वर्कप्लेस पर फन एट वर्क का तालमेल कैसे रखें

मार्च 12, 2016

हमारे भारतीय संस्थानों में दो बड़ी चुनौतियां सबसे गंभीर समस्या है। पहली चुनौती यह है कि वर्कप्लेस पर काम करने वाले लोगों में बोरियत बहुत तेजी से हावी हो रही है। दूसरी बड़ी चुनौती है उत्पादकता की कमी। कर्मचारियों में उदासीनता के कारण उत्पादकता की कमी स्वभाविक सी बात है। जिसका असर कार्यस्थल और कर्मचारियों के निजी जीवन दोनों जगह समान रूप से पड़ता है। विगत कई सालों से इस समस्या पर हुए शोध से एक उपाय सामने आया जिससे कर्मचारियों कि समस्या हल हो सके। इस उपाय के प्रयोग से यह पाया गया कि कर्मचारी ज्यादा लंबे अंतराल तक खुश रहने लगे और उनकी उत्पादकता में भी जबरदस्त वृद्धि हुई।

गूगल, फ़ेसबुक, माइक्रोसॉफ़्ट, इंफ़ोसिस और विप्रो जैसी कई विश्वस्तरीय संस्थाएं अपने कर्मचारियों के लिए वर्कप्लेस पर कई तरह कि एक्टिविटिस और प्रोग्राम आयोजित करवाती रहती है। जिसके परिणाम स्वरूप कर्मचारियों कि पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में बहुत फायदा देखा गया।

इस तरह की गतिविधियों और कार्यक्रमों को ‘फन एट वर्क’ के नाम से जाना जाता है। हम सब अपने वर्क की शुरुआत तो बड़े जोश व ऊर्जा के साथ करते है, लेकिन काम करते-करते हमारी शारीरिक व मानसिक ऊर्जा कम होती जाती है। ऊर्जा में कमी के कारण हमारा काम भी प्रभावित होता है और उत्पादकता में भारी कमी आ जाती है। जिसके कारण हमारा संयम टूटता जाता है और परिणाम स्वरूप हमसे जाने-अनजाने कई गलतियाँ होने लग जाती है। ऊर्जा की कमी से कर्मचारियों के जीवन में नकारात्मक असर पड़ता है। ठीक इसके विपरीत फन एट वर्क के बीच सही संतुलन बनाए रखने से दिनभर ऊर्जा के स्तर को भी बेहतर बनाए रखा जा सकता है। जिससे हम अपने प्रोफेशन को भी बेहतर कर सकते है। ‘फन एट वर्क’ के प्रयोग से हम अधिक संयमित और खुश रहने लग जाते है। इससे हमारे जीवन कि गाड़ी सकारात्मक सोच पर चलने लग जाती है।

आपके दिमाग में यह प्रश्न जरूर उठ रहा होगा कि इस भागदौड़, कामकाजी और तनावयुक्त भरे जीवन में ऊर्जा के स्तर को और सकारात्मक सोच का संचार कैसे करे? इसका सीधा और आसान सा जवाब है – ‘फन एट वर्क’। यह हम अच्छे से जानते है हमें फन के अलावा कहीं से भी ज्यादा ऊर्जा की प्राप्ति का दूसरा कोई विकल्प नही है। आप अपने आपसे एक प्रश्न कीजिए, बच्चों में इतनी ऊर्जा कहां से आती है? क्योंकि बच्चें हमेशा अपने खेल और आनंद में ही मग्न रहते है। इस कारण बच्चों में कार्यक्षमता का स्तर भी ज्यादा होता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है हम कार्य के प्रति अधिक गंभीर और फन के प्रति अरुचि या समय का अभाव जैसा बहाना बनाने लग जाते है।

हम आपको एक सलाह देना चाहते है, प्रतिदिन पाँच-दस मिनट का ब्रेक ‘फन एट वर्क’ के लिए सभी कर्मचारियों और संस्थान के मालिक को लेना चाहिए। यकीन मानिए इस सलाह के नतीजे को हमने खुद अनुभव किया है। इस छोटे से फैसले के बाद कर्मचारियों में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला, उनकी कार्यक्षमता और खुशहाली में बहुत इज़ाफा हुआ। कई छोटे संस्थानों के लिए यह फैसला एक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। लेकिन, असंभव कभी नही. जिस तरह काम अनिवार्य है ठीक उसी तरह फन भी अनिवार्य है। इस उपाय से आपके कर्मचारी नये जोश, उमंग और पूर्ण विश्‍वास के साथ अपने वर्कप्लेस पर कार्य को अंजाम देंगे।

आइए हम आपको कुछ मुख्य बिंदुओं से अवगत कराते है-

1. फन एट वर्क के फायदे

2. वर्कप्लेस पर फन के अभाव से होने वाला नुकसान

3. कुछ सरल और आसान फन एक्टिविटी

इन छोटी-छोटी फन एक्टिविटिस को अपनाए फिर देखिए आपके जीवन में काम की रफ्तार कितनी तेजी से बढ़ती है। आप अपनी सुविधानुसार कई और एक्टिविटिस को भी अपना सकते है बस शर्त यह है कि आप उसको इंजोय करें ना कि टाइमपास। कुछ महीने इन टिप्स को फॉलो कीजिए आप खुद अनुभव करेंगे आपमें सकारात्मकता का भरपूर संचार हुआ है। आपकी कार्यक्षमता कई गुणा बढ़ जाएगी। आप अपने वर्क एट फन में सही तालमेल बिठा पाएँगे। इससे आपके संस्थान के साथ-साथ आपकी उन्नति के रास्ते भी खुलेंगे।

दोस्तों, उम्मीद पर तो दुनिया कायम है फिर यह तो एक छोटा सा प्रयास है। आपने यह कहावत तो सुनी होगी-

”कोशिश करने वालों कि कभी हार नही होती,
किनारे पर बैठे रहने से नैया पार नहीं होती”

संयम, नियम और एकाग्रता के साथ फन को भी अपने वर्कप्लेस पर स्थान दें।

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