हीरा क्‍यों चमकता है?

कोयले की खान में बनने वाला हीरा गुणों की खान होता है, तभी तो कोयलों के बीच रहकर भी इसकी चमक, मजबूती और खूबसूरती हैरान करने वाली होती है। ऐसे में आपको भी जानना चाहिए कि आखिर हीरे में ऐसा क्या होता है कि वो इतना चमकदार होता है और मजबूत भी। तो चलिए, आज आपको बताते हैं हीरा क्‍यों चमकता है और हीरे की इन खासियतों के बारे में।

हीरा पारदर्शी होता है और नाजुक दिखने वाला हीरा सबसे कठोर पदार्थों में से एक होता है। ये प्रकृति में क्रिस्टल रुप में मिलते हैं। कार्बन के इस शुद्धतम रूप की संरचना कुछ इस तरह की होती है कि इसमें मौजूद हर कार्बन परमाणु चार अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ सह-संयोजी बंध से जुड़ा रहता है।

हीरे में चमक होने के कारण-

  • पूर्ण आतंरिक परावर्तन
  • अपवर्तन
  • विक्षेपण

पूर्ण आतंरिक परावर्तन – जब किसी चमकीली सतह पर प्रकाश पड़ता है तो उसका कुछ हिस्सा सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापिस चला जाता है। इसे परावर्तन कहते हैं। हीरे में जब प्रकाश प्रवेश करता है तो उसका एक हिस्सा परिलक्षित होता है जबकि बाकी उसके माध्यम से गुजर जाता है।

हीरे का अपवर्तनांक 2.42 होता है। हीरे को इस तरह काटकर बनाया जाता है कि जब कोई प्रकाश की किरणें इसमें प्रवेश करें तो हीरे का क्रांतिक कोण कम होने के कारण उसमें प्रकाश का पूर्ण परिवर्तन हो जाता है जिससे हीरा ज्यादा चमकदार दिखाई देता है।

अपवर्तन – जब हीरे में प्रकाश का प्रवेश होता है तो कभी-कभी प्रकाश बिखर जाता है। ऐसा अपवर्तन के कारण होता है जिससे हीरा चमकने लगता है।

विक्षेपण – हीरा छोटा और जटिल प्रिज्म होता है जिसमें प्रकाश ऊपरी हिस्से से प्रवेश करता है और इसे अंदर से एक क्रांतिक कोण पर काटता है जिसके कारण इंद्रधनुष के समान प्रकाश का फैलाव हो जाता है जिससे हीरा चमकने लगता है। इसे विक्षेपण कहते हैं।

दोस्तों, अब आप समझ गए होंगे कि हीरा वाकई गुणों की खान होता है और इतनी चमक के लिए उसे बहुत तराशा भी जाता है तभी कोयले की खान में रहने वाला एक चमकीला पत्थर हीरा बन पाता है।

“पीने के पानी का टीडीएस कितना होना चाहिए?”