ज्यादा बोलने की आदत के नुकसान

अपने विचारों को प्रदर्शित करने के लिए उन्हें अभिव्यक्त करना ज़रूरी होता है और इसके लिए हम अपने विचारों को बातों के ज़रिये सामने वाले व्यक्ति तक पहुंचाते हैं। हर व्यक्ति के स्वभाव के अनुसार उसके बोलने का तरीका अलग-अलग होता है। कुछ लोग बहुत कम बोलना पसंद करते हैं और कुछ लोग बहुत ज्यादा बातें किया करते हैं। वैसे तो कम बोलना भी कई बार मुश्किल में डाल देता है लेकिन ज्यादा बोलने से हर बार मुश्किल में पड़ना तय है। कम शब्दों में कही गयी बात जहाँ अपना गहरा असर छोड़ती हैं वहीँ ज्यादा बातें आपके प्रभाव को कम भी कर देती हैं और सामने वाले व्यक्ति को निरर्थक भी लगने लगती है। इसके अलावा ज्यादा बोलने की आदत के चलते आप कई बार ऐसी बातें भी बोल जाते हैं जो आपको बड़ी मुश्किलों में डाल देती है और कई बार आपको निंदा भी सहनी पड़ती है। अगर आप भी इस समस्या से ग्रस्त हैं, तो चलिए आज जानते हैं कि ज्यादा बोलने की आदत को छोड़ने के लिए क्या प्रयास किये जाने चाहिए-

सामने वाले व्यक्ति की प्रतिक्रिया पर गौर करें – अगर आप ज्यादा बोलने की आदत से छुटकारा चाहते हैं तो बोलते समय, सामने वाले व्यक्ति की प्रतिक्रियाओं पर गौर कीजिये। अगर आपकी बातों में उसे रूचि होगी तो वो एक्टिव दिखाई देगा लेकिन अगर आपकी बातों के कारण वो बोरियत या बोझिल महसूस कर रहा होगा तो निष्क्रिय दिखाई देगा, ऐसा होने पर चुप हो जाना ही सही रहेगा।

बहस करने से बचिए – ज्यादा बोलने की आदत के कारण अक्सर हम सामने वाले की बात को सुनने और समझने की बजाये उसमें कमियां निकालकर, खुद के लिए बोलने के अवसर ढूंढने लगते हैं और ऐसा करने पर सामान्य सी बात भी बहस का रूप ले लेती है। इससे बचने के लिए बात को सुनिए, समझिये और फिर अपनी बात रखिये।

बोलने से पहले सुनना ज़रूरी है – लगातार बोलते रहने की लत से छुटकारा पाने के लिए पहले सुनने की क्षमता विकसित करनी होगी। बोलने का मौका ढूंढने की बजाए, सामने वाले की बातों को ध्यान से सुनिए। ऐसा करके आप में एक अच्छे श्रोता के गुण विकसित होंगे और बोलने की आपकी स्किल्स में भी सुधार होगा।

दूसरों को भी बोलने का अवसर दीजिये – ज्यादा बोलने की आदत में अपनी बातें ही सबसे महत्वपूर्ण लगती हैं और लगातार अपनी बातें बताते जाने के कारण सामने वाले को बोलने का मौका ही नहीं दिया जाता जिसके कारण लोग आपसे दूरी बना सकते हैं इसलिए अपनी बात को सदे हुए शब्दों में कहने का प्रयास करिये और सामने वाले को भी बोलने का मौका दीजिये।

अपने शब्दों पर भी गौर कीजिये – ज्यादा बोलने के दौरान शब्दों के चुनाव पर गौर नहीं किया जाता और इस वजह से कितने ही निरर्थक शब्दों का प्रयोग अपनी बातों में किया जाता है जिसका नकारात्मक प्रभाव आपके संबंधों पर पड़ना स्वाभाविक है। इससे बचने के लिए बोलने से पहले अपने शब्दों पर ध्यान दीजिये और सही शब्द का प्रयोग करने का आपका ये प्रयास आपको ज़्यादा बोलने से रोक सकेगा जिससे आपका प्रभाव भी अच्छा पड़ने लगेगा।

अच्छी आदतों को बनाये रखना और बुरी आदतों को तुरंत छोड़ देना बहुत ही आसान है क्योंकि कौनसी आदत को आप अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाना चाहते हैं, ये आप ही तय करते हैं और ऐसे में अच्छी आदतों को बढ़ावा देना और बुरी आदतों से छुटकारा पाना आपके लिए मुश्किल नहीं है। सिर्फ ये जानना ज़रूरी है कि क्या मुझमें ऐसी कोई आदत हैं जो मेरे व्यक्तित्व पर बुरा असर डाल रही है? उसके बाद ऐसी आदत को खुद से दूर करना आप बखूबी जानते हैं जैसे ज्यादा बोलने की आदत। छोटे-छोटे प्रयास करके आप बहुत जल्द इस आदत से छुटकारा भी पा लेंगे, इसके लिए इन बातों का ख्याल रखिये और अपने व्यक्तित्व में निरंतर निखार लाते रहिये।

“दूसरों का आदर्श बनना है तो अपनाएं ये आदतें”
“सफल व्यक्तियों की अनमोल आदतें”
“क्या जिंदगी में बुरी आदतों से छुटकारा पाना नामुमकिन है ?”

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