या पैर सो जाते हैं और उनमे झन्नाहट महसूस होती है। जब भी हम कई देर तक किसी एक पोजिशन में बैठे रहते हैं तो हमारे पैर सो जाते हैं और अगर हम ज्यादा देर तक कहीं हाथ टिका कर बैठ जाते हैं तो हमारी बाहों के साथ भी ऐसा ही होता है जबकि जब हम बांह के बल पर सो जाते हैं तो उठने के बाद हाथ और बाहें सो जाने की शिकायत होती है। लेकिन जब हम थोड़ा हिलते डुलते हैं और हाथ पैरों में थोड़ी हरकत करते हैं तो ये वापस ठीक हो जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की आखिर हमारे हाथ पैर क्यों सो जाते हैं? हमारे हाथ पैर सो जाने के पीछे क्या कारण होता है और क्या ऐसा होना खतरनाक है?

दरअसल हाथ पैरों का सोना एक आम बात है, जब भी हम कई समय तक एक ख़ास पोजीशन में बैठे रहते हैं तो हमारी कुछ नसों पर दबाव पड़ता है और ऐसे में उन अंगों को जैसे हाथ और पैर में पूरी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती और ऐसे में अंग शिथिल हो जाते हैं और जब इसका सन्देश मस्तिष्क तक पहुँचता है तो मस्तिष्क उन अंगों में झनझनाहट पैदा करता है और हमें हाथ पैरों को हरकत में लाने और चहलकदमी करने को मजबूर करता है।

यूँ तो हाथ पैरों का सोना एक आम बात है लेकिन अगर आपके साथ हाथ पैरों का सोना दिन में कई बार होता है और झनझनाहट भी काफी लम्बे समय तक रहती है तो डॉक्टर से इसकी जाँच करें क्योंकि कई बार ऐसा स्लिप डिस्क, मल्टीपल स्क्लेरोसिस या डायबिटीज के कारण भी होता है।

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