फेफड़ों को स्वस्थ कैसे रखें?

जनवरी 21, 2016

चीन का शंघाई हो या भारत की दिल्ली, इस समय पूरी दुनिया में केवल एक ही बात को ध्यान में रखते हुए प्रयास हो रहे हैं। जी हाँ, हम प्रदूषण की बात कर रहे हैं। विगत कई सालों में जीवनशैली और ख़ान-पान में आये बदलावों के कारण दुनिया के कई बड़े हिस्सों में पर्यावरण बहुत अधिक प्रदूषित हो चुका है और हो भी रहा है। यह सिर्फ़ सरकारों या देश-दुनिया की ही समस्या नही है बल्कि हमारे सेहत के लिहाज से भी बहुत बड़ी समस्या है, जिसका सीधे तौर पर हमारी सेहत पर असर पड़ रहा है। प्रदूषण से कई बीमारियों का जन्म होता है और लाखों लोग मौत के शिकार होते हैं। दूषित पर्यावरण के कारण आप पर भी ऐसी समस्या के बादल कभी भी मंडरा सकते हैं। इससे पहले की देर हो जाये अपने स्वास्थ्य की ओर ध्यान देने का प्रयास करें। प्रदूषण से बचने के लिए फेफड़ा एक अनिवार्य सरंक्षक के रूप में काम करता है। इस लिहाज से हमारी सेहत का पूरा भार हमारे फेफड़ों पर होता है।

यह शरीर का एक अभिन्न अंग है। मनुष्य प्रतिदिन करीब 20 हजार बार सांस लेता है और हर सांस के साथ ऑक्सीजन शरीर में पहुंचती है, जितना ज़्यादा ऑक्सीजन शरीर में जाता है, शरीर उतना ही सेहतमंद बना रहता है। फेफड़े ही सारे शरीर में प्राण-वायु का संचार करते हैं। दुखद बात तो यह है कि आज वर्तमान में सबसे ज़्यादा बिमारियाँ फेफड़ों से जुड़ी हुई है। अगर फेफड़ों पर बाहरी हमला न हो तो यह काफी टिकाऊ होते हैं। कुछ अपवाद को छोड़कर हमारे फेफड़े तब तक मुसीबत में नहीं आते जब तक हम उन्हें मुसीबत में नहीं डालते। इसके लिए जरूरी है फेफड़ों का स्वस्थ रहना। बेहतर होगा फेफड़ों की सेहत पर ध्यान दिया जाये और अपने जीवन को सुरक्षित किया जाये। तो चलिये आज हम अपने इस लेख में ऐसे ही कुछ तरीकों के बारे में जानकारी देंगे। जिनकी मदद से आप अपने फेफड़ों को बढ़ती उम्र के साथ भी हमेशा स्वस्थ रख सके।

1. धूम्रपान व शराब का सेवन ना करें – रोज़ धूम्रपान करना फेफड़ों के लिए सबसे अधिक हानिकारक है। जब बात धूम्रपान की हो तो इसकी कोई सुरक्षित दहलीज़ नहीं होती। आप जितनी ज्यादा मात्रा में धूम्रपान करते है, आपको फेफड़ों का कैंसर और सीओपीडी होने का ख़तरा उतना ही अधिक होगा। धुंआ काफी खतरनाक ही नही बल्कि जानलेवा भी होता है. रिसर्च यह बताती है, जिस वातावरण में धूम्रपान किया गया हो वहाँ पर रहने मात्र से लोगों को जान का ख़तरा हो सकता है। सिर्फ धूम्रपान त्याग देना ही काफी नहीं है। मारिजुआना, पाइप या सिगार भी आपके फेफड़ों के लिए उतने ही नुक़सानदायक है। शराब भी धूम्रपान की तरह फेफड़ों के लिए समान नुक़सानदायक है। अल्कोहल की अधिक मात्रा या रोजाना की लत से फेफड़ों की कार्य प्रणाली कमजोर हो जाती है जिससे सांस के आदान-प्रदान में रुकावट आती है।

2. पानी में कमी ना करें – फेफड़ों की सेहत को दुरुस्त और मजबूत बनाए रखने के लिए पानी की भूमिका अहम है। पर्याप्त पानी पीने से फेफड़े हाइड्रेट (गीले) बने रहते हैं। इसी गीलेपन की वजह से फेफड़ों की गंदगी बाहर निकलती है और फेफड़े स्वस्थ बने रहते हैं। इसलिये गर्मी-सर्दी चाहे जो मौसम हो पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहने की आदत डालें।

3. योग और व्यायाम ज़रूर करें – योग और व्यायाम से फेफड़ों को मज़बूत बनाया जा सकता है, यह आपके फेफड़ों की क्षमता को कई गुणा बढ़ा देता है जिससे आप बेहतर तरीके से ऑक्सीजन ले सकें। योग और व्यायाम फेफड़ों की सफाई का सबसे प्रभावशाली माध्यम है। रोजाना सुबह-शाम इन क्रियाओं की आदत डालें, इससे पहले रोज थोड़ा टहलकर, दौड़कर या स्ट्रेच की सहायता से अपने फेफड़ों को तैयार करे। रोजाना वर्कआउट के अलावा कुछ योग का अभ्यास भी कर सकते हैं, जैसे की- योग मुद्रा, मत्स्यासन, पद्म सर्वांगासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन, नाड़ी शोधन प्राणायाम आदि।

चक्कर या बेहोशी महसूस हो तो योग या व्यायाम तुरंत रोक दें। कोई भी योग या व्यायाम से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें, क्योकि सांस की समस्याओं में डॉक्टर की सलाह अनुसार दवाई ली जाती है। ध्यान रहे, सांस के व्यायाम मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं हो सकते। योग और व्यायाम का अभ्यास केवल आपके आने वाली समस्या से बचाव के लिए है।

4. वायु प्रदूषण से दूर रहे – अधिकतर गर्मी के महीने में कुछ स्थानों में ओजोन और दूसरे प्रदूषण के कारण आपका एक्सरसाइज के लिए या बाहर समय बिताना स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है। फेफड़ों की तकलीफ़ों से जूझ रहे लोग ज़्यादातर वायु प्रदूषण से संवेदनशील हो जाते है। फेफड़ों की समस्या अगर अधिक है तो बाहर जाते वक्त मेडीकेटेड मास्क का प्रयोग करें और शरीर को समय-समय पर डिटॉक्सिफाई करते रहे। जहाँ तक संभव हो प्रदूषण रहित या कम प्रदूषित क्षेत्रों का रहने के लिए चुनाव करें।

5. अपने घर को स्वच्छ रखें – वायु प्रदूषण सिर्फ बाहरी समस्या ही नहीं है। घर में ऐसी कई चीज़ें हैं, जैसे- लकड़ी द्वारा जलने वाले स्टोव, अंगीठी, कुछ तरह की मोमबत्तियां और एयर फ्रेशनर भी वायु प्रदूषण के कारण हो सकते है। यहाँ पर तीन तरह के उपाय करने ज़रूरी हैं:- स्रोत को हटाना, वेंटिलेशन को बढ़ाना और वायु को स्वच्छ रखने का इंतज़ाम करना। एयर क्लीनर गैस पर कोई असर डाले बिना वायु को स्वच्छ बनाये रखती है। घर के आस-पास भी स्वच्छता बनाए रखें। इधर-उधर कूड़ा-करकट ना डालें और ना ही प्लास्टिक व कूड़ा जलायें। क्योकि इनको जलाने से जो धुआँ निकलता है, उससे घर के आस-पास का वातावरण भी दूषित होता है और इसी दूषित वातावरण में रहने वाले करीब 15% लोगों को अस्थमा की शिकायत हो जाती है।

6. पौष्टिक आहार लें – ऐसा आहार जिसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होता है वो भोजन फेफड़ों के लिए फायदेमंद होता है। रिसर्च से यह पता चला है कि जो लोग फूलगोभी, ब्रॉकली, पत्तागोभी का सेवन करते हैं, उनमें फेफड़ों का कैंसर होने की सम्भावना उन लोगों से काफी कम हो जाती है जो यह चीज़ें खाने के आदी नही है। हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में ज्यादा मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होता हैं जिसका फेफड़ों पर रक्षात्मक असर होता है। लहसुन-प्याज, गाजर, अदरक, विटामिन-सी, हल्दी, सेब, सभी तरह की दालें, अनार, ओमेगा थ्री फैटी एसिड (अखरोट, बींस, दूध से बनी चीज़ें और अलसी के बीज) आदि कई चीज़ों में एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स, प्रोटीन इत्यादि प्रचुर मात्रा में होता है। ऐसे पौष्टिक आहार के नित्य सेवन से फेफड़ों में सूजन व जलन कम होती है और संक्रमण से निपटने में भी सहायक है। मौसमी फल या रस का सेवन अधिक हितकर होता है। खाने-पीने का समय निर्धारित करें और नियमित अंतराल पर ही खायें।

बासी भोजन ना करें। इससे पाचन-तंत्र कमजोर होता है। फेफड़ों में किसी तरह की शिकायत हो तो अधिक मसालेयुक्त और तले हुए खाने से परहेज करे, क्योकि ऐसा खाना एसिडिटी बना सकता है। जो फेफड़ों के लिए बहुत ही नुक़सानदायक होता है।

7. मौसम के अनुरूप फेफड़ों का ध्यान रखें – ज़्यादा सर्दी या उमस के मौसम में फेफड़ों की सेहत को दुरुस्त रखने या उससे संबंधित परेशानी से राहत पाने के लिए अधिक पानी पिएं। फेफड़ों से संबंधित किसी तरह की परेशानी होने पर बहुत खट्टी या ठंडी चीज़ों का सेवन ना करे, क्योकि इनके सेवन से फेफड़ों में सूजन की आशंका हो सकती है। शरीर को अचानक सर्दी से गर्मी या गर्मी से सर्दी में ले जाने से भी बचें। जिससे शरीर के तापमान में संतुलन बना रहे और कोई मौसमी बीमारी भी ना हो।

155 मिलियन से भी ज्यादा लोग ऐसे इलाकों में जीवन यापन करते है जहाँ की हवा का प्रदूषण का पैमाना जान के लिए ख़तरा है। हवा के प्रदूषण से न सिर्फ अस्थमा और सीओपीडी बल्कि टीबी, निमोनिया, इन्फ़्लुएन्ज़ा, फेफड़े का कैंसर और फेफड़े सम्बन्धी कुछ अन्य दीर्घ प्रतिरोधी रोगों से लोग पीड़ित है। दुखद बात तो यह है कि इन कारणों से असंख्य लोगों की मौत हो जाती है। फेफड़ों की परेशानी हर देश व सामाजिक समूह के लोगों को प्रभावित करती हैं, आमतौर पर गरीब, बूढ़े, बच्चें, युवा और कमजोर व्यक्तियों पर इसका असर जल्दी पड़ता है। फेफड़ों में फैलने वाले इन संक्रमणों के बारे में लोगों के बीच जानकारी का काफी अभाव है। प्रदूषित पर्यावरण, घर के अंदर का प्रदूषण (जैसे लकड़ी, कंडे या कोयले को जलाकर भोजन बनाना), धूम्रपान, तम्बाकू आदि का सेवन बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे और भी कई कारणों से फेफड़े संबंधी मरीजों की संख्या दिन पे दिन बढ़ती ही जा रही है। उचित जीवनशैली, बेहतर ख़ान-पान और धूम्रपान रहित वातावरण बनाया जाये तो फेफड़ों से संबंधित संक्रमणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कई घर की गतिविधियां में आपके फेफड़ों को हानिकारक गैसों का सामना करना पड़ता है। हमेशा सुरक्षित उत्पाद का चयन करें, जो भी प्रोडक्ट आप घर के कामों के लिए प्रयोग में लाते है। कार्य करने की जगह हमेशा हवादार हो और ज़रुरत हो तो डस्ट मास्क का प्रयोग करे। सफाई वाले उत्पाद में भी खतरनाक केमिकल होते है, जैसे अमोनिया और ब्लीच। किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले लेबल ज़रूर पढ़ें।

एक जागरूक नागरिक की तरह आप स्वच्छ हवा के लिए बनाये गए नियम का साथ दें। आप अपने स्तर पर बिजली की बचत करें, लकड़ी या कूड़े को जलाने से बचें और गाड़ी कम चलायें। फेफड़ें शरीर की जान है, इसलिए इन्हें स्वस्थ रखना अति आवश्यक है।

हमारा उद्देश्य आपका सामान्य ज्ञान बढ़ाना है। फेफड़ों की कोई भी समस्या होने पर आप अपने चिकित्सक से औषधि या घरेलू उपचार के लिए जानकारी अवश्य लें।

“आयुर्वेद के सदा स्वस्थ रहने के 10 मन्त्र”

शेयर करें