हांग-साओ तकनीक क्या है?

अप्रैल 6, 2018

सुनने में ऐसा लगता है कि जैसे ये तकनीक मार्शल आर्ट की कोई टेक्निक होगी लेकिन असल में इसका सम्बन्ध मेडिटेशन से है। मेडिटेशन से मिलने वाले फायदों से तो आप परिचित हैं ही लेकिन मेडिटेशन के बहुत से तरीके होते हैं जिनमें से एक आसान और प्रभावी तरीका हांग-साओ तकनीक है। ऐसे में आप भी जानना चाहेंगे कि ध्यान की इस तकनीक में क्या विशेष है और इसे करने से किस तरह के लाभ मिल सकते हैं। तो चलिए, आज जानते हैं हांग-साओ तकनीक के बारे में-

मेडिटेशन की इस तकनीक के ज़रिये एकाग्रता की शक्ति का विकास होता है। इसकी विशेषता ये है कि इस हांग-साओ तकनीक का अभ्यास करने के लिए आपको किसी विशेष स्थान और समय को देखने की जरुरत नहीं होती। आप कहीं भी, कभी भी ये मेडिटेशन कर सकते हैं फिर चाहे आप ऑफिस के ब्रेक टाइम में इसे करिये या चाहे किसी का इंतज़ार करने के दौरान इसका अभ्यास कर लीजिये। इसे करना बहुत आसान है।

इस तकनीक के ज़रिये बाहर की दुनिया से ध्यान हटाना आसान हो जाता है और अपनी पूरी एकाग्रता को एक लक्ष्य पर लगाना संभव हो जाता है। मेडिटेशन के इस प्रकार से तुरंत आंतरिक शान्ति का अनुभव होने लगता है।

शांत साँसें मन को शांत करती हैं जबकि अशांत और तेज़ साँसें मन को भी अशांत बना देती हैं। हांग और साओ संस्कृत के शब्द हैं और इनका अर्थ होता है- ‘मैं आत्मा हूँ।’ ये दो शब्द सांस के अंदर-बाहर आने-जाने के साथ होने वाले कम्पन से सम्बन्ध रखते हैं। ये शब्द सांस पर शांत प्रभाव डालते हैं और सांस पर शांत प्रभाव मन को भी शांत कर देता है।
हॉन्ग साओ मेडिटेशन करने की विधि-

दोस्तों, मेडिटेशन हमारे विचलित मन को स्थिर और शांत बनाता है और हांग-साओ तकनीक के ज़रिये मेडिटेशन करना और भी ज़्यादा आसान होता है। तो बस, देर किस बात की! आप भी इस हांग-साओ तकनीक का अभ्यास करिये और बहुत आसानी से एकाग्रता और मानसिक शान्ति पा लीजिये।

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