हनुमान चालीसा में सबसे पहले हुआ था धरती से सूरज की दूरी का आंकलन

सदियों पुराने हमारे ग्रन्थ जिनमें कुछ बातें ऐसी लिखीं है जिनको जान कर आज भी हम अचंभित रह जाते है। ऐसा ही कुछ अचंभित करने वाला तथ्य आज हम आप सभी को बताने जा रहे है।

यह बात हम में से अधिकांश लोग जानते है की गिोवन्नी कासिनी और जीन रिचे वो दो व्यक्ति थे जिन्होंने 17 वीं शताब्दी में धरती से सूरज की दूरी का आंकलन किया था जो पृथ्वी से करीब 149.6 मिलियन​ किलोमीटर यानि 14,96,00,000 किलोमीटर दूर है।

लेकिन आप सभी को यह जान कर अचम्भा होगा की उस से कई साल पहले तुलसी दास जी ने हनुमान चालीसा में एक दोहा लिखा था जिसको अगर विस्तार पूर्वक देखा जाए तो उसमें भी पृथ्वी से सूरज की दूरी का व्याख्यान है।

दोहा कुछ इस प्रकार है

जुग सहस्र जोजन पर भानु ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥

अब आपको इसका अर्थ बताते है 1 जुग यानि 12000, सहस्त्र यानि 1000, 1 योजन यानि 8 मील.

12000 x 1000 x 8 = 96,000,000 मील, 1 मील = 1.6 किलोमीटर
96,000,000 x 1.6 = 15,36,00,000 किलोमीटर

यह दूरी भी व्यग्यनिकों द्वारा निकली गयी दूरी के आस पास ही है।

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