हार्मोन की कमी से क्या होता है?

हमारे शरीर की वृद्धि और विकास को प्रभावित करने वाले बहुत से कारकों में से एक अहम कारक हार्मोन ही होते हैं जो शरीर की लगभग सभी क्रियाओं को कण्ट्रोल करते हैं। ऐसे में ये जरुरी हो जाता है कि हर हार्मोन की एक संतुलित मात्रा शरीर में स्रावित होती रहे जिससे शरीर स्वस्थ बना रहे लेकिन बदली हुयी लाइफस्टाइल और ईटिंग हैबिट्स ने हार्मोन असंतुलन को बहुत बढ़ा दिया है जिसके कारण शरीर में बहुत-सी बीमारियां हमला करने लगी है और हार्मोन में होने वाले असंतुलन ने पूरे शरीर की कार्यप्रणाली को ही असंतुलित कर दिया है। ऐसे में आज, जानते हैं कि हार्मोन की कमी शरीर को किस तरह प्रभावित करती है।

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थायरॉइड हार्मोन की कमी – इस हार्मोन की कमी होने से शारीरिक और मानसिक विकास बहुत धीरे होने लगता है, सोचने और बोलने की क्रिया धीमी हो जाती है और बाल झड़ने, शरीर का तापमान कम होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इस हार्मोन की कमी से बच्चों में क्रेटिनिज्म रोग हो जाता है।

इन्सुलिन हार्मोन – अग्नाशय द्वारा उत्पादित ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म के लिए बहुत जरुरी होता है और ये हार्मोन ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करता है। इस हार्मोन की कमी होने पर डायबिटीज का ख़तरा काफी बढ़ जाता है।

एस्ट्रोजन हार्मोन – महिलाओं में पाए जाने वाले इस सेक्स हार्मोन की कमी होने पर बालों का झड़ना, त्वचा पर घाव और मुहांसे होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं और अनियमित पीरियड्स के कारण मूड स्विंग, थकान और डिप्रेशन जैसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं।

प्रोजेस्टेरोन हार्मोन – प्रेगनेंसी को बनाये रखने में महत्वपूर्ण इस हार्मोन की कमी होने पर मूड बदलना, वजन बढ़ना, तनाव, कामेच्छा में कमी और मसूड़े की बीमारी जैसे कई लक्षण दिखाई देते हैं।

प्रोलैक्टिन हार्मोन – मस्तिष्क में स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि से बनने वाला ये हार्मोन स्तनपान के लिए एक आवश्यक हार्मोन है जिसमें असंतुलन होने पर अनियमित पीरियड्स या मेनोपॉज़ जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

टेस्टोस्टेरोन हार्मोन – पुरुषों में पाया जाने वाला ये सेक्स हार्मोन शरीर की मांसपेशियों के निर्माण में मदद करता है और इसकी कमी होने पर हड्डियां कमजोर होने जैसे कई लक्षण दिखाई देते हैं।

सेरोटोनिन हार्मोन – मनोदशा को बढ़ाने वाला ये हार्मोन अगर कम मात्रा में बने तो अवसाद, वजन बढ़ना, अनिद्रा, माइग्रेन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

कोर्टिसोल हार्मोन – एड्रिनल ग्रंथि से बनने वाला ये हार्मोन शारीरिक और मानसिक तनाव को कण्ट्रोल करता है। इसकी कमी होने पर शराब पीने की आदत और क्रोनिक थकान सिंड्रोम जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं।

एड्रेनालाईन हार्मोन – आपातकालीन हार्मोन के रूप में जाना जाने वाला ये हार्मोन शरीर में तनावपूर्ण स्थिति में निर्णय लेने में मदद करता है। इसकी कमी बहुत ही दुर्लभ मामलों में ही होती है जिसमें जेनेटिक कैटेक्लोमाइन एंजाइम डेफिशिएंसी के रुप में दिखाई देता है।

ग्रोथ हार्मोन या सोमैटोट्रोपीन हार्मोन – शरीर में विकास, कोशिका प्रजनन और मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देने वाला ये हार्मोन अगर शरीर में कम बने तो बच्चों का शारीरिक विकास रुक सकता है और यौन परिपक्वता आने में भी देरी हो सकती है।

दोस्तों, उम्मीद है कि मानव शरीर के आवश्यक हार्मोनों से जुड़ी ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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