हायर एजुकेशन प्लानिंग कैसे करें?

मित्रों आज हम बात करेंगें जीवन में हमारी सबसे मौलिक जिम्मेदारी की। जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ बच्चों के हायर एजुकेशन प्लानिंग की। समय बहुत तेज़ी से बदल रहा है। आज के इस कम्पीटीशन युग में एजुकेशन का खर्चा बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है। हर पैरेंट का सपना होता है कि वह अपने बच्चों को बेस्ट एजुकेशन दे। अगर इसकी ढंग से प्लानिंग नहीं की गयी तो खर्चे के समय पैसों की कमी की वजह से हम बच्चों का अच्छी इंस्टीटूशन में एडमिशन नहीं करा पाते हैं।

एजुकेशन खर्च काफी तेज़ी (10-12%) से बढ़ रहा है। सो इसके लिये पैरेंट को प्रॉपर जगह इंवेस्टमेंट्स बच्चे के पैदा होते ही कर देना चाहिये। जितना जल्दी इंवेस्टमेंट शुरू होगा – जरूरत के समय उतनी ज्यादा मैच्यूरिटी होगी। एक थंब रूल को भी यहाँ फॉलो करना बहुत ज़रूरी है। पैरेंट को चाहिये की हर वर्ष किसी भी खास मौके पर (बच्चों के जन्म दिवस या और कोई खुशी के अवसर पर) टॉप-अप ज़रूर करते रहें यानि कुछ भी राशि लम्पसम एक्स्ट्रा निवेश ज़रूर करते रहें।

काफी पैरेंट निवेश के लिये परम्परागत तरीके एलआईसी की कोई भी चिल्ड्रन पॉलिसी ले लेते हैं लेकिन मेरी नज़र में यह बिल्कुल गलत है। किसी भी कंपनी में ट्रेडिशनल इंश्योरेंस प्लान में 5-6% से ज्यादा ब्याज नहीं आता जबकि एजुकेशन का इन्फ्लेशन 10-12% है। सो मेरी राय से पेरेंट्स को म्यूच्यूअल फंड्स की बैलेंस्ड स्कीम्स में ही पैसा लगाना चाहिये जैसा एचडीएफसी चिल्ड्रेन्स गिफ्ट – आईसीआईसीआई चिल्ड्रन केयर आदि। इन स्कीम्स का ट्रैक रिकॉर्ड भी बहुत अच्छा है। ये बैलेंस्ड कैटेगरी के म्यूच्यूअल फंड्स हैं। पिछले 10 से 15 वर्षों से ये स्कीम्स 12-14% वार्षिक रिटर्न दे रहे हैं। खास बात ये है कि पेरेंट्स कभी भी एसआईपी की रकम घटा – बढ़ा सकते हैं और टॉप-अप भी कर सकते हैं।

दादा-दादी, पापा-मम्मी, नाना-नानी कोई भी कितना भी गिफ्ट कर सकता है। मेरी नजर में यह बेस्ट तरीका है। पेरेंट्स को एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिये कि हर साल अपनी मंथली एसआईपी को भी 5-10% से टॉप-अप करते रहना चाहिये क्योंकि मेरी राय में एजुकेशन का इन्फ्लेशन रेट 10-12% कम से कम रहेगा। फिर चूँकि बैलेंस्ड फण्ड में निवेश होता है (65% इक्विटी + 35% डेब्ट) तो रिस्क भी नहीं रहता। बैलेंस्ड फण्ड की विशेषता यह है कि यह हर महीने कंपल्सरी बेसिस पर अपनी फण्ड वैल्यू को रीबैलेंस करती रहती है। यानि प्रॉफिट होने की दशा में उसका 35% बेचकर डेब्ट में निवेश कर देते हैं और नुकसान की दशा में 35% डेब्ट को बेचकर इक्विटी में, सो मंथली बेसिस पर प्रॉफिट बुकिंग होती रहती है।

कुछ पेरेंट्स पोस्ट ऑफिस, बैंक में आरडी वगैरह भी करते हैं। ये सब पुराने पांरपरिक तरीके हैं जो आजकल के दौर में कारगर नहीं है। मेरी राय में पेरेंट्स को अपनी टोटल इनकम का 10% प्रति चाइल्ड – हायर एजुकेशन के लिये प्लान करना चाहिये जिससे उनके व बच्चों के सपने पूरे हो सके।

sodhani-1 हायर एजुकेशन प्लानिंग कैसे करें?ये लेख फाइनेंशियल एडवाइजर श्री राजेश कुमार सोढानी, सोढानी इंवेस्टमेंट्स, जयपुर द्वारा प्रस्तुत है। फाइनेंशियल प्लानिंग पर आधारित ये लेख आपको कैसा लगा? अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है, हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

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