क्या आप जानते हैं हमें क्यों आती है छींक ?

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छींक आना एक शारीरिक प्रक्रिया है जबकि इसे कई तरह के अच्छे और बुरे संकेतों से जोड़कर देखा जाता रहा है जैसे कि ग़लत समय पर छींक देने से कुछ बुरा हो सकता है। अगर आप भी ऐसा ही मानते हैं और इस वजह से कई बार अपनी छींक को आने से रोक भी लेते हैं तो ऐसा मत कीजिये। छींक आना एक सहज प्रक्रिया है जिसे ज़बरदस्ती रोकने से आपके शरीर को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। तो चलिए, आज आपको बताते हैं छींक आने का क्या कारण होता है और छींक रोकने से शरीर को क्या हानि हो सकती है –

छींक आने का कारण –
सामान्य रूप से ये माना जाता है कि छींक आने का कारण सर्दी-जुकाम होना या किसी तरह की एलर्जी होना है। लेकिन छींक आने का वास्तविक कारण सिर्फ इतना ही नहीं है। ये हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का हिस्सा है जिसमें फेफड़ों से हवा, नाक और मुँह के मार्ग से होते हुए तेज़ी से बाहर निकलती है। जब भी नाक में कोई बाहरी कण घुस जाता है जिससे नाक की झिल्ली में खुजली या सूजन आने लगे तो नाक से ये सन्देश हमारे मस्तिष्क तक जाता है और मस्तिष्क ही उन कणों को बाहर निकालने का आदेश शरीर की मांसपेशियों को देता है और छींक के ज़रिये ऐसे हानिकारक कणों को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।

छींक आने की प्रक्रिया में शरीर के कितने अंग एक साथ सक्रिय होकर काम करते हैं, ये जानकर आपको हैरानी ज़रूर होगी क्योंकि इस छोटी सी छींक में पेट,छाती, डायफ़्राम, गला और आँखें, ये सभी अंग मिलकर काम करते हैं और उस अनचाहे कण को छींक के ज़रिये शरीर से बाहर निकाल देते हैं। ये जानकर भी आप चौंक जायेंगे कि एक छींक की गति 100 मील/घंटा होती है और इसके साथ करीब 1 लाख कीटाणु बाहर हवा में आते हैं।

जब आप नींद में होते हैं तब आपको छींक नहीं आती है ना, उसका कारण ये है कि सोते समय छींक से सम्बंधित नसें आराम की स्थिति में रहती हैं।

छींक रोकने से हो सकते हैं ये नुकसान –
कई बार लोगों के बीच रहते हुये आप छींकने में असहज महसूस करते हैं इसलिए छींक को आने से रोक लेते हैं लेकिन ऐसा करने से तेज़ दबाव के साथ नाक से हवा बाहर आने की बजाये दूसरे अंगों की ओर मुड़ जाती है जिससे सबसे ज्यादा नुकसान कान के परदे को हो सकता है। इसके अलावा छींक रोकने से शरीर से बाहर निकलने वाले बैक्टीरिया भी शरीर में ही रह जाते हैं जो सेहत को हानि पहुंचा सकते हैं। जब छींक आने में शरीर के कई अंग भाग लेते हैं तो छींक रुकने पर भी तो कई अंग प्रभावित होंगे ना। इसका प्रभाव आँखों पर भी पड़ता है और गर्दन में मोच भी आ सकती है। बार बार ऐसा करने से दिल का दौरा और दिमाग को क्षति जैसे भारी नुकसान भी उठाने पड़ सकते है।

इसलिए अब से आप छींक को रोके नहीं और न ही इसे किसे शुभ-अशुभ घटना से जोड़े, बल्कि शरीर की एक सामान्य क्रिया के रूप में इसे समझे और भीड़ में रहते समय छींक आने पर आप अपने मुँह पर रुमाल रख ले ताकि आपकी और आसपास के लोगों की असहजता समाप्त हो सके, इन्फेक्शन का ख़तरा भी न रहे और आपकी सेहत भी सुरक्षित बनी रहे।

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