तनाव से मुक्ति कैसे मिले

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करियर, पारिवारिक जिम्मेदारियां, काम का बोझ, समय की कमी, संबंधों में बढ़ती दूरियां, अकेलापन, अपेक्षायें और महत्वाकांक्षाएं, इतने सारे दबाव जब दिमाग पर होंगे तो तनाव चरम सीमा पर होता है. आधुनिक जीवन शैली में तनाव और परेशानी हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया है. क्योकि जीवन मिला है तो समस्यायें भी होगी. फिर चाहें अमीर हो या गरीब ऐसा कोई नही जो तनावग्रस्त ना हो. अगर आप रोजमर्रा के कामों से परेशान या चिंतित हो जाते हो तो इसका सीधा मतलब है तनाव आपके जीवन में दस्तक दे रहा है. अगर आप जीवन में किसी भी तरह का दबाव महसूस कर रहे हैं और उसका हल निकालने में असमर्थ हो रहे हैं, तो समझ जाइये यह समस्या तनाव का रूप ले रही है. रुपया-पैसा, काम, रिश्ते आदि तनाव के कई कारण हो सकते हैं. तनाव आपकी सोच-विचार, भावनाओं और व्यवहार पर असर डालता है. जिसका सीधे तौर पर आपके कार्य पर असर पड़ता है. तनाव के कई लक्षण हैं जैसे कि- भूख न लगना, पसीना आना, हर समय चिंतित रहना, किसी काम में मन न लगना, नींद ना आना, जल्दी-जल्दी गुस्सा आना आदि. अपने आप को ऐसे कार्यो में लगाओ जिसमे आपको आनंद आये, इससे आपका दिमाग़ भी व्यस्त होगा. ऐसी आदत को अपनायें जो आपके लिए उचित भी हो और अच्छी भी, फिर धीरे-धीरे आप को अहसास होगा कि आप अपने आपको तनाव से मुक्ति में खुद की मदद कर सकते हैं. तो क्यों न ऐसे उपाय अपनाएं, जिनसे इस तनाव को खुद से दूर रखा जा सके.

आज हमने अपने जीवन में तनाव के अनेक कारणों को खुद पैदा कर लिया है, जिस कारण लोगों के जीवन में दिन-ब-दिन तनाव बढ़ता ही जा रहा है. डॉंक्टरों का मानना है कि- 90% मरीज तो अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए स्वयं ही जिम्मेदार होते हैं. क्योकि 90% से अधिक मरीज तनाव से संबंधित रोगों के लिए ही आते हैं. तनाव को 21वीं सदी के सिंड्रोम की संज्ञा दी जाती है. तनाव की अवस्था अगर बनी रहे तो व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक कार्यप्रणाली को गड़बड़ा देती है. तनाव के कारण शरीर का हार्मोंस का स्तर बढ़ता ही जाता है. जिससे भविष्य में कई बिमारियाँ होने की आशंका भी बढ़ जाती है. अपने दैनिक जीवन को समझ कर और कुछ आदतों को बदलकर आप पूर्ण रूप से नहीं तो कुछ तनाव उत्पन्न करने वाले कारणों को कम ज़रूर कर सकते हैं. यह चुटकियों में संभव नहीं होगा. यह लक्ष्य कठिन अवश्य है लेकिन हासिल करने योग्य है.

जीवन में व्यस्तता इतनी बढ़ गई है कि तनाव को दर्शाने वाले संकेतों को हम अनदेखा कर देते हैं या समझ ही नही पाते कि यह तनाव के लक्षण हैं. फिर यही तनाव भविष्य में एकत्र होकर हम पे हावी होते हैं, जिसका सामना या समाधान दोनों ही मुश्किल हो जाता है. इसलिए तनाव के संकेतों को समझें और पहचानें और समय रहते ही खुद के लिए अच्छी आदतों का चुनाव करें. जो आपके लिए स्वस्थ दिनचर्या के निर्माण में सहायक होगा.

गंभीर परिणाम होने से पहले तनाव उत्पन्न करने वाले कारणों को, कुछ समझ और विचारपूर्वक दूर किया जा सकता है. आइये जाने तनाव से मुक्ति के वो तरीके कौन-कौन से है:-

1. तनाव का कारण पहचानें – आगे बढ़ने से पहले, अपने तनाव के कारणों की पहचान करने में खुद को सक्षम बनायें. यह पहली और सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. जो बातें आपको तनावग्रस्त करती हैं, यदि आप केवल पहचान ही लेंगे तो उन्हें दूर करना आसान हो जायेगा. स्वयं को कुछ समय दें और विचार करें कि आज आप तनाव में और दबाव में क्यों रहे. सप्ताह में ऐसा कितनी बार होता है? कौन से लोग, गतिविधियाँ या बातें आपकी ज़िन्दगी को बोझिल बना रही हैं? आपके तनाव की भावनाओं में योगदान करने वाली टॉप 10 चीज़ों की एक सूची बनायें और कोशिश करें कि क्या आप उनमें कुछ बदलाव ला सकते हैं या नहीं. एक-एक करके उनका समाधान करते जायें और हमेशा प्रयासरत रहें.

2. मन को हल्का रखें – आपके तनाव का चाहें जो भी कारण हो, अपनी समस्या को अपने पति, पत्नी या किसी निकटतम मित्र से सांझा करें. इससे आपका मन तो हल्का महसूस करेगा ही साथ ही आपका तनाव भी दूर होगा. सामने वाले से खुलकर चर्चा करने पर जटिल से जटिल समस्यायों का भी समाधान मिल जाता है.

3. विश लिस्ट बनायें – तनाव से मुक्ति पाने के लिए आप अपनी एक विश लिस्ट बना सकते हैं. जिसमें हर वो काम लिखें जिसे करने में आपको खुशी मिलती है. जैसे प्रकृति के करीब समय बिताना, अच्छी किताब पढ़ना, कुकिंग, लिखना, खेलना, संगीत सुनना, बागवानी करना, टीवी देखना या कोई भी मनपसंद विश जिसे आप हमेशा से करना चाहते थे. अपनी विश को पूरा करने के लिए आप समय निर्धारित करें फिर चाहें आप कितने भी व्यस्त क्यों न हों उन्हें पूरा करने की कोशिश जरूर करें. इससे आपके मन की उदासी और अकेलापन दूर होगा साथ ही कुछ नया करने का उत्साह भी बना रहेगा. आप इसमें कहां तक सफल हो पाये हैं और कितनी गतिविधियां कर पा रहे हैं, इसका लेखा-जोखा अवश्य रखें.

4. मल्टीटास्किंग से बचें – मल्टीटास्किंग का मतलब है एक साथ कई कार्य करना, जैसे की कम्प्युटर कर लेता है. अधिकतर लोगों को यह बहुत बड़ा गुण लगता है. लेकिन हकीकत में इसके नुकसान अधिक हैं. यह हमारे कार्य करने की गति को सुस्त और बाधित कर देता है. इससे काम के ज़रूरी पक्षों से ध्यान हट भी सकता है. कुछ समय के बाद हम खुद में थकान भी जल्दी महसूस करने लग जाते हैं. जो तनाव को बढ़ावा देता है. एक समय में एक ही काम करें. ऐसा करने पर आप सभी कार्यो को समयानुसार अच्छे से कर पाएँगे.

5. कुछ समय स्वयं को भी दें – जिन लोगों का जीवन अधिक तनावग्रस्त रहता है, वे अपने लिए कुछ पल निकालें. जैसे कि कई लोग अकेले में सैर करना पसंद करते हैं तो कुछ लोग अकेले में किताब पढ़ना तो कई लोग अंधेरे कमरे में अकेले बैठकर चिंतन करना. इससे आपको तनाव से निकलने का हल मिलेगा. अगर अकेलापन आपको हताश करता है तो आप अधिक देर तक अकेले ना रहें. अगर आप कार्य स्थल पे हैं और समय की कमी है तो कभी कभार मीटिंग टाल दें. ज़रूरी नहीं है कि हर काम घड़ी देखकर किया जाए. यह संभव ना हो तो लोगों से कहें आपसे बात करके मीटिंग का समय निर्धारित करें कि आप कब फ्री हैं. इस तरह कभी-कभार बचने वाले थोड़े से समय को स्वयं को देने में या मन चाहा काम करने में लगायें.

6. दूसरों पर नियंत्रण ना करें – याद रखें, हम पूरी दुनिया के मालिक नहीं हैं. हम परिस्थिति और लोगों को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं और असफल हो जाते हैं. जिससे तनाव का बढ़ना स्वभाविक है. दूसरी चीज़ें जैसी भी घटित हो, लोग जैसे भी हो उसे स्वीकार कर लें. यह भी जान लें अलग-अलग परिस्थितियों में चीज़ें एक ही तरह से काम नही करती. ध्यान रखें, आप केवल स्वयं पर ही नियंत्रण रख सकते हैं. इसीलिए दूसरों से पहले खुद को काबू में रखने का काम करें. इसका मतलब यह नही कि आप स्वयं पर सारा काम थोपे, आप अपने सौम्य अंदाज से दूसरों से भी उसे करवा सकते हैं. दूसरों को अपने वश में रखने कि अदम्य इच्छा से बचें, इसी में ही हमारी भलाई है. यह आदत जीवन को तनावमुक्त रखने में बहुत सहायक है. हम परिस्थिति को बदलने की सिर्फ़ कोशिश ही कर सकते हैं, वो बदले यह ज़रूरी नही.

7. दूसरों कि मदद में आगे रहें – यह तरीका विरोधाभासी नहीं है. यह चिंता ना करें कि, आप तो वैसे ही काम के बोझ के मारे दबे हुए हैं और दूसरों कि मदद करके तो आपका कचूमर ही निकल जायेगा. किसी की मदद करने से या चैरिटी संस्थान में काम करने से आपको आत्मीय सुख की अनुभूति होगी. जो आपका तनाव दूर करने में सहायक होगा. इस टिप से आप दूसरों पे नियंत्रण की आदत से भी मुक्त हो जायेंगे. इसे सहजता और सद्‍भावना से करें. हमारे समाज का या दूसरों का जीवन बेहतर होगा तभी तो हमारा जीवन बेहतर बनेगा.

8. सोच-विचार के प्रतिक्रिया दें – गुस्सा तनाव का कारण है. इससे हमारे दिमाग़ के सोचने की गति धीमी हो जाती है और इस दौरान लिया गया कोई भी फैसला कभी भी सही नही होगा. इसलिए एक बार जब आपने स्वयं के गुस्से पर थोड़ा सा भी नियंत्रण कर लिया तो आप शांत दिमाग से सोच पायेंगे कि मुद्दा क्या था? सही-ग़लत क्या है और अब आगे क्या करना है. इससे फायदा यह होगा कि आप अपने आप का भी सही आंकलन कर पायेंगे कि आप कहाँ गलत थे.

9. दिनचर्या को सरल बनायें – जल्दी सोकर जल्दी उठने के क्या फायदे हैं, यह सब जानते हैं. इसके अलावा योग और व्यायाम को भी अपनायें. इसके अनेक लाभ हैं. शारीरिक व मानसिक तौर पर यह बहुत प्रभावशील है. शरीर तो फिट होगा ही साथ ही तनाव को भी धीरे-धीरे दूर कर देगा. क्योकि एक स्वस्थ और फिट व्यक्ति थकान और दबाव का सामना बेहतर तरीके से कर सकता है. दूसरी ओर, अस्वस्थ होना स्वयं के लिए ही हानिकारक है. कसरत हमें रोग और तनाव से दूर रखने में सक्षम है. व्यायाम और योग के साथ संतुलित और सात्विक भोजन शरीर और मन को स्वस्थ रखता है. स्ट्रेस ईटिंग से दूर रहें. आठ घंटे की नींद लें. नींद पूरी होगी तो दिमाग तरोताजा होगा और सकारात्मक भाव के साथ सुबह की शुरुआत होगी.

10. आभार व्यक्त करें – यह आखरी सूत्र है पर बहुत ही कारगर है. अगर, आप दूसरों का आभार व्यक्त करते हैं तो इसके सकारात्मक परिणाम आते हैं. आपके जीवन से नकारात्मकता गायब हो जाती है. क्योकि दूसरे आपकी इस प्रतिक्रिया से अच्छा अनुभव करते हैं. जिन व्यक्तियों के साथ से आपको अपने जीवन में जो कुछ भी हासिल हुआ है उसे उपहार मानकर उसके लिए ईश्वर का सदा आभार व्यक्त करें. जीवन के प्रति इस प्रकार के दृष्टिकोण को रखने से आप अपने जीवन में सुख और शांति के आने का मार्ग प्रशस्त करेंगे. यह आत्मिक समृद्धि का सूत्र भी है.

उपरोक्त उपायों के साथ-साथ एक व्यवस्थित जीवनशैली को अपनानें की कोशिश करें. हँसने-हँसाने के मौके तलाशे. कॉमेडी फिल्म देखे. बेकार के संकल्पों का त्याग करें. क्योकि समय के साथ बहुत सी मुश्किलें स्वयं ही सुलझ जाती हैं. कई बार समस्यायें बहुत ही सरल होती हैं जिसे समझ ना पाने के कारण हम उसे जटिल बना देते हैं. टालमटोल की आदत छोड़ें जो आवश्यक कार्य है सूची अनुसार पहले करें. इससे वक्त पे काम होगा और बाद में काम का दबाव भी नही रहेगा. कार्यस्थल को स्वच्छ और साफ रखें, जिससे मन प्रसन्न रहेगा. क्योकि अनुकूल वातावरण दिमाग को शांत रखता है और कार्य कि गति को बढ़ाता है. अपने काम का पूरा लेखा-जोखा रखें. ‌दिन भर में आप कितना काम करते हैं और कौन सी गतिविधि को कितना समय देते हैं इस पर जरूर ध्यान दें. इससे आपको सभी गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने में आसानी होगी और तनाव भी कम होगा.

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