हिग्स बोसॉन क्या है?

सितम्बर 23, 2018

ये माना जाता है कि इस सृष्टि को चलाने वाले भगवान है और वो कण-कण में मौजूद हैं, ठीक वैसे ही ब्रह्माण्ड में एक कण ऐसा भी है जो सारी भौतिक क्रियाओं को चलाने के लिए जरुरी है और ये कण भी हर कहीं मौजूद है। ऐसे में आप इसे क्या कहेंगे? गॉड पार्टिकल ही ना! ऐसे में क्यों ना, आज ये जाने कि गॉड पार्टिकल होता क्या है। तो चलिए, आज इसी पार्टिकल हिग्स बोसॉन के बारे में जानते हैं-

हिग्स बोसॉन क्या है? – हिग्स बोसॉन या गॉड पार्टिकल विज्ञान की एक ऐसी अवधारणा रही है जिसके जरिये वैज्ञानिक ये साबित करना चाहते थे कि कणों में भार क्यों होता है और इन कणों की खोज के बाद इस कॉन्सेप्ट को समझना आसान हो गया।

गॉड पार्टिकल यानी हिग्स बोसॉन ब्रह्माण्ड में मौजूद वो कण या पार्टिकल है जो पदार्थ को द्रव्यमान प्रदान करता है और ये एक ऐसा मूल कण है जिसका एक फील्ड होता है जो यूनिवर्स में हर कहीं मौजूद है। बोसॉन परमाणु में अब तक ज्ञात सबसे छोटे कण हैं।

हिग्स बोसॉन कण की खोज सदी की सबसे बड़ी खोज मानी जा रही है और वैज्ञानिकों का मानना है कि इन कणों का विश्लेषण करके इस सृष्टि की अब तक अनसुलझी गुत्थी को भी सुलझाया जा सकता है। इतना ही नहीं, ये भी माना जा रहा है एक बार बोसॉन कणों के बारे में पूरी जानकारी मिल जाए, उसके बाद इंसान का स्वास्थ्य भी बेहतर हो सकेगा क्योंकि तब कोई भी बीमारी लाइलाज नहीं रहेगी।

इसे हिग्स बोसॉन क्यों कहा गया? – 1965 में पीटर हिग्स ने हिग्स बोसॉन का विचार प्रस्तुत किया था और ख़ास बात ये है कि बोसॉन नाम भारत के वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस के नाम से लिया गया है।

इसे गॉड पार्टिकल क्यों कहा जाता है? – हिग्स बोसॉन यूनिवर्स के सारे रहस्यों को सुलझाने के लिए आवश्यक कण है लेकिन जब बहुत प्रयोगों और प्रयासों के बाद भी इस कण के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पा रही थी तब नाभिकीय कणों पर रिसर्च करने वाले भौतिकशास्त्री लिओन लेडरमैन ने इसे ‘गॉड पार्टिकल’ नाम दे दिया और उसके बाद ये नाम इतना प्रचलित हो गया कि हिग्स बोसॉन को गॉड पार्टिकल के नाम से ही जाना जाने लगा।

दोस्तों, उम्मीद है कि अब गॉड पार्टिकल की गुत्थी को समझना आपके लिए आसान हो गया होगा और ये जानकारी आपको पसंद भी आयी होगी।

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