होमियोपैथी क्या है?

बचपन में मीठी गोलियां खाने का शौक आपको भी रहा होगा और आज बड़े होने के बाद भी उन मीठी गोलियों की मीठी यादें आपके ज़ेहन में मौजूद होंगी और शायद आज बीमार होने पर आपको होमियोपैथी की छोटी-छोटी और मीठी गोलियां आपके बचपन की याद दिलाती होंगी।

होमियोपैथी भले ही एक प्राचीन विधा है लेकिन आज नयी पीढ़ी के युवा और बच्चे भी एलोपैथी की कड़वी दवाओं के बजाये इन्हीं मीठी गोलियों को खाकर अपनी ख़राब तबियत को बेहतर बनाना पसंद करते हैं। मर्ज चाहे नया हो या पुराना, सबकी दवा होमियोपैथी के पास उपलब्ध है।

ऐसे में आपके लिए होमियोपैथी के बारे में ज्यादा जानना रोचक और फायदेमंद साबित हो सकता है। तो चलिए, आज आपको बताते हैं होमियोपैथी के इस खट्टे-मीठे सफर के बारे में –

एलोपैथी, आयुर्वेदिक उपचार, नेचुरोपैथी, यूनानी चिकित्सा जैसी कई ट्रीटमेंट थेरेपी में से एक है होमियोपैथी, जिसके जन्मदाता डॉ. क्रिश्चियन फ्राइडरिक सैम्यूल हानेमान हैं  जिन्होंने 1796 में इस चिकित्सा पद्धति को जन्म दिया था।

होमियोपैथी दवाओं ने आज अपने पैर जमा लिए हैं और ऐसे लोगों की संख्या भी काफी बढ़ गयी है जो इलाज के इस तरीके को अपनाना पसंद करते हैं। इसकी दवा के रूप में मिलने वाली छोटी गोलियों के केंद्र में क्रिस्टल शुगर होती है जिसे ग्लोबली कहते हैं और लिक्विड फॉर्म में मिलने वाली दवा में ज़्यादातर पानी और अल्कोहल का बेस होता है।

भले ही होमियोपैथी के उपचार में लगने वाला समय तुलनात्मक रूप से ज्यादा होता है लेकिन इस ट्रीटमेंट की ये विशेषता है कि इसमें हर रोग को जड़ से मिटाया जाता है और किसी भी रोग की दवा देने से पहले डॉक्टर, मरीज के मनोविज्ञान को पूरी तरह से समझने का प्रयास करता है।

आइये, अब जानते हैं होमियोपैथी के कुछ ख़ास  सिद्धांतों के बारे में –

Law of Similar – इस नियम के अनुसार जिस दवा की ज्यादा मात्रा एक स्वस्थ शरीर में विकार पैदा करती है उसी दवा की कम मात्रा वैसे ही लक्षणों वाले रोग को खत्म भी कर सकती है, जैसे – कच्चे प्याज को काटने पर जुकाम जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं जैसे आँखों और नाक से पानी आना, वैसे ही जुकाम होने पर होमियोपैथी की दवा में एलियम सीपा (प्याज) देने पर जुकाम ठीक भी हो जाती है।

Single Medicine – होमियोपैथी में मरीज को एक समय में एक ही औषधि देने का निर्देश दिया गया है। हालाँकि समय के साथ इस नियम में कुछ बदलाव हुए हैं यानि आज कुछ चिकित्सक एक समय में एक ही दवा दिया करते हैं जबकि कई डॉक्टर्स एक समय में दो से तीन दवा देते हैं।

Minimum Dose – होमियोपैथी के अनुसार मरीज को दी जाने वाली दवा की मात्रा काफी कम होनी चाहिए ताकि उसके शरीर पर दवा का कोई साइड इफेक्ट ना हो सके।

होमियोपैथी की दवाएं अर्क (Tincture), संपेषण (Trituration) तथा तनुताओं (Dilutions) के रूप में होती हैं और कुछ दवाएं अल्कोहल या ग्लिसरीन में घुली होती हैं।

होमियोपैथी दवाएं लेने के कुछ नियम भी होते हैं जिन्हें फॉलो करके ही आप अपनी बिगड़ी हुयी सेहत को बेहतर बना सकते हैं जैसे –

  • इन दवाओं के साथ एलोपैथी और आयुर्वेदिक जैसी दवाओं को नहीं लेना चाहिए
  • इन दवाओं को खुले में नहीं रखा जाना चाहिए
  • इन्हें हाथ में लेने की बजाए सीधे मुँह में रखना चाहिए
  • इन दवाओं को लेने के बाद करीब 30 मिनट तक कुछ नहीं खाना चाहिए
  • खट्टी चीज़ों से परहेज करना चाहिए
  • फास्ट फूड से दूरी बनाकर रखनी चाहिए

वैसे आज के समय में होमियोपैथी के इन नियमों में भी काफी लचीलापन आया है लेकिन किसी भी दवा को लेने के साथ अगर उससे जुड़े जरुरी निर्देशों का पालन किया जाता है तो परिणाम ज्यादा बेहतर मिलते हैं, ये तो आप भी जानते ही हैं।

हालाँकि होमियोपैथी में इस्तेमाल किये जाने वाले अर्क और दवाओं को लेकर कुछ संदेह भी बरकरार है लेकिन आज के समय में होमियोपैथी ने तेजी से अपनी छाप छोड़ी है। उम्मीद है कि चिकित्सा की इस विधा से जुड़े संदेह भी जल्द दूर हो जाएंगे और ये हमारे लिए बीमारियों को दूर करने का ‘नो साइड इफेक्ट्स’  वाला सिंपल और मीठा तरीका ही बनी रहेगी।

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