आइये जानते हैं हरिद्वार के पर्यटन स्थल के बारे में। हरिद्वार यानी हरि (भगवान विष्णु) का द्वार, जिसे मोक्षद्वार भी कहा जाता है। उत्तराखंड का ये जिला भारत का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहाँ उत्तराखंड के 5 तीर्थस्थान हैं जिन्हें पंच तीर्थ कहते हैं।

यहाँ पवित्र गंगा नदी बहती है और ये पवित्र स्थान चारधाम की यात्रा पर जाने का एंट्री पॉइंट है। माना जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान जिन चार जगहों पर अमृत की बूंदें गिरी थी, उनमें से एक स्थान हरिद्वार भी है।

ऐसे में उत्तराखंड के इस पवित्र धार्मिक स्थल के दर्शनीय स्थलों पर आपको भी जरूर जाना चाहिए। तो चलिए, आज हरिद्वार चलते हैं। ये है हरिद्वार के पर्यटन स्थल।

हरिद्वार के पर्यटन स्थल 1

हरिद्वार के पर्यटन स्थल

हर की पौड़ी – हर की पौड़ी का अर्थ है भगवान हरि के पैर। माना जाता है कि यहाँ सबसे पहले भगवान विष्णु ने चरण रखे थे। यहाँ होने वाली गंगा आरती का विशेष महत्व है। हर दिन दो बार यहाँ गंगा आरती होती है। संध्या आरती के समय घंटियों की आवाज और बहते हुए हजारों दीयों का नज़ारा बहुत ही मनमोहक होता है। हर रोज यहाँ हजारों भक्त गंगा स्नान के लिए आते हैं।

मनसा देवी मंदिर – हरिद्वार का एक प्रसिद्ध सिद्धपीठ है मनसा देवी मंदिर, जो बिलवा पहाड़ पर स्थित है। यहाँ पहुँचने के लिए रोपवे की सुविधा भी है। मनसा देवी को पार्वती जी का एक रुप माना गया है। माना जाता है कि यहाँ मांगी गयी मन्नतें मनसा माता पूरी करती हैं। यहाँ से गंगा नदी और हरिद्वार के खूबसूरत नज़ारे देखने को मिलते हैं।

चंडी देवी मंदिर – 2900 मीटर की ऊंचाई पर नील पर्वत पर स्थित इस सिद्धपीठ तक जाने के लिए भी रोपवे की सुविधा है। इस मंदिर का निर्माण आदि शंकराचार्य ने करवाया था। चंडी देवी भी माता पार्वती का एक रुप मानी जाती हैं। कहा जाता है कि माता पार्वती ने चंडी रुप में ही चंड-मुंड और शुम्भ-निशुम्भ का वध किया था।

दक्षेश्वर महादेव मंदिर – हरिद्वार से 6 किमी. दूर, कनखल में स्थित इस मंदिर का निर्माण 1810 में रानी धनकौर ने करवाया था। कहा जाता है कि जिस स्थान पर राजा दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया था जिसमें सती ने अपनी आहूति दे दी थी, उसी स्थान पर ये मंदिर बनवाया गया है। इसे 52 शक्तिपीठ का केंद्र माना जाता है। इस मंदिर में एक छोटा गड्ढा है। माना जाता है कि इसी स्थान पर देवी सती ने अपने जीवन का त्याग किया था।

त्रिवेणी धाम – इस स्थान पर गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों का संगम होता है इसलिए इसे त्रिवेणी संगम कहा जाता है। कहा जाता है कि यहाँ स्थित त्रिवेणी घाट पर स्नान करने से सभी तकलीफों से मुक्ति मिलती है।

वैष्णो देवी मंदिर – कटरा में स्थित वैष्णो देवी मंदिर जैसा मंदिर हरिद्वार में भी बनाया गया है। इस मंदिर में भी वैष्णो देवी मंदिर की तरह गुफाएं बनी हुयी हैं।

पावन धाम – इस मंदिर की कलाकृति बेहद उम्दा और अनोखी है। इस मंदिर में मूर्तियों को कांच से दीवार पर बनाया गया है। इसका निर्माण स्वामी वेदांता जी महाराज ने 1970 में करवाया था।

विष्णु घाट – माना जाता है कि इस घाट पर स्वयं भगवान विष्णु ने स्नान किया था इसलिए यहाँ स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं। इस घाट पर सबसे ज्यादा संख्या में श्रद्धालु स्नान करने आते हैं।

सप्तऋषि आश्रम – इस स्थान पर एकसाथ सात ऋषि बैठकर तप किया करते थे। इसे सप्तऋषि कुंड भी कहा जाता है।

चिल्ला अभयारण्य – धार्मिक स्थल हरिद्वार से 11 किलोमीटर दूर स्थित इस अभयारण्य में प्राकृतिक दृश्यों और अलग-अलग प्रजाति के जीव-जंतु देखे जा सकते हैं।

भारत माता मंदिर – ये भारत देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ भारत माता की मूर्ति के रुप में पूजा की जाती है। साथ ही यहाँ भारत के ऋषि-मुनियों, स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों और वैज्ञानिकों की मूर्तियां भी हैं।

दोस्तों, भारत के इस पवित्र तीर्थ स्थल का भ्रमण आपको भी जरूर करना चाहिए।

उम्मीद है हरिद्वार के पर्यटन स्थल कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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