कितनी बातें करते हैं आप ?

बातचीत अपने मन के भावोँ को व्यक्त करने का एक सरल रास्ता है। बोलकर हम सामने वाले व्यक्ति को न सिर्फ अपने मन की सभी इच्छाएँ व्यक्त कर देते हैँ, बल्कि ज्ञान के आदान- प्रदान के लिए भी इसकी आवश्यकता पडती है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक घर-ऑफिस और न जाने कितनी जगहोँ पर हम ढेर सारी बातेँ करते हैँ। हालांकि बातेँ करना हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग है, लेकिन इसके बावजूद कोई भी काम एक सीमा मेँ रहकर ही किया जाना चाहिए। जरूरत से ज्यादा बातेँ करना न सिर्फ आपके व्यक्तित्व के लिए घातक है, बल्कि इससे सामने वाले व्यक्ति को भी कभी-कभी परेशानी होती है।

दूसरे की भी सुनिए

आपने वह कहावत तो सुनी ही होगी कि एक अच्छा वक्ता वही बन सकता है, जो एक अच्छा श्रोता हो। इसलिए अगर आप वास्तव मेँ एक अच्छे वक्ता बनना चाहते हैँ तो सबसे पहले आपको एक बेहतरीन श्रोता बनना पडेगा। लेकिन अक्सर देखने मेँ आता है कि जो लोग बहुत अधिक बातूनी होते हैँ, वे दूसरोँ की बातेँ सुनने मेँ कोई दिलचस्पी नहीँ दिखाते। उनका सारा ध्यान तो सिर्फ अपनी बात पूरी करने मेँ ही होता है। उनके इस प्रकार के रवैये के कारण उनके ज्ञान का दायरा सीमित ही रह जाता है और वह बहुत सी बातोँ को जानने व समझने से वंचित रह जाते हैँ।

व्यक्तित्व पर असर

जो लोग बहुत अधिक बातूनी होते हैँ, उनके व्यक्तित्व पर भी इसका नकारात्मक असर पडता है। अक्सर ऐसे लोगोँ को देखकर लोग अपना रास्ता बदल लेते हैँ। जो लोग उनसे जुडे भी होते हैँ, वह भी किसी मजबूरी या लालच के कारण। चूंकि ऐसे लोग दूसरोँ की बातोँ को सुनने व समझने मेँ रूचि नहीँ रखते इसलिए कभी-कभी उनमेँ अहम का संचार भी हो जाता है। दूसरोँ का प्वाइंट ऑफ व्यू न समझने के कारण वह हमेशा खुद को ही सही समझते हैँ, जिसके कारण परेशानियाँ बढने लगती हैँ। शुरूआती चरण मेँ तो बातूनी लोगोँ को अपनी कमियोँ का अहसास नहीँ होता लेकिन धीरे-धीरे घर-परिवार मेँ दरकते रिश्तोँ व काम मेँ तरक्की न हो पाने के रूप मेँ उन्हेँ अपनी इस आदत का खामियाजा भुगतना पडता है। इतना ही नहीँ, उनका व्यक्तित्व बिल्कुल भी आकर्षक व अलग नहीँ होता। वह केवल भीड का ही एक हिस्सा नजर आते हैँ।

बदलेँ अपनी आदत

अगर आप अपनी आदत बदलना चाहते हैँ तो सबसे पहले स्वयँ का विश्लेषण करेँ और यह समझने का प्रयास करेँ कि वास्तव मेँ आप इतनी बातेँ करते हैँ जिससे सामने वाले व्यक्ति को परेशानी हो। अगर आपको जवाब हाँ मेँ मिले तो अब कुछ छोटे-छोटे लेकिन कारगर कदम उठाइए। सबसे पहले तो आप प्रतिदिन कुछ देर मेडिटेशन अवश्य करेँ। इससे आपको अपने चित्त को शांत करने मेँ सहायता मिलेगी क्योंकि बातूनी लोगोँ का मन बहुत ही चंचल होता है। इसके अतिरिक्त अपना कुछ समय अच्छी किताबेँ पढने मेँ लगाएँ। अगर आप अपने भावोँ को व्यक्त करना चाहते हैँ तो एक डायरी मेँ उसे लिखेँ। इससे आपका मन भी हल्का हो जाएगा और किसी को परेशानी भी नहीँ होगी।

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