ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है

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“ईमानदारी सर्वोच्च नीति है” बेंजामिन फ्रेंकलिन द्वारा कही गयी इस बात को हमने अपने स्कूल के दिनों में कहानी की शिक्षा के रूप में भी तो पढ़ा है ना, ‘ऑनेस्टी इस दी बेस्ट पॉलिसी’ और इस मोरल से जुड़ी कहानियां आपको आज भी याद होंगी, लेकिन क्या हमें उन कहानियों के साथ-साथ ये सन्देश भी याद है कि हर शख्स को ईमानदार होना चाहिए क्योंकि ईमानदारी का कोई विकल्प हो ही नहीं सकता।

समय चाहे आज का हो या पहले का, ईमानदारी का महत्व और ज़रूरत तब भी उतनी ही थी जितनी आज है। आज भले ही ये माना और कहा जाता हो कि ईमानदार होना आसान बात नहीं है, ईमानदार व्यक्ति को कोई सुकून से नहीं रहने देता। लेकिन ये हम सब जानते हैं कि जितना सुकून ईमानदार होने में मिलता है उतना किसी और स्थिति में नहीं मिल सकता।

ईमानदार होने का अर्थ है सच्चा होना। सम्बन्ध जिस भी प्रकार का हो, उसमें स्पष्ट और पारदर्शी होना ही ईमानदारी है। तो चलिए आज बात करते हैं ऐसे गुणों की, जो ईमानदारी के साथ खुद-ब-खुद चले आते हैं और जिनके फलस्वरूप हर सम्बन्ध मजबूत होता चला जाता है और ये यकीन पुख़्ता हो जाता है कि ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है –

ईमानदारी यानि सच्चाई –
जीवन के हर मोड़ पर आपकी अपेक्षा यही रहती हैं ना, कि आपके आसपास मौजूद लोग आपके प्रति सच्चे हो, आपके साथ छल करने के बजाये आपके गुणों को सराहे और आपकी कमियों के बारे में सच्चाई के साथ सतर्क करते रहें, लेकिन जब आप अपने आसपास मौजूद माहौल में ऐसे सच्चे और ईमानदार लोगों की कमी महसूस करते हैं तो थोड़ी निराशा भी महसूस करते ही होंगे। दरअसल ईमानदारी और सच्चाई एक ही बात है, बस फर्क इतना है कि ईमानदारी शब्द को अक्सर फर्ज़ से जोड़कर देखा जाता है और सच्चाई को रिश्तों से जोड़कर देखा-समझा जाता रहा है।

ईमानदारी के साथ अनुशासन भी चलता है –
ईमानदार व्यक्ति में अनुशासन भी होता है जिसके ज़रिये वो हर कार्य आत्म-अनुशासन में रहते हुए समय पर पूरा कर पाता है और समय पर कार्य पूरा करना भी उस कार्य के प्रति ईमानदारी ही दर्शाता है।

ईमानदारी में पारदर्शिता होती है –
ईमानदार व्यक्ति जिस भी रिश्ते में जुड़ा होता है, उसके व्यवहार में पारदर्शिता को साफ देखा जा सकता है। रिश्ता चाहे परिवार का हो, करियर से जुड़ा हो या फिर समाज और दुनिया से ही क्यों न जुड़ा हो, ईमानदार शख्स हर रिश्ते को पूरी पारदर्शिता के साथ निभाता है जिससे सम्बन्ध और भी ज़्यादा मजबूत हो जाया करते हैं।

ईमानदारी में निहित होती है करुणा –
दया और करुणा का भाव भी ईमानदारी का ही साथी होता है। दया और सहानुभूति, सहयोग और सद्भावना जैसे भाव ईमानदार व्यक्ति में कूट-कूट कर भरे होते हैं जो हर कदम पर उसके व्यक्तित्व में निखार लाते हैं।

ईमानदारी और यथार्थ –
इमर्सन ने कहा है – ‘यथार्थ और ईमानदारी सगी बहनें हैं’ सच ही तो है, ईमानदारी और वास्तविकता आपस में सम्बंधित जो है। छल-कपट, झूठ और बेईमानी से दूर रहकर ईमानदारी के साथ जीना ही यथार्थ जीवन है।

ईमानदारी और विश्वसनीयता –
ईमानदार व्यक्ति भरोसेमंद होते हैं, जिन पर आँख बंद करके भी भरोसा किया जा सकता है और मुश्किल हालातों में पीठ दिखाकर भागने की बजाए ऐसे लोग मुसीबत में साथ खड़े देखे जा सकते हैं।

ईमानदारी और निर्भीकता –
ईमानदार व्यक्ति को किसी बात का डर नहीं होता क्योंकि वो जानता है कि उसने किसी के साथ कोई छल नहीं किया है और इसी कारण ईमानदार व्यक्ति का व्यक्तित्व भी शांत होता है क्योंकि बेईमान लोगों की तरह अपने दोष और की गयी चोरी को छिपाने के लिए उग्रता दिखाने की उसे कोई ज़रूरत नहीं पड़ती है।

ईमानदारी और कर्तव्य –
कर्तव्य और अधिकार एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं लेकिन आज के इस दौर में अधिकारों का बोलबाला है और कर्तव्य के बारे में बात करना कोई पसंद नहीं करता, लेकिन ईमानदारी अपने साथ कर्तव्य को लेकर चलती है। हर ईमानदार शख्स अपने कर्तव्यों का निर्वाह सच्चाई और समर्पण के साथ करता है।

ईमानदारी और प्रतिष्ठा –
हर व्यक्ति चाहता है कि समाज में उसे ख़ास प्रतिष्ठा और सम्मान मिले लेकिन समाज और दुनिया उसी को सराहती है, उसी का सम्मान करती है जो अपने दायित्वों के निर्वहन के समय पूरी ईमानदारी बरतता है। ऐसे लोगों को प्रत्येक व्यक्ति सम्मान की दृष्टि से देखता है और अपना आदर्श भी मानता है।

थॉमस जैफ्फरेंसन ने कहा है कि- “बुद्धिमानी की किताब में ईमानदारी सबसे पहला पाठ है।” बचपन से आज तक हमने कितने ही पाठ पढ़े और याद करे हैं और आज ईमानदारी से जुड़े उन्हीं पाठों को याद करने की जरुरत है। ईमानदारी कोई व्यक्तित्व नहीं है जो कुछ लोगों तक ही सीमित रह सकता हो, बल्कि ईमानदारी व्यक्तित्व का ऐसा ज़रूरी गुण हैं जो हर शख्स में होना बेहद ज़रूरी है। ईमानदारी की सीख लेने की कोई निश्चित उम्र नहीं होती। जिस पल चाहे, उसी पल से ईमानदार हुआ जा सकता है, स्वयं के प्रति, अपनों के प्रति, समाज-देश और इंसानियत के प्रति। ये बेहद आसान है और जिन ईमानदार लोगों को हम अपना आदर्श मानते आये हैं, क्यों ना अभी से उनकी राह का अनुसरण किया जाए और अपनी लाइफ को बेहतर से बेहतरीन बना लिया जाए।

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