यहां घरों को बनाने के लिए ईंट पत्थर का इस्तेमाल नहीं किया जाता

जब भी बात घर बनाने की की जाती है तो सबसे पहले जिन वस्तुओं का खयाल आता है वह है ईंट और पत्थर। लेकिन अगर हम आपको कहें कि इन घरों को बनाने के लिए ईंट पत्थरों का इस्तेमाल नहीं किया गया तो शायद आप अचंभित रह जाएं लेकिन यह सत्य है।

पनामा ऐसा पहला देश होने वाला है जिसमें घरों को बनाने के लिए ईंटो या पत्थर का इस्तेमाल नहीं करेगा। यहां पर घरों को बनाने के लिए प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सुनने में यह चीज थोड़ी सी अजीब लगेगी मगर यहां पर ऐसा किया जा रहा है। प्लास्टिक की बोतलों को आप कबाड़ समझ कर फेंक देते हैं और वह पर्यावरण को दूषित करती हैं। इस प्रक्रिया के इस्तेमाल से पर्यावरण दूषित भी नहीं होगा और आप को रहने के लिए एक उपयुक्त घर भी मिल जाएगा।

पनामा के 83 एकड़ क्षेत्र में प्लास्टिक बोतल विलेज के नाम से एक गांव बनाया जा रहा है। जिसमें करीबन 120 घर बनाने का निर्णय लिया गया है। जिसमें एक घर को बनाने के लिए 14000 से ज्यादा बोतलें लगेगी।

आश्चर्य की बात यह है कि इन घरों में आपको ऐसी लगाने की जरूरत नहीं है क्योंकि बोतलों की वजह से यह घर गर्मियों के दिनों में भी ठंडे रहेंगे। हम आशा करते हैं कि यह तकनीक जल्द से भारत में आएगी जिससे कई बेघर लोगों को रहने के लिए घर मुहैया हो जाएंगे और प्लास्टिक से होने वाले कचरे से भी हमारा पर्यावरण बचा रहेगा।

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