यहाँ दस साल से भी कम उम्र मेँ लडकियाँ बन जाती हैँ दुल्हनेँ

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आज भारत भले विकास की नई- नई उंचाईयोँ को छू रहा हो लेकिन आज भी वह अपने देश के बच्चोँ का बचपन व उनका भविष्य बचाने मेँ पूरी तरह समर्थ नहीँ है। यह दुखद है कि भारत मेँ आज भी काफी बडी संख्या मेँ बाल विवाह होते हैँ और तमाम कानून भी इसे रोक पाने मेँ समर्थ नहीँ हैँ।

क्या है कारण

बाल विवाह का एक मुख्य कारण भारत मेँ गरीबी, अज्ञानता व अशिक्षा है। साथ ही हमारे देश के कई हिस्सोँ मेँ बाल विवाह एक सामाजिक प्रथा व परम्परा के रूप मेँ देखी जाती है। यहाँ पर लडकियोँ को आर्थिक़ बोझ समझा जाता है। ऐसे मेँ कानूनोँ की कमजोर पकड के कारण बच्चोँ के जीवन को बचा पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। इतना ही नहीँ, भारत मेँ लडकियोँ की शिक्षा का स्तर काफी निचला है। जिसके कारण लडकियोँ को अपने अधिकारोँ व कानूनोँ का ज्ञान नहीँ होता और वह परिवार की इच्छानुसार विवाह करने के लिए सहमत हो जाती है।

क्या कहते हैँ आंकडे

जनगणना की रिपोर्ट बताती है कि देश मेँ करीबन 1.2 करोड बच्चोँ की शादी दस वर्ष की उम्र से पहले कर दी गई। इनमेँ 65 फीसदी लडकियाँ हैँ। जहाँ ग्रामीण क्षेत्रोँ मेँ 57.58 लाख लडकियोँ व 27.69 लडके बाल विवाह के बन्धन मेँ बन्ध गए। वहीँ शहरी क्षेत्रोँ मेँ यह आंकडा 20.69 लाख लडकियोँ व 14.95 लाख लडकोँ का था। वहीँ यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार विश्व के बाल विवाहोँ मेँ से 40 प्रतिशत भारत मेँ होते हैँ। बाल विवाह के मामले मेँ भारत का स्थान विश्व मेँ दूसरा है।

क्या कहता है कानून

वैसे तो भारत मेँ बाल विवाह को रोकने के लिए काफी सख्त कानून बनाए हैँ। लेकिन फिर भी बच्चोँ के बचपन से खेलने का यह सिलसिला अनवरत जारी है। बाल विवाह को रोकने के लिए बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 बनाया गया है। जिसके अनुसार 21 वर्ष से कम उम्र के लडके व 18 साल से कम उम्र की लडकी का विवाह गैर-कानूनी है। बाल विवाह के आरोपियोँ को दो साल तक का कठोर कारावास या एक लाख रूपए का जुर्माना अथवा दोनोँ हो सकते हैँ। साथ ही बाल विवाह कराने वाले माता-पिता, रिश्तेदार, विवाह कराने वाला पंडित, काजी आदि भी हो सकता है। जिसको तीन महीने की कैद और जुर्माना हो सकता है।

बाल विवाह के कुप्रभाव

बाल विवाह के कारण मासूम बच्चोँ को न सिर्फ अपने बचपन को तिलांजलि देनी पडती है, बल्कि उन्हेँ अपनी पढाई छोडकर घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियोँ का बोझ भी उठाना पडता है। बात सिर्फ यहीँ पर खत्म नहीँ होती। मासूम लडकियोँ की कम उम्र मेँ शादी के कारण वह बेहद कच्ची उम्र मेँ माँ बन जाती हैँ। कम उम्र मेँ गर्भधारण के कारण उन्हेँ जीवनभर कई तरह की समस्याओँ से जूझना पडता है। भारत मेँ महिलाओँ के असमय मृत्यु का एक मुख्य कारण उनका बाल विवाह भी होता है। वहीँ ऐसी माओँ से जन्मे बच्चोँ मेँ अमूमन कुपोषण और जन्म के समय कम वजन आदि समस्याएँ भी देखने को मिलती है।

कैसे हो उन्मूलन

वर्तमान परिपेक्ष्य मेँ, बाल विवाह को जड से उखाडकर फेंकना काफी मुश्किल है। लेकिन यह असम्भव नहीँ है। बाल विवाह उन्मूलन के लिए लोगोँ को जागरूक करना बेहद आवश्यक है। इसके लिए मीडिया, सरकारी व गैर-सरकारी संस्थाओँ का सहारा लिया जा सकता है। सोच मेँ परिवर्तन के बाद ही स्थिति मेँ परिवर्तन सम्भव है। साथ ही बच्चोँ को शिक्षित करके व गरीबी दर मेँ कमी लाकर भी इस कुप्रथा पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।

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