सेल के प्रलोभन से कैसे बचे?

दुनिया के सभी कोनों में सेल शब्द से लगाव रखने वाले बाशिंदों की कमी नही है. इस पंक्ति में आजकल सिर्फ़ महिलायें ही नही बल्कि नवयुवक-युवत्तिया भी आगे है. सेल का प्रलोभन ही ऐसा होता है कि लोग अपने आप को रोक ही नही पाते. पहले केवल त्योहारों के समय ही सेल शब्द नज़र आता था, पर अब ऐसा बिल्कुल नही है. जहाँ देखो हर दिन नई सेल का सिलसिला शुरू ही रहता है. फैस्टिव सीजन तो कंपनियों के लिए मोटे प्रौफिट कमाने का बहाना है. हर कंपनी ग्राहकों को लुभाने के लिए एक रणनीति तैयार करती है और जिसमे बड़ी आसानी से ग्राहक खीचें चले आते है. बेशक महंगाई सातों आसमान पें हैं, जिससे हर आम आदमी परेशान है, लेकिन इसके बावजूद इन कंपनियों के पास ग्राहकों को लुभावने ऑफर देने के लिए न तो आइडियाज की कमी है और न ही स्कीमों की. आजकल तो जहाँ देखों वहाँ डिस्काउंट के नाम पे ‘एक की खरीद पे दो’ या ‘50% से 80%’ तक की छूट ऐसा लिखा हुआ पढ़ने या दिखने में आ ही जाता है. बड़े आश्चर्य की बात तो यह है इतने बड़े डिस्काउंट के बाद भी बड़ी हो या छोटी सभी कंपनियां जबरदस्त फायदे में रहती है. अब आपके मन में यह प्रश्न उठना वाजिब सी बात है की कंपनी कैसे प्रौफिट कमाती है?

आमतौर पर 90% तक के डिस्काउंट के बाद भी बड़े ब्रैंड का प्रौफिट मार्जिन 200% से ज्यादा ही रहता है. डिस्काउंट ऑफर में ग्राहक जिस हिसाब से कपड़ों के दाम चुकाते हैं, क्वालिटी उस के मुताबिक नही मिलती. किसी कपड़ें की लागत 200 रुपये है तो कंपनी उसे 1000 रुपये का टैग लगा कर ग्राहकों के आगे 50-60% की छूट पे परोसती है, तो प्रौफिट होना तो तय है.

इन सब लुभावने ऑफर्स के बावजूद हमें इस बात को जहन में उतारनी होगी कि हम एक जागरूक ग्राहक बने और स्मार्ट शॉपिंग करे. हमें सेल के दांवपेच को समझना होगा, तभी हम इनके जादू से बाहर निकल पायेंगे. इनके मायाजाल में भटककर आप ज़रूरत से ज़्यादा खरीदारी ना करे. अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल करे. आपकी सहायता के लिए कुछ टिप्स दिए जा रहे है जिनपे अमल करने की कोशिश करे. जिससे आपके पैसे भी बचेंगे और समय भी.

1. ब्रांड नही क्वालिटी देखे:- आजकल लोकप्रिय स्टोर्स कंज्यूमर बिहेवियर को ध्यान में रखते हुए बड़े ब्रांड्स के अलावा कुछ छोटे या बिना पहचान वाले ब्रांड्स की चीज़ों को भी रखते है. कंज्यूमर बिहेवियर पर सर्वे करने वाली एजेंसी इंडिकसन एनालिटिक्स का मानना है, ग्राहकों का रुझान नामी ब्रैंड की जगह अब लोकल ब्रैंड की ओर ज्यादा हैं. जानकारों का यह भी मानना है कि मध्यम वर्ग के ग्राहक बड़े ब्रांड्स की जगह अब लोकल या छोटे ब्रांड्स की खरीदारी में ज़्यादा रुचि दिखाने लगे हैं. इसका कारण यह है की कम कीमत पर ग्राहकों के लिए काफ़ी अच्छे विकल्प बाज़ार में उपलब्ध है. इसलिए शॉपिंग के दौरान ब्रांड्स के बजाय चीज़ों की क्वालिटी को परखें और कभी कभार बिना पहचान या छोटे ब्रांड्स को आज़मा कर भी देखे.

2. तुलना करें:- फ़िज़ूलखर्ची से बचना है तो खरीदे जाने वाले सामान की तुलना करना भी एक अच्छा विकल्प है. मान लीजियें, आपको 1000 रुपये की कोई एक ड्रेस और 300 रुपये तक का कुर्ता दोनों पसंद आता है, तो ड्रेस खरीदने से पहले जरा सोचें कि उतने ही रुपये में तीन कुर्ते खरीदे जा सकते है. इस नज़रिए से सोच-विचार करने के बाद आप ड्रेस में रुपये तब ही खर्च करेंगे जब वाकई में आपको उसकी आवश्यकता होगी.

3. भीड़ भरी दुकानों को चुनें:- अगर आप सच में खर्च पे लगाम लगाना चाहते है तो ऐसी दुकानों का ही चयन करे जहाँ भीड़ के कारण आपको असहजता महसूस हो, क्योकि भीड़ के कारण आप ज़्यादा देर तक दुकान पे रुकना पसंद नही करेंगे. सर्वे यह बताता है कि ऐसे में ग्राहक समय की कमी के कारण वही चीज़ ले पाता है जिसकी उसको वाकई में आवश्यकता हैं. यदि आपकी खरीदारी की लिस्ट लंबी ना हो तो भीड़भाड़ वाली दुकानों पे जाने का ही मन बनायें.

4. ट्रॉली या बास्केट के उपयोग से बचें:- बड़ी-बड़ी दुकानों या शॉपिंग मॉल्स में ट्रॉली इत्यादि आपकी शॉपिंग को सहज बनाने के लिए रखी जाती है, लेकिन यह सहजता आपको ज़्यादा शॉपिंग के लिए भी उकसाता है. असल बात तो यह है सामान रखने में सहूलियत मिल जाने के कारण ग्राहक बिना सोचे-समझे बेवजह चीज़ों को भरने लग जाते है और अतिरिक्त खरीदारी कर बैठते है. ध्यान रखे, अगर आपके सामान की सूची लंबी ना हो तो ट्रॉली के इस्तेमाल से बचें.

5. चीज़ों की परख में देरी ना करें:- शॉपिंग मॉल में किए गये सर्वे के अनुसार जो ग्राहक किसी चीज़ के चयन में 3-5 मिनट या इससे ज़्यादा का समय लेते है वे अधिक शॉपिंग करते है. जबकि जो ग्राहक 1-2 मिनट से कम का वक्त देते है किसी विकल्प पर वे कम खर्च करने में माहिर होते है. इसलिए शॉपिंग के दौरान अगर कोई चीज़ मन को यूंही पसंद आ भी जाए, तो उसे 1-2 मिनट से ज़्यादा का समय ना दे. हाँ, शॉपिंग पूरी होने के बाद भी वो विकल्प आपके दिमाग़ पे हावी है तो उसे अगली बार लेने के बारे में सोच सकते है.

6. मन को भाता है लाल रंग:- टोरंटो विश्वविद्यालय द्वारा कि गई एक शौध बताती है कि लाल रंग की सजावट ग्राहकों को लुभाती है. सिर्फ़ बड़ी दुकानें ही नही बल्कि छोटी दुकानें भी इस लाल रंग के फंडे को मानने लगी है और जहाँ देखो ज़्यादातर स्टोर्स लाल के विकल्पों को सजाकर ग्राहकों को आकर्षित करने का प्रयास करने लगे है, जिससे उन्हें बहुत मुनाफ़ा भी हो रहा है. अब गौर करने वाली यह बात है अगर आप भी ऐसे किसी स्टोर में जानें की सोच रहे है तो थोड़ा सोच-समझ कर खर्च करे.

7. बजट निर्धारित करें:- वैसे तो बजट हमारे हर खर्च को नियंत्रण में रखता है, लेकिन बाहर खरीदारी के वक्त बजट बहुत मायने रखता है. इसलिए जब भी खरीदारी की सूची तैयार करे साथ ही साथ बजट भी तय कर ले, जिससे आपकी लिस्ट भी ज़रूरत के हिसाब से तैयार होगी. शॉपिंग के वक्त भी चीज़ों की रेट्स पर नज़र ज़रूर डाले कि यह आपके बजट से बाहर तो नही है. इस नियम के अनुसार खरीदी करने पर आपकी शॉपिंग बिल्कुल बजट के आस-पास होगी और फ़िज़ूलखर्ची भी नही होगी.

8. तनाव के वक्त शॉपिंग कभी नही:- अधिकांश लोग यह मानते है कि खराब मूड को सही करना हो तो शॉपिंग एक अच्छा ज़रिया है. लेकिन मनोविशेषकों का मानना है कि ऐसे मूड में खरीदारी घाटे का सौदा होता है, क्योकि बिगड़े मूड में निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है. नतीजतन, ऐसे ग्राहक समझदारी से शॉपिंग नही कर पाते और शॉपिंग मंहगी साबित होती है. इसलिए बेहतर यह होगा कि तनाव या बिगड़े मूड में शॉपिंग से तौबा कर ली जायें.

9. बिल के दौरान सतर्क रहें:- शॉपिंग तब तक पूरी नही होती जब तक आपके हाथ में बिल ना आ जायें. इसलिए शॉपिंग के बाद निश्चिंत ना हो जायें. बिल बनवाते वक्त सतर्कता रखे कि आपके बिल में कही ग़लती से अतिरिक्त राशि तो नही जोड़ दी गई है और खरीदा गया सामान बैग में रखते हुए भी सुनिश्चित कर पायेंगे की कोई सामान खराब या बेवजह तो नही लिया गया. शॉपिंग कि यह अंतिम कड़ी है, लेकिन बहुत ही महत्वपूर्ण है.

उम्मीद करते है उपरोक्त यह नियम आपकी शॉपिंग को सहज और सरल बनानें में ज़रूर सहायक होंगे. एक बात हमेशा ध्यान में रखियें कोई भी कंपनी या स्टोर्स चाहें कितनी भी बड़ी सेल का प्रलोभन क्यों ना दें, वे हमेशा खुद के लिए फायेदा का ही सौदा करते है. हम यह नही कहते कि सारी सेल फ़िजूल होती है लेकिन ग्राहकों को अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिये की कौन सा डिस्काउंट उनके लिए किफायती है. पिछले कई सालों में ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर भी लोगों को लुभाने के लिए कई आकर्षक ऑफर्स दिये जा रहे है. ऑनलाइन शॉपिंग की तरफ ग्राहकों का रुझान भी काफ़ी है और हो भी क्यों नही एक क्लिक पर सामान आपके घर तक, पसंद ना आयें तो पैसे वापिस और भी बहुत सी सुविधायें दी जा रही है. इसलिए आप अपनी ज़रूरत को निर्धारित करें, फिर खुद को कुछ समय दे शॉपिंग से पहले और सोचे क्या सही में आपको उस प्रोडक्ट की आवश्यकता है? यह नज़रिया हर खरीदी से पहले रखे, इससे आपके पैसे ही नही बल्कि समय की भी बचत होगी और आप अपने आप को एक स्मार्ट शॉपर की श्रेणी में पायेंगे.

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