वर्कप्लेस पर फन एट वर्क का तालमेल कैसे रखें

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हमारे भारतीय संस्थानों में दो बड़ी चुनौतियां सबसे गंभीर समस्या है. पहली चुनौती यह है कि वर्कप्लेस पर काम करने वाले लोगों में बोरियत बहुत तेजी से हावी हो रही है. दूसरी बड़ी चुनौती है उत्पादकता की कमी. कर्मचारियों में उदासीनता के कारण उत्पादकता की कमी स्वभाविक सी बात है. जिसका असर कार्यस्थल और कर्मचारियों के निजी जीवन दोनों जगह समान रूप से पड़ता है. विगत कई सालों से इस समस्या पर हुए शोध से एक उपाय सामने आया जिससे कर्मचारियों कि समस्या हल हो सके. इस उपाय के प्रयोग से यह पाया गया कि कर्मचारी ज्यादा लंबे अंतराल तक खुश रहने लगे और उनकी उत्पादकता में भी जबरदस्त वृद्धि हुई.

गूगल, फ़ेसबुक, माइक्रोसॉफ़्ट, इंफ़ोसिस और विप्रो जैसी कई विश्वस्तरीय संस्थाएं अपने कर्मचारियों के लिए वर्कप्लेस पर कई तरह कि एक्टिविटिस और प्रोग्राम आयोजित करवाती रहती है. जिसके परिणाम स्वरूप कर्मचारियों कि पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में बहुत फायदा देखा गया.

इस तरह की गतिविधियों और कार्यक्रमों को ‘फन एट वर्क’ के नाम से जाना जाता है. हम सब अपने वर्क की शुरुआत तो बड़े जोश व ऊर्जा के साथ करते है, लेकिन काम करते-करते हमारी शारीरिक व मानसिक ऊर्जा कम होती जाती है. ऊर्जा में कमी के कारण हमारा काम भी प्रभावित होता है और उत्पादकता में भारी कमी आ जाती है. जिसके कारण हमारा संयम टूटता जाता है और परिणाम स्वरूप हमसे जाने-अनजाने कई गलतियाँ होने लग जाती है. ऊर्जा की कमी से कर्मचारियों के जीवन में नकारात्मक असर पड़ता है. ठीक इसके विपरीत फन एट वर्क के बीच सही संतुलन बनाए रखने से दिनभर ऊर्जा के स्तर को भी बेहतर बनाए रखा जा सकता है. जिससे हम अपने प्रोफेशन को भी बेहतर कर सकते है. ‘फन एट वर्क’ के प्रयोग से हम अधिक संयमित और खुश रहने लग जाते है. इससे हमारे जीवन कि गाड़ी सकारात्मक सोच पर चलने लग जाती है.

आपके दिमाग में यह प्रश्न जरूर उठ रहा होगा कि इस भागदौड़, कामकाजी और तनावयुक्त भरे जीवन में ऊर्जा के स्तर को और सकारात्मक सोच का संचार कैसे करे? इसका सीधा और आसान सा जवाब है – ‘फन एट वर्क.’ यह हम अच्छे से जानते है हमें फन के अलावा कहीं से भी ज्यादा ऊर्जा की प्राप्ति का दूसरा कोई विकल्प नही है. आप अपने आपसे एक प्रश्न कीजिए, बच्चों में इतनी ऊर्जा कहां से आती है? क्योंकि बच्चें हमेशा अपने खेल और आनंद में ही मग्न रहते है. इस कारण बच्चों में कार्यक्षमता का स्तर भी ज्यादा होता है. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है हम कार्य के प्रति अधिक गंभीर और फन के प्रति अरुचि या समय का अभाव जैसा बहाना बनाने लग जाते है.

हम आपको एक सलाह देना चाहते है, प्रतिदिन पाँच-दस मिनट का ब्रेक ‘फन एट वर्क’ के लिए सभी कर्मचारियों और संस्थान के मालिक को लेना चाहिए. यकीन मानिए इस सलाह के नतीजे को हमने खुद अनुभव किया है. इस छोटे से फैसले के बाद कर्मचारियों में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला, उनकी कार्यक्षमता और खुशहाली में बहुत इज़ाफा हुआ. कई छोटे संस्थानों के लिए यह फैसला एक चुनौतीपूर्ण हो सकता है. लेकिन, असंभव कभी नही. जिस तरह काम अनिवार्य है ठीक उसी तरह फन भी अनिवार्य है. इस उपाय से आपके कर्मचारी नये जोश, उमंग और पूर्ण विश्‍वास के साथ अपने वर्कप्लेस पर कार्य को अंजाम देंगे.

आइए हम आपको कुछ मुख्य बिंदुओं से अवगत कराते है :-

1. फन एट वर्क के फायदे

  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार.
  • सहनशक्ति और संयम में वृद्धि.
  • दिल और दिमाग हमेशा सफल परिणामों के बारे में चिंतन करता है.
  • कर्मचारियों के बीच एकता और दोस्ती का बढ़ना.
  • प्रतिदिन कुछ ना कुछ नई एक्टिविटी होने से कर्मचारी खुशी-खुशी काम पर रोजाना आना पसंद करते है.
  • कर्मचारियों को अपने वर्कप्लेस पर नौकरी के प्रति संतुष्टी का अनुभव होता है.
  • कर्मचारियों में काम के प्रति ईमानदारी और सजगता का विकास होता है.
  • कर्मचारी अपने निजी और प्रोफेशन के बीच सही तालमेल को समझ पाते है.
  • कर्मचारी वर्कप्लेस को अपना संस्थान समझ कर काम करते है और संस्थान की उन्नति को अपनी उन्नति समझते है.

2. वर्कप्लेस पर फन के अभाव से होने वाला नुकसान

  • खुशी मन से काम ना होने पर उत्पादकता या कार्य पर नकारात्मक असर.
  • कार्य के प्रति उत्साह और ऊर्जा की कमी.
  • कर्मचारी नियमित काम पर नही आते और आते भी है तो तनाव से ग्रस्त रहते है.
  • जरा-जरा सी बात पर गुस्सा करना या खीझना आम बात हो जाती है.
  • कर्मचारी इस इंतजार में रहते है कब वीकेंड आए और वो उसको इंजोय करें.
  • काम में लोगों का ध्यान नही लगता और भूल करना आदत सी हो जाती है.
  • ग्रूप में काम करना खलता है और हीनभावना से अपना और अपने संस्थान का नुकसान करते है.

3. कुछ सरल और आसान फन एक्टिविटी

  • बीस-तीस बार ग्रुप में जम्प करना. इस फन से स्वास्थ्य को फायदा होता है और रक्त-संचार भी बेहतर होता है.
  • एक दूसरे के पीछे चैन बनाकर खड़े हो जाना और दो-तीन मिनट तक एक दूसरे के कंधे की मसाज करना. इससे कार्य के प्रति थकान दूर होगी और एक नई ताज़गी का अहसास होगा.
  • अगर तनाव या गुस्सा ज्यादा रहता है तो आर्म रेस्लिंग का मजा लें.
  • कार्य का प्रेशर अधिक हो रहा है तो सभी मिलकर कुछ देर प्रेरणात्मक गीत गाएं.
  • कुछ देर टहल कर आए.
  • हफ्तें में कोई छोटी-मोटी प्रतियोगिता का आयोजन करे. जिसमें सब अपने-अपने हुनर को पेश करें.

इन छोटी-छोटी फन एक्टिविटिस को अपनाए फिर देखिए आपके जीवन में काम की रफ्तार कितनी तेजी से बढ़ती है. आप अपनी सुविधानुसार कई और एक्टिविटिस को भी अपना सकते है बस शर्त यह है कि आप उसको इंजोय करें ना कि टाइमपास. कुछ महीने इन टिप्स को फॉलो कीजिए आप खुद अनुभव करेंगे आपमें सकारात्मकता का भरपूर संचार हुआ है. आपकी कार्यक्षमता कई गुणा बढ़ जाएगी. आप अपने वर्क एट फन में सही तालमेल बिठा पाएँगे. इससे आपके संस्थान के साथ-साथ आपकी उन्नति के रास्ते भी खुलेंगे.

दोस्तों, उम्मीद पर तो दुनिया कायम है फिर यह तो एक छोटा सा प्रयास है. आपने यह कहावत तो सुनी होगी –

”कोशिश करने वालों कि कभी हार नही होती,
किनारे पर बैठे रहने से नैया पार नहीं होती.”

संयम, नियम और एकाग्रता के साथ फन को भी अपने वर्कप्लेस पर स्थान दें.

आपको यह लेख कैसा लगा? जरूर बताए. आशा करते है हमारा यह लेख आपकी मदद करने में सहायक होगा. आपकी प्रतिक्रिया हमारा उत्साह बढ़ाती है. हमें और भी बेहतर होने में मदद व प्रेरणा मिलती है. जिससे हम आगामी लेख और भी अच्छा लिख पाएं.

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