जनसंख्या के बोझ तले दबता जा रहा है भारत

आपके अक्सर रास्तोँ मेँ लगे होर्डिंग्स, ऑटो रिक्शा या बस के पीछे हम दो हमारे दो का नारा लिखा हुआ अवश्य देखा होगा। लेकिन इन होर्डिंग्स व विज्ञापनोँ के बावजूद भी हमारे देश मेँ इतनी तेजी से जनसंख्या विस्तार हो रहा है कि इन जनसंख्या के नीचे देश की तरक्की व उसका भविष्य दबता जा रहा है। जनसंख्या मेँ वृद्धि अपने साथ देश मेँ भुखमरी, अशिक्षा व बेरोजगारी को भी बढावा दे रही है।

क्या है प्रभाव

जनसंख्या के बढ्ते दबाव के कारण बहुत से राज्योँ मेँ लोगोँ को शिक्षा, रोजगार व स्वास्थ्य सुविधाओँ से वंचित रहना पडता है। भारत के जिन राज्योँ मेँ जनसंख्या अधिक हैँ, वहाँ पर लोगोँ को बुनियादी सुविधाएँ भी पर्याप्त रूप से नहीँ मिल पातीँ। इतना ही नहीँ, जनसंख्या मेँ वृद्धि के कारण लोगोँ को गरीबी व कुपोषण की समस्या से भी जूझना पडता है। बढती आबादी न सिर्फ मनुष्य के लिए बल्कि पर्यावरण के लिए भी मुसीबत की जड बनती जा रही है। अमूमन देखने मेँ आता है कि अशिक्षित लोग सोचते हैँ कि अधिक बच्चे होने से उनके पास काम करने वालोँ की अधिक संख्या होगी और आर्थिक व सामाजिक दृष्टिकोण से उनका भविष्य सुरक्षित रहेगा लेकिन वास्तव मेँ वह बेरोजगारोँ की एक लम्बी फौज को जन्म दे देते हैँ।

क्या कहते हैँ आंकडे

आबादी के मामले मेँ भारत का स्थान चीन के बाद आता है। लेकिन जिस तेजी से भारत की जनसंख्या मेँ वृद्धि होती जा रही है, उसे देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि 2025 तक जनसंख्या के सन्दर्भ मेँ भारत चीन को पछाड देगा।

क्या है कारण

हालांकि पिछले कुछ समय मेँ लोग काफी जागरूक हुए हैँ और भारत के सभी समुदायोँ मेँ आबादी बढने की रफ्तार कम हुई है, लेकिन कुल मिलाकर बढोतरी का सिलसिला अभी भी जारी है। इसके कई कारण हैँ। एक तो भारत मेँ जन्म दर मृत्यु दर की तुलना मेँ अधिक है। दूसरा, जनसंख्या नीतियाँ व अन्य उपाय अपनाकर भले ही देश मेँ प्रजनन दर गिर गया हो लेकिन फिर भी अन्य देशोँ की तुलना मेँ यह कहीँ अधिक है। जहाँ तक बार बेरोजगारी बढने की है तो इसका मुख्य कारण भी देश मेँ जनसंख्या वृद्धि की दर के अनुपात मेँ रोजगार उत्पन्न नहीँ हो पाए हैँ। जिसकी वजह से आज देश मेँ पढे-लिखे लोग भी रोजगार के तलाश मेँ इधर-उधर भटकते हुए देखे जा सकते हैँ।

क्या है निदान

भारत भले ही चीन की भांति वन चाइल्ड पॉलिसी न अपना सके, लेकिन हम दो हमारे दो के नारे को नए रंग से तो पेश कर ही सकता है। शिक्षा का विस्तार, परिवार नियोजन के तरीको का प्रचार, यौन शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, गरीबोँ को मुफ्त गर्भनिरोधक दवाओँ का वितरण, स्वास्थ्य केन्द्रोँ का विस्तार कुछ ऐसे महत्वपूर्ण कदम हैँ, जिन्हेँ उठाकर देश की सरकार व नीति-निर्माता देश मेँ अनियंत्रित तरीके से बढ रही आबादी पर कुछ अंकुश लगा सकती है।

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