नोट कैसे बनाए जाते हैं?

जिंदगी का गुजारा करने के लिए नोट सबसे अहम चीज है लेकिन क्या आपको पता है नोट किस चीज से बनाए जाते हैं? शायद और लोगों की तरह आप भी यही कहेंगे कि नोट कागज के बनते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है, आपको जानकर आश्चर्य होगा की नोट कागज से नहीं बल्कि कपास से बनाए जाते हैं। तो चलिए नोट कैसे बनाए जाते हैं जानते हैं।

नोटों में कपास का इस्तेमाल – भारत सहित कई देशों के नोट कागज की बजाए कपास के बनाए जाते हैं क्योंकि कपास कागज की तुलना में ज्यादा मजबूत होता है। नोट बनाने के लिए कपास के कच्चे माल को उपयोग में लिया जाता है और नोट बनाने से पहले कपास को एक खास प्रक्रिया से गुजारा जाता है।

सीक्रेट फॉर्मूला – नोट बनाने से पहले कपास की ब्लीचिंग और धुलाई की जाती है और फिर इसकी लुगदी तैयार की जाती है। हालांकि इसका असली फार्मूला अभी भी सीक्रेट रखा गया है। फिर इस लुगदी को कागज की एक लंबी सीट में तब्दील करने के लिए सिलेंडर मोल्ड पेपर मशीन का उपयोग किया जाता है और इसी दौरान नोट में वॉटरमार्क जैसे कई सिक्योरिटी फीचर्स भी डाले जाते हैं।

नकली नोटों की रोकथाम के लिए सिक्योरिटी फीचर्स – बाजार में नकली नोटों की छपाई और जालसाजी ना हो सके इसके लिए नोटों में कई तरह के सिक्योरिटी फीचर्स जोड़े जाते हैं। यूरो मुद्रा में 10 से भी अधिक सिक्योरिटी फीचर्स डाले जाते हैं ताकि कोई आसानी से नकली नोट ना छाप सके।

जालसाजी – इतने सिक्योरिटी फीचर्स डालने के बावजूद भी जालसाज लोग नकली नोट छापने में कामयाब हो जाते हैं। एक आंकड़ों के मुताबिक 2015 में यूरो मुद्रा के रिकॉर्ड संख्या में नकली नोट सामने आए थे। यूरोपीय सेंट्रल बैंक के अनुसार इस समय पूरी दुनिया में करीब 9 लाख यूरो के नकली नोट बाजार में हैं।

यूरो नोट डिजाइन करने वाला शख्स – बहुत कम लोग जानते हैं लेकिन हर यूरो नोट डिजाइन करने में एक शख्स का हाथ है जिसका नाम है जिम्मा राइनहोल्ड गेर्स्टेटर इन्हें यूरो के नोट पर यूरोप का इतिहास दिखाने में बड़ी दिलचस्पी रहती है और यही कारण है कि आप को 5 से 500 यूरो तक के हर नोट पर यूरोपीय इतिहास से जुड़ी छवि देखने को मिल जाएगी।

हर नोट होता है अनोखा – दुनिया के सभी देशों में अपने अपने अलग नोट होते हैं और सभी देशों के नंबर भी अलग होते हैं। यूरो में भी नोट छापने के लिए 12 तरह की अलग-अलग प्रिंटिंग प्रेस हैं जहां नोटों की छपाई होती है और नोटों के नंबरों के आधार पर ही यह तय किया जाता है कि कौन से नोट यूरोजोन के कौन से देश में जाएंगे।

यूरो नोट छापने की कीमत – एक यूरो नोट छापने में करीब लगभग 16 सेंट की लागत आती है। बड़े नोट छापने में लागत थोड़ी ज्यादा आती है जब की सिक्कों की बात करें तो सिक्कों की लागत नोट से भी ज्यादा होती है।

नोटों की छपाई की लागत कम करने का तरीका – कई देश नोट छापने के लिए आउटसोर्सिंग का भी जरिया इस्तेमाल करने की प्लानिंग कर रहे हैं जर्मनी भी उनमें से एक है। जर्मनी का संघीय बैंक नोट छापने के लिए आउट सोर्स की प्लानिंग कर रहा है ताकि नोट छापने में लागत कम आये। इसी कारण पिछले साल जर्मन प्रिंटर गीजेके डेवरियेंट ने अपनी म्यूनिख प्रेस से करीब 700 कर्मचारियों को निकाल दिया था क्योंकि उन्हें नोटों की छपाई काफी महंगी पड़ रही थी। इसी कारण कंपनी मलेशिया और लाइपजिग से नोट छपवा रही है ताकि नोट छापने की लागत कम आये।

समय-समय पर नोटों में बदलाव – एक नोट को ज्यादा समय तक मार्केट में रखने से और उन में बदलाव ना करने से नकली नोट बाजार में आने की संभावना बढ़ जाती है। इसी कारण हर देश समय समय पर अपने नोटों का डिज़ाइन बदलता रहता है। आमतौर पर 5, 10, 20, 50, 100 और 500 के नोटों के डिजाइन में अलग-अलग सालों में बदलाव किए जाते हैं।

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