विटामिन्स की खोज किसने की और विटामिन कितने प्रकार के होते हैं ?

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आप जानते हैं कि शरीर के सम्पूर्ण विकास के लिए हमारे आहार में सभी आवश्यक पोषक तत्वों का होना ज़रूरी है, जिनमें से विटामिन्स भी एक आवश्यक तत्व है। विटामिन जीवन रक्षक होते हैं, ये ऐसे कार्बनिक यौगिक हैं जो शरीर को सही ढंग से कार्य करने की शक्ति देते हैं। हमारे शरीर को विटामिन की बहुत कम मात्रा की जरुरत होती है लेकिन विटामिन का निर्माण हमारे शरीर में नहीं होता इसलिए भोजन से इसकी पर्याप्त मात्रा का मिलना बहुत ज़रूरी होता है।

विटामिन की खोज – डच जीवाणु विशेषज्ञ क्रिश्चयान एईकमैन ने विटामिन की खोज की। उन्होंने ये साबित किया कि सेहत के लिए ज़रूरी कुछ रसायन हमारे आहार में मौजूद होते हैं और ब्रिटिश वैज्ञानिक फैडरीक हौपकिन ने ये सिद्ध किया कि मानव शरीर को स्वस्थ और सेहतमंद बनाये रखने के लिए कुछ रसायनों की जरुरत होती है।

विटामिन के प्रकार – भले ही विटामिन की शरीर को काफी कम मात्रा में जरुरत होती हो लेकिन शरीर को एनर्जी देने और स्वस्थ बनाये रखने वाले इन विटामिन्स की संख्या 13 होती है और इन्हें दो भागों में बांटा जाता है- 1. पानी में घुलने वाले विटामिन और 2. वसा में घुलने वाले विटामिन। पानी में घुलनशील विटामिन शरीर में मौजूद पानी में घुल जाते हैं और वसा में घुलनशील विटामिन शरीर में फैट में घुल जाते हैं। वसा में घुलनशील विटामिन्स की संख्या 4 है और पानी में घुलने वाले विटामिन्स 9 होते हैं।

विटामिन ए – रेटिनॉल और थाईरिमीन जैसे कई केमिकल कंपाउंड्स से मिलकर बना है विटामिन ए। ये विटामिन चुकंदर, गाजर, पनीर, दूध, हरी सब्जियां, टमाटर और पीले रंग के फलों में मिलता है। खून में कैल्शियम का संतुलन बनाये रखना और त्वचा, नाखून, बाल, दांत, मसूड़ों, मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाना इसका काम है। इस विटामिन की कमी से आँखों के रोग हो जाते हैं।

विटामिन बी – विटामिन बी कई रूपों में पाया जाता है जैसे – विटामिन बी1, बी2, बी3, बी5, बी6, बी7, बी9 और विटामिन बी12 । ये विटामिन खमीर, चोकर, दानों के छिलके, अंकुरित अनाज, दूध, ताज़ी सब्जियां, सहजन, गाजर, चुकन्दर, अदरक, किशमिश के अलावा केला, मूंगफली और काजू में भी पाया जाता है। इस विटामिन का प्रमुख कार्य है पाचन क्रिया को स्वस्थ बनाये रखना और इसकी कमी से पेट सम्बन्धी बीमारियों के अलावा नसों में सूजन, मांसपेशियों का कमजोर होना और पैरालिसिस या हार्टफेल की सम्भावना हो सकती है और बेरी-बेरी रोग भी इसी विटामिन की कमी से होता है।

विटामिन सी – आंवले के अलावा नींबू, शकरकंद, मूली, बैंगन और प्याज जैसी सब्जियों और संतरा, अन्नानास, अनार और आम जैसे फलों में पाया जाने वाला ये विटामिन शरीर की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने के साथ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी बनाये रखता है। इसकी कमी से स्कर्वी रोग हो जाता है जिसके कारण मांसपेशियों में कमजोरी और हर समय थकान महसूस होने लगती है, मसूड़ों में खून आता है और जोड़ों में दर्द रहने लगता है।

विटामिन डी – शरीर द्वारा कैल्शियम का अवशोषण करने के लिए विटामिन डी का होना बहुत आवश्यक होता है। सूरज की किरणों से मिलने वाला ये विटामिन दूध, मक्खन, मूँगफली और तिल का सेवन करके भी प्राप्त किया जा सकता है। बच्चों में इस विटामिन की कमी होने से रिकेट्स रोग होता है और बड़ों में ऑस्टियोपोरेसिस रोग हो जाता है जिसमें हड्डियां कमज़ोर और पतली होने लगती हैं।

विटामिन ई – शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने और एलर्जी से बचाव करने वाला ये विटामिन अंडे, हरी पत्तेदार सब्जियों, अनाज और छिलके वाले सभी खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित रखने वाला ये विटामिन खून में लाल रक्त कणों के निर्माण में मदद करता है साथ ही शरीर के हर अंग को सुचारु ढंग से चलाने में भी सहायक होता है। त्वचा और बालों की खूबसूरती बढ़ाने में सहायक ये विटामिन फ्री-रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से भी बचाता है। इसकी कमी से प्रजनन क्षमता में कमी आ जाती है और बढ़ती उम्र का असर भी जल्दी दिखने लगता है।

विटामिन के – छिलकेदार अनाज और हरी सब्जियों में पाया जाने वाला ये विटामिन, चोट लगने पर खून को गाढ़ा करके ज़माने का काम करता है, लीवर को स्वस्थ रखता है और इसकी कमी होने से चोट लगने पर खून का जमाव नहीं हो पाता है और खून का बहाव रोकना मुश्किल हो जाता है।

विटामिन के प्रकारों को जान लेने के बाद आपके लिए ये समझना भी आसान हो गया होगा कि इन विटामिन्स का शरीर के लिए क्या महत्व है इसलिए अब से अपने आहार में इनकी जरुरी मात्रा को शामिल करना मत भूलिए क्योंकि थोड़ी ही सही, लेकिन इनकी आवश्यक मात्रा आपको अपने खाने से ही मिल सकती है।

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