जयपुर फुट क्या है?

जयपुर शहर को पूरी दुनिया में इसके हेरिटेज और कल्चर के लिए जाना जाता है। इतना ही नहीं, जयपुर से जुड़े एक महान इन्वेंशन ने भी इस शहर का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है और ये महान आविष्कार है जयपुर फुट, जिसने कितने ही असहाय लोगों को चलने के लिए कदम दिए और उनकी जिंदगी को आसान बनाने में मदद की है और लगातार इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

ऐसे में आप भी इसके बारे में ज्यादा जानने की इच्छा रखते होंगे। ऐसे में क्यों ना आज, इस जयपुरफुट से जुड़े किस्सों को जाने। तो चलिए, आज आपको बताते हैं जयपुर फुट के सफर के बारे में –

  • 1968 में जब जयपुर में आर्टिफिशियल फुट का आविष्कार हुआ तो मेडिकल साइंस के फील्ड में तहलका मच गया।
  • डॉ. पी. के. सेठी (प्रमोद करण सेठी) जयपुर फुट के जनक रहे और जरूरतमंदों के लिए जयपुर फुट बनाने का विचार देने वाले स्कल्पचर रामचंद्र शर्मा थे।
  • इनके आपसी सहयोग और मेहनत के चलते ऐसा कृत्रिम पैर अस्तित्व में आया जो फ्लेक्सिबल था, वाटर प्रूफ था और इसकी कीमत भी बहुत कम थी।
  • इस महान खोज को आगे बढ़ाने में डॉ. महेश उदावत और डॉ. एस. सी. कासलीवाल का भी पूरा सहयोग रहा।
  • ‘भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति’ गरीब और असहाय लोगों को जयपुर फुट उपलब्ध करा कर उनके जीवन को बेहतर बनाने में पिछले करीब 40 साल से कार्यरत है।
  • जयपुर फुट लगवाने की प्रक्रिया भी बहुत सरल रखी गयी है। इसके लिए पेशेंट का रजिस्ट्रेशन किया जाता है जिसके बाद डॉक्टर द्वारा चेक अप करके, मरीज की जरुरत के अनुसार नाप लेकर आर्टिफिशियल फुट बनाकर लगा दिया जाता है। इसके साथ मरीज को कुछ सामान्य निर्देश दिए जाते हैं।
  • जयपुर फुट की इस इन्वेंशन को फिल्मी परदे पर भी दिखाया गया। फिल्म ‘’नाचे मयूरी” में सुधाचंद्रन अभिनेत्री थी और ये फिल्म उनके जीवन से प्रभावित थी क्योंकि एक कार क्रैश में अपना एक पैर खो चुकी सुधाचन्द्रन ने भी असल ज़िन्दगी में जयपुर फुट इस्तेमाल किया है।
  • जहाँ ऐसी खोजें बहुत महँगी होती है और आम इंसान की पहुँच से बहुत दूर होती हैं वहीँ जयपुर फुट हर जरूरतमंद को मुफ्त में लगाया जाता है।

जयपुर फुट की शुरुआत भले ही भारत के निचले तबके के ऐसे असहाय लोगों की सहायता के लिए हुयी जो किसी दुर्घटना में अपना पैर गँवा चुके थे लेकिन समय के साथ जयपुरफुट की पहुँच ना केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के बहुत से देशों तक हो गयी और आज दुनिया के बहुत से देशों के नागरिक जयपुर फुट लगवाने के लिए यहाँ आते हैं और उनकी आँखों में भी वही ख़ुशी झलकती है जो मदद पाने वाले किसी भारतीय की आँखों में होती है।

“जयपुर के प्रमुख ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल”

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