सकारात्मक सोच कैसे बढ़ाएँ

सकारात्मक सोच को बढ़ाना जीवन में बहुत ज़रूरी है। सकारात्मक सोच से ना केवल उर्जा का संचार होता है, ये व्यक्ति की नेत्रत्व क्षमता भी बढ़ाती है। सकारात्मक सोच आपको बेहतर इंसान बनाती है। सकारात्मक सोच आपका आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती है। आज से ही अपनी सकारात्मक सोच कैसे बढ़ाएँ ये ज़रूर सोचिए और सकारात्मक सोच बढ़ाने के तरीके ज़रूर आजमाएँ। हम जैसा सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं इसलिए अगर हुमें अच्छा बनना है तो अपनी सकारात्मक सोच को निश्चय रूप से बढ़ाना होगा। हमारे विचारों पर हमारा खुद का ही नियंत्रण होता है इसलिए ये हमारे उपर ही है की हम सकारात्मक सोचें या नकारात्मक।

किसी ने सही कहा है – “निराशावादी को हर अवसर में मुश्किलें दिखती है और आशावादी को हर मुश्किल में अवसर दिखाई देता है”

अगर हम काला चश्मा पहनते हैं तो हमें सब काला नज़र आता है और हरा चश्मा पहनते हैं तो हरा नज़र आता है। इसलिए अगर हमने सकारात्मक चश्मा पहना है तो हमें सभी लोगों में अच्छाई नज़र आएगी और अगर नकारात्मक चश्मा पहन रखा है तो सभी में बुराइयाँ ही दिखेगी। नकारात्मक सोच से हमें अपने चारों तरफ दुख, असंतोष, निराशा नज़र आएगी वहीं सकारात्मक सोच से हमें सुख, संतोष और आशा नज़र आएगी। सकारात्मक सोच कैसे बढ़ाएँ – आज हम आपको कुछ तरीके बताते हैं जिनसे आप अपनी सकारात्मक सोच को बढ़ा कर अपना जीवन बेहतर बना सकते हैं।

सकारात्मक सोच रखें – सबसे पहले आपको किसी काम से बचने के लिए शिकायत करना छोड़ देना चाहिए। ज़्यादातर हम अपने आसपास के माहौल को नकारात्मक बता कर बचना चाहते हैं। अपने आसपास के माहौल को नकारात्मक की जगह सकारात्मक लें और आगे बढ़ें। सकारात्मक सोच को बढ़ाने के लिए आप अपनी बात को अच्छे से रखें। चाहे आपका कोई विरोधी भी हो लेकिन आप सलीके से अपनी बात को रखें। इसका सकारात्मक परिणाम आपको मिलेगा और आप नकारात्मक विचारों से बचेंगे।

सकारात्मक विचार लिखें – आपके दिमाग़ में जो भी विचार आते हैं उनको लिखें। रोज सुबह जल्दी उठें और अपने आसपास के माहौल, अपने परिवार और दोस्तों और सहकर्मियों के बारे में दस सकारात्मक विचार लिखें। इससे आपका नज़रिया बदलेगा और आप अपनी सोच में परिवर्तन महसूस करेंगे।

हँसिए एवम् मुस्कराईए – मुस्कुराने की कोई भी वजह हो उसे याद कीजिए और हँसिए और अपनी सकारात्मक सोच को बढ़ाते रहिए। इससे आपके अंदर उर्जा का संचार होगा और आपके साथ वाले लोगों में भी सकारात्मकता आएगी।

ईर्ष्या और द्वेष की भावना ना रखें – किसी से भी ईर्ष्या और द्वेष की भावना नहीं रखें। इससे हमारे अंदर जलन की भावना आती है जो हमारी सोच को नकारात्मक बनती है। ये भावनाएँ हमारी अच्छाई को ख़तम करती है। दूसरों की सफलताओं से सीखें और मेहनत करें। सकारात्मक सोच से आप और भी अधिक सफल होंगे।

खुद को व्यस्त रखें – खाली रहने से हमारे मन में अत्यधिक विचार आते हैं। ये हम सभी जानते हैं की खाली दिमाग शैतान का घर होता है। किसी ना किसी काम को करते रहें। अपने आप को ज़रूरतमंद लोगों की मदद में भी व्यस्त रख सकते हैं। इससे आपके अंदर सकारात्मकता आएगी और आपकी सकारात्मक सोच बढ़ेगी।

योग और ध्यान करें – नशीली चीज़ों का प्रयोग और धूम्रपान बंद कर दें। इससे नकारात्मक विचार भी आते हैं और बीमारियाँ भी आती है। सबसे बढ़िया है की आप योग करें और ध्यान लगाएँ। योग और ध्यान में ऐसी शक्ति है की बड़ी से बड़ी नकारात्मकता को ख़त्म कर देती है। योग और ध्यान से आपके अंदर शांति और उर्जा पैदा होगी जो हर तरह के नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों में परिवर्तन करने मैं आपको मदद करेगी।

सकारात्मकता की शुरुआत आशा और विश्‍वास से होती है। चारों तरफ अंधेरा हो और अगर हम एक दीपक जला दें तो एक पल में फैला हुआ अंधकार दूर हो जाता है। इसी तरह आशा की एक किरण हमारे सारे नकारात्मक विचारों को दूर कर देता है। महात्मा गाँधी ने कहा है – “मनुष्य वह प्राणी है जो अपने विचारो से बना होता है, वह जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है”

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