यह है अन्धविश्वासोँ की धरती

अक्सर आपने लोगोँ को कहते हुए सुना होगा कि अगर बिल्ली रास्ता काट जाए तो कुछ न कुछ अशुभ अवश्य होता है। ऐसे ही अगर घर से निकलते समय कोई व्यक्ति छींक मारता है तो कुछ क्षण रूककर ही घर से बाहर निकलना चाहिए। भारत मेँ ऐसे ही और न जाने कितने अन्धविश्वास लोगोँ के मन मेँ अपना घर बनाए बैठे हैँ। जहाँ कुछ अन्धविश्वास हानिरहित होते हैँ, वहीँ कभी-कभी लोगोँ के भीतर बैठा अंधविश्वास हानिकारक भी साबित हो जाता है।

क्या हैँ कारण

आमतौर पर अंधविश्वास का मुख्य कारण शिक्षा की कमी को माना जाता है। लेकिन भारत मेँ सिर्फ अशिक्षित लोग ही नहीँ, बल्कि समाज का पढा-लिखा वर्ग भी बहुत से अंधविश्वासोँ पर भरोसा करता है। दरअसल, यह अन्धविश्वास काफी पहले समय से चले आ रहे हैँ। इसलिए समाज का हर वर्ग इन पर आंख मून्द कर भरोसा करता है। दरअसल, पुराने समय मेँ भौतिक सुख-सुविधाओँ का अभाव था, इसलिए बडे-बुजुर्गोँ ने कुछ ऐसे नियम बनाए, जिनसे लोगोँ को किसी प्रकार का कष्ट न हो लेकिन कालांतर मेँ यही नियम अन्धविश्वास मेँ बदल गए।

कैसे-कैसे अन्धविश्वास

भारत मेँ लोग हर चीज को किसी न किसी प्रतीक के रूप मेँ देखते हैँ और उसी के आधार पर वह उस चीज या घटना को अच्छे-बुरे मेँ विभाजित करते हैँ। मसलन, नीम्बू मिर्च, एक रूपए के सिक्के, पानी का गिरना, नई चीज लाने पर नारियल को तोडना शुभ माना जाता है। वहीँ, सूरज डूबने के बाद सफाई, कांच का टूटना, छींकना, रात मेँ नाखून काटना, सूर्यग्रहण, तेरह अंक को अशुभ माना जाता है।

दुष्प्रभाव

वैसे तो अन्धविश्वास इतने घातक नहीँ होते। लेकिन कभी-कभी इनका स्वरूप भयावह भी हो जाता है। अक्सर देखने मेँ आता है कि अन्धविश्वास के कारण अक्सर महिलाओँ को डायन बताकर उन्हेँ प्रताडित भी किया जाता है, इसलिए आज भारत मेँ अन्धविश्वास एक व्यापक सामाजिक समस्या बन गया है। इतना ही नहीँ, यही अन्धविश्वास मनुष्य की सोच को विकसित नहीँ होने देता, जिसके कारण न सिर्फ मनुष्य के मन मेँ निराशा व डर का वास होता है, बल्कि इससे समाज के विकास मेँ भी बाधा उत्पन्न होती है। साथ ही साथ अन्धविश्वास की यह संस्कृति वंशानुगत हस्तांतरित भी होती है। इस प्रकार यह अन्धविश्वास भावी पीढी की सोच को भी बाधित करने का कार्य करते हैँ।

क्या है निदान

अन्धविश्वास के भंवर जाल से निकलने के लिए आपको सबसे पहले अपनी सोच व एप्रोच मेँ बदलाव करना होगा। अगर आप चीजोँ को तर्कसंगत तरीके से देखेंगे तो समझेंगे कि अब तक आप जिन बातोँ पर विश्वास करते आए हैँ, उनका वर्तमान समय मेँ कोई आधार ही नहीँ है। साथ ही जागरूकता ही एक मात्र वह प्रकाश है, जिसके जरिए अन्धविश्वास रूपी अन्धकार को मिटाया जा सकता है।

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