ज्यादा बोलने की आदत को सुधारने के तरीके

नवम्बर 30, 2017

कई बार आपको भी ऐसे हालातों का सामना करना पड़ा होगा जब आपकी मुलाकात ऐसे परिचित, रिश्तेदार या किसी अनजान व्यक्ति से सफर के दौरान हो गयी होगी जिनकी ज्यादा बोलने की आदत ने आपको हैरान-परेशान कर दिया होगा। किसी भी मसले पर ज़रूरत से ज्यादा और निरंतर बोलते रहना और दूसरों को अपने विचार रखने का अवसर नहीं देना ही ज्यादा बोलने की आदत होती है। ये भी हो सकता है कि ज्यादा बोलने की आदत आपको भी हो जिसके कारण लोग आपसे दूरी बनाने लगे हों और आप खुद भी अपनी इस आदत के हाथों मजबूर महसूस करते हों लेकिन इसे दूर करने का कोई उपाय आप ढूंढ नहीं पाए हो। लेकिन ये तो आप जानते हैं ना कि अगर मन से ढूंढा जाए तो हर समस्या का हल मिल जाता है तो आपकी इस आदत को दूर करना कौनसी बड़ी मुश्किल है। तो चलिए, आज जानते हैं कि ज्यादा बोलने की इस आदत को कैसे कम किया जा सकता है-

खुद से कहिये-ये आसान है – आप ये मान बैठे हैं कि आपकी ये ज्यादा बोलने की आदत कभी नहीं छूट सकती। इसके बजाये ऐसा सोचिये कि आप जब चाहे तब इस आदत को बदल सकते हैं और ऐसा करने के लिए आप हर दिन प्रयास करेंगे और ऐसा करना आपके लिए बेहद आसान हैं। जैसा आप सोचेंगे, वैसे ही परिणाम आप को मिलेंगे इसलिए अपनी इस आदत को छोड़ने के लिए पॉजिटिव सोच रखिये और निरंतर प्रयास के लिए तैयार हो जाइए।

ज्यादा बोलने की बजाए चुप रहने का अभ्यास करिये – जब आपने ठान ही ली है कि ज्यादा बोलने की आदत से जल्द से जल्द छुटकारा पाना है तो बस जुट जाइये इस अभियान में। अब तक आपका सारा ध्यान हर विषय पर लम्बी-लम्बी बातें करने पर रहा करता था लेकिन अब से चुप रहने का अभ्यास शुरू कीजिये और किसी भी मसले पर जब आपकी राय मांगी जाए तभी बहुत कम शब्दों में अपनी बात रखने की कोशिश कीजिये। शुरुआत में ये थोड़ा मुश्किल लग सकता है लेकिन धीरे-धीरे आप इसमें भी महारत हासिल कर लेंगे।

अब सुनना है – ज्यादा बोलते रहने की धुन में आज तक आपने दूसरे लोगों की बातों को सुनने की ज़रूरत ही नहीं समझी और ना ही उन्हें अपनी बात रखने के पर्याप्त अवसर दिए। लेकिन अब आप अपनी बातों को बोलने की बजाए, सामने वाले को सुनने की कोशिश कीजिये। चुप रहकर सामने वाले की बातों को सुनने से आपको उनकी बातों का महत्व भी पता चलेगा और आप में संयम रखने के गुण भी विकसित होने लगेंगे जो आगे चलकर आपको काफी फायदा पहुँचायेंगे।

बहस करने से खुद को रोकना होगा – बातचीत के सामान्य माहौल में भले ही आप कम बोलने में सफल होने लगें लेकिन हो सकता है कि किसी मुद्दे पर असहमत होने की स्थिति में आप बहस करने से खुद को रोक ना सकें। ऐसे में संयम बनाये रखिये और हर छोटी-बड़ी बात को तूल देकर बहस करने की बजाये धैर्य के साथ सुनिए और सीमित शब्दों में अपनी बात रखिये।

शब्दों को सोच-समझकर चुनिए – ज्यादा बोलने की आदत से छुटकारा पाने के लिए कम बोलने का अभ्यास करना तो ज़रूरी है ही, साथ में अपने बोले गए शब्दों का चुनाव भी सही तरीके से करना ज़रूरी है। आपके शब्द सामने वाले व्यक्ति तक आपका मन्तव्य स्पष्ट तरीके से पंहुचा सके और आपके शब्दों से सामने वाले को ठेस ना लगे, इसका ध्यान रखना भी ज़रूरी है।

बोलने से पहले सोचिये – अब तक भले ही आपका सारा ध्यान अपनी बात कहने पर रहा हो लेकिन अब से बोलने से पहले अपने विचारों के बारे में सोचना शुरू कीजिये। जो आप कहने वाले हैं क्या वो आवश्यक है या अति महत्वपूर्ण हैं? ये सवाल खुद से करिये और वही बातें बोलिये जो आपको महत्वपूर्ण लगे। ऐसा करके आप कई अनावश्यक बातें बोलने से बच जाएंगे और ये अभ्यास आपकी ज्यादा बोलने की आदत को कम करने में काफी मददगार भी साबित होगा।

भले ही आप ज्यादा बोलने की आदत से परेशान हो लेकिन इसे छोड़ने की राह में आधी सफलता तो आप तभी हासिल कर चुके हैं जब आपने ये बात स्वीकारी कि आपको ज्यादा बोलने की आदत है क्योंकि अपनी खामियों को स्वीकार लेने के बाद उन्हें दूर करना ज्यादा मुश्किल नहीं रहता है। इसके बाद तो बस कुछ छोटे-छोटे प्रयास करने होते हैं जो आपको पूरी तरह सफल बना देते हैं। इसलिए अब से यकीन रखिये कि आप ये कर सकते हैं और रोज़ सोच-समझकर सीमित शब्दों में बोलने का अभ्यास करिये। ऐसा करके जल्द ही आप संयमित बातचीत करने वालों में शामिल हो जाएंगे और हो सकता है कि आप में इतना संयम विकसित हो जाए कि अपने विचारों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने के लिए दुनिया आपका अनुसरण करना चाहे।

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