साइकिल का इतिहास

फरवरी 2, 2016

आप इसे पढ़ के शायद थोड़ा अचंभित हो जाएँ की साइकिल का इतिहास भी बहुत बड़ा है। जी हाँ अपने सही सुना 1817 में कार्ल ड्रैस ने साइकिल का आविष्कार किया उस समय इस आविष्कार की जरुरत तब पड़ी जब मानव को ये महसूस हुआ की कोई ऐसा साधन हो जिसके द्वारा इंसान बिना चले एक जगह से दूसरी जगह पहुँच जाये। उस समय दो पहियों को एक लोहे के आधार से जोड़ कर इसका मूल रूप बनाया गया जिसे “dandy horse” का नाम दिया गया जिसे लोग धक्का देते थे। उस समय इसकी गति 14 किलोमीटर प्रति घंटा थी।

1839 में सोकोटिश व्यक्ति स्कॉट्समैन किर्कपत्रिक मैमिल्लन वो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने साइकिल में पेडल लगाने की बात सोची। उस समय इनके पास इस बदलाव का पेटेंट भी नहीं था जिसके लिए इन्हे हर्जाना भी भुगतना पड़ा था। मगर अब साइकिल में पेडल लगने शुरू हो गए थे।

1866 में साइकिल में एक और बदलाव किया गया इस बदलाव में साइकिल को अधिक गतिमान बनाने के लिए इसके आगे वाले पहिये को अधिक बड़ा कर दिया गया और इसका आकार कुछ ऐसा था जिसमे चालक बैठ भी नहीं सकता था। आप यह जान के हैरान हो जायेंगे की इस साइकिल का आगे का पहिया 5 फुट का था। वेलोसिपेडे एक बहुत अमीर व्यक्ति थे जिन्होंने इस आविष्कार को बढ़ाने में उस समय बहुत पैसा लगाया।

यह बदलाव इतना सफल नहीं हुआ क्योँकि इस साइकिल को चलाने में चालक को बहुत कठिनाई का अनुभव होता था। चलाने से ज्यादा इस साइकिल को रोकने में ज्यादा तकलीफ होती थी क्योंकि उस समय साइकिल में ब्रेक नहीं थे।

उस समय लोगों को साइकिल चलाते समय गंभीर चोटें भी आ जाती थी जो की एक आम सी बात हो गयी थी। 1895 में जॉन केम्प स्टारले द्वारा निर्मित साइकिल में इन सभी बातों का ख्याल रखा गया था और यह बिलकुल अलग डिज़ाइन था जो लोगों ने पहले नहीं देखा था। आज के इस दौर में यह बातें कुछ अजीब सी लगती हैं लेकिन एक समय था जब लोग इन सामान्य सी दिखने वाली चीज़ों के लिए भी बहुत श्रम करते थे।

कहते हैं ना आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है उसी प्रकार यहाँ भी हुआ, लोगों को जिस प्रकार असुविधा होती गयी इस प्रयोग में भी सुधार होता चला गया।

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