ईमानदारी सेहतमंद बनाती है आपको, जानिए कैसे

इसमें कोई शक नहीं है कि कोई व्यक्ति बेहतर डायट लेने और एक्सरसाइज करने से हेल्दी औत फिट रहता है। लेकिन अगर आपके पास इन कामों के लिए पर्याप्त समय नहीं है, तो आप थोड़ा ईमानदार बनकर भी हेल्दी और फिट रह सकते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि ईमानदारी से सेहत का क्या लेना देना? चलिए हम आपको बताते हैं कि कैसे ईमानदारी सेहतमंद बनाती है आपको।

ईमानदारी से चेहरे पर आती है खुशी – अगर आप ईमानदार हैं और अपना काम भी पूरी ईमानदारी के साथ करते हैं, तो इससे आपके चेहरे पर एक संतुष्टि का भाव झलकता है और आपके व्यक्तित्व में भी उसकी गरिमा दिखाई पड़ती है। चलिए इस बात को एक उदहारण से समझते हैं. आपने हजारी प्रसाद द्विवेदी का नाम सुना होगा। यह हिंदी के बहुत बड़े साहित्यकार रहे हैं। हजारी जी ने एक बार रेल टिकट लेकर दस की बजाय सौ का नोट दे दिया और जाकर ट्रेन में बैठ गए। थोड़ी देर बाद टिकट काटने वाला व्यक्ति नब्बे रुपये लेकर ट्रेन में आया और वो पैसे हजारी को पकड़ा दिए और कहा कि हम दोनों को याद नहीं रहा है कि टिकट का मूल्य केवल दस रुपये है। इस दौरान टिकट काटने वाले के चेहरे पर एक अलग तरह का संतोष था। शायद वो अपने इस काम से यानि ईमानदारी से भीतर ही भीतर एक खुशी महसूस कर रहा था।

आनंद और संतुष्टि से आप रहते हैं तनावमुक्त – सवाल यह है कि अच्छी आदतों, ईमानदारी और विनम्रता जैसे गुणों से आपके चेहरे पर एक सकारात्मक भाव कैसे आते हैं? क्या इन सबका आपकी सेहत से कोई संबंध है?

ईमानदारी और स्वास्थ्य दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। वास्तव में जब आप ईमानदारी के साथ कोई अच्छा काम करते हैं, तो आपके दिल में एक अलग तरह की खुशी की लहर दौड़ जाती है और आप संतोष महसूस करते हैं। यह खुशी आपके चहरे पर भी झलकती है। कुल मिलाकर आपके पूरे व्यक्तित्व में एक सकारात्मक परिवर्तन होता है।

जाहिर है जब आप आप ईमानदार होते हैं, तो लोग आपकी प्रशंसा करते हैं, जिससे आपको उस काम को करने की खुशी होती है। अपने काम को ईमानदारी से करना और बिना स्वार्थ के करना अच्छी बात होती है। इससे आपको आनदं और संतोष मिलता है। आनंद और संतोष मिलने पर व्यक्ति को तनाव से दूर रहने में मदद मिलती है। शायद यही कारण है कई डॉक्टर उपचार के दौरान रोगियों को अन्य रोगियों की सेवा करने की सलाह देते हैं। या लोग धार्मिक स्थलों पर सेवा करके भीतर से अच्छा महसूस करते हैं।

ईमानदारी से जारी होते हैं अच्छे हार्मोन – वैज्ञानिक तरीके से समझे तो, आपकी मनोदशा के अनुसार ही आपकी बॉडी की बॉयोकेमिकल प्रक्रिया भी काम करती है। इन क्रियाओं पर अच्छे विचारों का अच्छा और बुरे विचारों का बुरा प्रभाव पड़ता है। यह आपके भाव ही हैं, जो शरीर में स्थित विभिन्न ग्रंथियों से बॉयोकेमिकल अथवा हार्मोन के उत्सर्जन को प्रभावित करते हैं। हार्मोन का शरीर में अहम रोल है। इनके नहीं होने से आपको किसी चीज की अनुभूति नहीं हो सकती है। जब आप खुश होते हैं, तो शरीर में अच्छे हार्मोन जारी होते हैं और जब आप दुखी रहेंगे, तो बुरे और हानिकारक हार्मोन जारी होंगे।

इसलिए अगर आप चाहते हैं कि आपके शरीर में खुशी वाले हार्मोन अधिक मात्रा में और बुरे हार्मोन कम जारी हों, तो इस काम में ईमानदारी जैसे अच्छे गुण आपकी मदद कर सकते हैं। आपने नोटिस किया होगा कि बेईमान व्यक्ति हमेशा दुखी नजर आता है जबकि ईमानदार लोगों के चेहरे पर हमेशा आत्मविश्वास और संतुष्टि दिखती है।

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