ऑर्गनिक फूड का चलन आजकल इतना बढ़ गया है कि लोग ऑर्गनिक फार्मिंग के बारे में जानने में भी दिलचस्पी लेने लगे हैं और ये तो आप भी जानते हैं कि ऑर्गनिक फार्मिंग यानी जैविक खेती के लिए खाद भी जैविक ही होनी चाहिए। ऐसे में आज जानते हैं कि जैविक खाद क्या है। जैविक खाद को कार्बनिक खाद भी कहा जाता है। इसमें पशु, पक्षियों के मल-मूत्र या शरीर के अवशेष से या पेड़-पौधों से मिलने वाले पदार्थ आते हैं। इस तरह की खाद का इस्तेमाल करने से मिट्टी में ह्यूमस का निर्माण होता है और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार आता है।

ये जैविक खाद कई तरह की होती है-

बयान खाद – भारत में इस्तेमाल होने वाली जैविक खादों में सबसे महत्वपूर्ण खाद यही है। इस खाद में मिलने वाले पोषक तत्वों की मात्रा पशुओं के प्रकार, पशुओं की उम्र, चारे और खाद को रखने के तरीके पर निर्भर करती है।

कम्पोस्ट खाद – इसे मित्र खाद भी कहते हैं। इस तरह की खाद पेड़- पौधों की पत्तियों, जड़ों और किसी तरह के अवशेष या मल, कूड़ा-कचरा जैसी बेकार चीज़ों को खाद के ढ़ेर में रखकर सड़ाने गलाने से बनती है। इस क्रिया से पौधों के लिए पोषक तत्व ग्रहण करना आसान हो जाता है। कम्पोस्ट खाद तैयार करते समय इतनी गर्मी पैदा हो जाती है कि मल-मूत्र और कूड़े कचरे में पाए जाने वाले हानिकारक रोगाणु नष्ट हो जाते हैं और बिना गंध वाली उत्तम खाद तैयार हो जाती है।

हरी खाद – हरी खाद बनाने के लिए हरे फलीदार पौधों को उसी खेत में उगाकर या किसी दूसरे स्थान से लाकर जुताई करके मिट्टी में दबा दिया जाता है। इस तरह की खाद से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। हरी खाद का इस्तेमाल करके ही लवणीय और क्षारीय मिट्टियों में सुधार किया जा सकता है।

दोस्तों, उम्मीद है कि जैविक खाद से जुड़ी ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

“आँख का वजन कितना होता है?”