हिन्दू धर्म में क्यों किया जाता है मुंडन संस्कार

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हिंदू धर्म अपनी परंपराओं और रस्मों के कारण अपनी अलग ही छाप छोड़ता है। कई ऐसी मान्यताएं भी है जिनके होने के कारणों की लोगों को जानकारी भी नहीं होती है। फिर भी वह मान्यताएं प्रचलन मे हैं, मुंडन संस्कार ऐसी ही एक मान्यता है।

हर धर्म के अपने अपने अलग रीती रिवाज हैं जिन्हे लोग पूरी निष्ठा से निभाते भी हैं लेकिन ना जाने कितने ऐसी परम्पराएं हैं जो हम सदियों से मानते आये हैं लेकिन उनके पीछे की हकीकत से अनजान हैं। ऐसा ही एक रिवाज हिन्दू धर्म में भी है जिसे मुंडन संस्कार कहा जाता है। इसमें बच्चे के पैदा होने के 1 साल के भीतर पहली बार उसके सिर के पूरे बाल उतारे जाते हैं। कुछ लोग बच्चे के तीसरे, पांचवे या सातवें साल में मुंडन करवाते हैं।

लेकिन क्या आपको पता है की ये मुंडन संस्कार क्यों किया जाता है ? तो चलिए हम आपको बताते हैं इसके पीछे की सच्चाई। हालांकि इसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों कारण छुपे हैं और दोनों की अपनी अपनी महत्वता है।

धार्मिक कारण
अगर हिन्दू धर्म में होने वाले मुंडन संस्कार के पीछे के धार्मिक कारण की बात करें तो ये इसलिए किया जाता है क्योंकि हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है की बालों में हमारी याददाश्त और यादें सुरक्षित रहती हैं इसलिए ऐसा माना जाता है की जन्म के समय के बालों में पिछले जन्म की यादें सुरक्षित हैं और इन्हे हटाने के लिए ही बच्चे के सिर के सभी बाल उतार कर उसकी सभी यादें मिटा दी जाती हैं।

वैज्ञानिक कारण
मुंडन संस्कार के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है और वो बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़े हैं। दरअसल जब बच्चा माँ के गर्भ में होता है तो बच्चे के सिर के कुछ रोम छिद्र बंद हो जाते हैं साथ ही उसके सिर पर गंदगी और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं जो बच्चे के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से सही नहीं हैं। बच्चे के जन्म के बाद स्नान करने से भी ये बैक्टीरिया ख़त्म नहीं होते और बंद हुए रोमछिद्र नहीं खुलते। ऐसे में बच्चे के सिर के बाल जब उस्तरे से साफ़ किये जाते हैं तो उसके सिर के रोमछिद्र खुल जाते हैं और सिर से सारी गंदगी साफ हो जाती है। ऐसा करने से बच्चे के नये बाल घने, मजबूत और स्वच्छ होकर निकलते हैं।

इसके अलावा बच्चे को गर्भ में विटामिन डी भरपूर मात्रा में नहीं मिल पता लेकिन संसार में आने के बाद जब उसका मुंडन कराया जाता है तो उसके सिर पर सीधी धूप लगने से उसके विटामिन डी की कमी पूरी होती है जिससे कोशिकाएं जागृत होकर खून का प्रसार अच्छी तरह कर पाती हैं।

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