चन्द्रशेखर आजाद – भारत के असली हीरो

भारत की आज़ादी की लड़ाई दो तरीकों से लड़ी गयी थी एक तरीका था विनम्र निवेदन आंदोलन एवं प्रदर्शन का। दूसरा तरीका था ईंट का जवाब पत्थर से देना और यह दल क्रांतिकारी कहलाता था। इस दल में कई ऐसे भारतीय युवा थे जो ब्रिटिश सरकार को उखाड़ के बाहर फेंक देना चाहते थे। उन्ही सब में से एक थे चन्द्रशेखर आजाद । तो चलिए आज हम आपको चन्द्रशेखर आजाद के जीवन से जुडी कुछ अहम बातें बताते है जिन्हे जान के आप भी उनके जीवन से प्रेरित हो जायेंगे।

1. उन्होंने खुद को अपना नाम आज़ाद दिया था जब उनकी ऊम्र 15 साल की थी। ऐसा करने के लिए उनको 15 कोड़ों की सजा भी दी गयी थी। ये बचपन के दिनों से ही भारत की आज़ादी के लिए कार्यरत थे एक बार जब उनको पकड़ के मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो उनसे नाम पूछे जाने पर उन्होंने सीना तान कर कहा “आज़ाद”.

2. वो आज़ाद ही थे जिन्होंने काकोरी कांड को अंजाम दिया और यह उनके ही दिमाग की उपज थी। यह घटना अंग्रेजो के मुँह पर एक बहुत बड़ा तमाचा थी।

3. इस कांड के बाद 5 क्रन्तिकारी पकडे गए मगर आज़ाद नहीं पकडे गए बताया जाता है की उस समय वो पैदल ही विन्द्याचल पर्वत पर चले गए थे। ब्रिटिश उन्हें पकड़ने में असमर्थ रहे थे।

4. दिल्ली के वायसराय को मारने के लिए उन्होंने साधु का भेष बनाकर ट्रैन को बोम्ब से उड़ाने की योजना बनाई और इसे अंजाम भी दिया। मगर वायसराय को बचा लिया गया था।

5. ये हम सब जानते है की लाला लाजपत राय को अंग्रेजों ने बड़ी बेरहमी से लाठियों से पीट पीट कर मार दिया था। लेकिन आज़ाद ने तभी ठान लिया था की इस घटना के मुख्य दोषी सॉन्डर्स को खत्म करके ही छोड़ेंगे और उन्होंने ऐसा किया भी।

6. अंत समय में भी अंग्रेजों से मुठभेड़ के दौरान उन्होंने वीरता का परिचय दिया। वो हमेशा कहा करते थे की अंग्रेज उन्हें छू भी नहीं पाएंगे ऐसा हुआ भी जब वो अंग्रेजो के बीच फस गए तो उन्होंने अपनी आखरी गोली खुद ही को मार ली।

‘दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे,
आज़ाद ही रहे हैं, आज़ाद ही रहेंगे’

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