समय का इतिहास क्या है?

मार्च 31, 2017

समय का पता तो हम सब घडी देखकर लगा लेते हैं लेकिन समय का इतिहास क्या है इस बात से शायद सभी अंजान है। आइए आज आपको बताते हैं समय का इतिहास क्या है।

सूर्य की दशा – आपने देखा होगा की पौराणिक ग्रंथों भी समय का जिक्र किया जाता है, दरअसल हजारों साल पहले भारत में सूर्य को देखकर ही समय का अंदाजा लगाया जाता था। उस समय पहर को मानक बनाकर समय निश्चित किया जाता था।

सूर्य घड़ी – मिस्र की प्राचीन सभ्यताओं ने सूर्य घड़ी का इस्तमाल शुरू किया था। वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य घड़ी ही समय की गणना करने वाला पहला अविष्कार माना जाता है। सूर्य घड़ी देखकर समय का लगभग अनुमान लग जाता है। लेकिन यह घड़ी उस समय विफल हो जाती है जब सूर्य के सामने बादल छा जाए।

रेत घड़ी – रेत घड़ी के अविष्कार के बारे में थोड़ा संशय है क्योंकि इसका आविष्कार कब और कहां हुआ यह पुख्ता तौर पर सामने नहीं आया है। लेकिन ऐसा माना जाता है कि इस रेत घड़ी का आविष्कार अरब में हुआ है। कांच की बनी रेत घड़ी में रेत डाली जाती है और इसके एक खाने से दुसरे खाने में रेत जाती है और उसी के मुताबिक समय का अंदाजा लगाया जाता है।

जल घड़ी – सबसे पहली जल घडी 16वीं शताब्दी में इजात की गई थी जिसमे पानी की टपकती बूंदों के जरिये समय का पता लगाया जाता था।

घंटाघर – 18वीं शताब्दी में दिन को घंटों के हिसाब से बाँटने का तरीका यूरोप से ही निकला था। उस समय चर्च की इमारतों पर बड़ी घड़ियाँ लगाई गई जिनमे घंटों के हिसाब से समय की गणना की जाने लगी। भारत में आज भी आपको घंटाघर देखने को मिल जायेंगे।

पॉकेट वॉच – फ्रांस और स्विट्जरलैंड की सीमा से सटे गांव में काफी गरीबी हुआ करती थी और उन्होंने लकड़ी की छोटी घड़ियाँ बनाना शुरू किया और धीरे धीरे वो घड़ियाँ बनाने में माहिर हो गए और इस तरह पॉकेट वॉच का आविष्कार हुआ।

कलाई घड़ी – घंटाघर और पॉकेट वॉच के बाद यूरोपीय देशों ने कलाई घडी को इजात किया और धीरे धीरे इसने फैशन का रूप ले लिया। आज बड़ी बड़ी कंपनियां कलाई घडी बना रही हैं।

इलेक्ट्रॉनिक घड़ी – जहाँ एक तरह सभी टिक टिक घड़ियाँ बनाने में लगी थी वहीँ जापान ने इलेक्ट्रॉनिक घड़ी का आविष्कार किया जिसमे समय अंकों में दिखाई देता है। धीरे धीरे इसकी तकनीक में भी इजाफा हुआ और अब वाटरप्रूफ इलेक्ट्रॉनिक घड़ियाँ भी बाजार में उपलब्ध हैं।

परमाणु घड़ी – आज पूरी दुनिया में परमाणु घड़ियों के मुताबिक ही सेट किया जाता है। ये परमाणु घड़ियाँ अणु के तापमान और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिशन फ्रीक्वेंसी के आधार पर काम करती हैं। इसके अलावा सैटेलाइटें, जीपीएस और रेडियो सिग्नल भी इसी घडी के आधार पर चलते हैं।

स्मार्ट वॉच – अब तक घड़ियाँ सिर्फ समय बताने के काम आती थी लेकिन अब स्मार्ट वॉच भी बाजार में आ गई हैं जो समय के साथ साथ आपकी धड़कन, सेहत, मैसेज, कॉल्स, पैदल कदमों की संख्या और नींद के घंटों जैसी सभी जानकारियां देती हैं।

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