हाइपोग्लाइसीमिया क्या है?

अक्टूबर 4, 2018

हाइपोग्लाइसीमिया का सम्बन्ध आमतौर पर डायबिटीज से होता है। जब ब्लड में शुगर लेवल असामान्य रुप से गिर जाता है तो इस स्थिति को हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है। ब्लड में शुगर की मात्रा 70 मिलीग्राम/डेसीलीटर से कम होने पर हाइपोग्लाइसीमिया होता है। इसे डायबिटीज से भी ज्यादा ख़तरनाक माना जाता है। इसमें मरीज को चक्कर आते हैं और वो बेहोश भी हो सकता है। इसका तुरंत उपचार किया जाना जरुरी है जिसके लिए ज्यादा शुगर युक्त आहार या दवाएं ली जाती हैं। आइये, अब जानते हैं इसके प्रमुख कारणों और लक्षणों के बारे में-

हाइपोग्लाइसीमिया के कारण-

डायबिटीज होने की स्थिति में – हाइपोग्लाइसीमिया होने का सबसे प्रमुख कारण डायबिटीज के लिए ली जाने वाली दवाओं का साइड इफेक्ट होता है। कई बार अनजाने में दवा या इन्सुलिन की ज्यादा मात्रा ले लेने पर और कभी दवा लेने के बाद खाना नहीं खाने से ऐसी स्थिति बन जाती है। इसके अलावा डायबिटीज पेशेंट्स द्वारा ज्यादा शारीरिक श्रम कर लेने से भी शुगर लेवल बहुत कम हो जाता है।

डायबिटीज नहीं होने की स्थिति में – लीवर सम्बन्धी बीमारी, अल्कोहल का ज़्यादा सेवन, अग्नाशय द्वारा इन्सुलिन की ज्यादा मात्रा का उत्पादन करना, हार्मोन की कमी होना, लम्बे समय तक उपवास रखने जैसी स्थितियों में हाइपोग्लाइसीमिया की सम्भावना बढ़ जाती है।

हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण-

शुगर (ग्लूकोस) शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है लेकिन जब शुगर लेवल बहुत कम हो जाता है तो हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति आ जाती है, जिसके निम्न लक्षण दिखाई देते हैं-

स्थिति ज्यादा बिगड़ जाने पर व्यक्ति का व्यवहार भ्रामक और असामान्य होने लगता है यानी रोजाना के जरुरी कामों को करने में कठिनाई होने लगती है। धुंधला दिखाई देने लगता है, चेतना में कमी आने लगती है और शब्दों को स्पष्ट बोल पाने में भी मुश्किल आने लगती है।

डायबिटीज होने या ना होने की स्थिति में, हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेकर ही उपयुक्त आहार और दवा ली जानी चाहिए। हमने आपसे सिर्फ ज्ञानवर्धक जानकारी साझा की है। अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर ले। सदैव खुश रहे और स्वस्थ रहे।

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