एक्सरे मशीन का आविष्कार कब और किसने किया?

एक्सरे का चिकित्सा के क्षेत्र में एक अहम् योगदान है जहाँ पहले शरीर के अंदर की बिमारी का पता लगाने के लिए शरीर के उस हिस्से में चीरा लगाकर ही पता लग पाता था वहीँ एक्सरे मशीन आने के बाद बिना चीरे ही बिमारी का पता लगाया जा सकता है। एक्सरे मशीन – एक्सरे जनरेटर और एक्सरे डिटेक्टर से मिलकर बनी है। एक्सरे मशीन के द्वारा शरीर के आंतरिक भागों की एक्सरे फोटो निकाली जाती है। अगर किसी दुर्घटना में शरीर के किसी अंग की हड्डी में तकलीफ हो तो एक्सरे फोटो के जरिये आसानी से पता लगाया जा सकता है की उस अंग की हड्डी टूटी है या नहीं। एक्सरे मशीन के आविष्कार के बाद इलाज काफी सरल हो गया है। आइये आपको बताते हैं एक्सरे मशीन का आविष्कार किसने और कब किया।

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दरअसल एक्सरे के आविष्कार के पीछे कई लोगों का हाथ है लेकिन इसका मुख्य श्रेय जाता है विल्हेम रोन्टजेन को जिन्होंने सबसे पहले 1895 में क्रूक्स ट्यूबों से निकलने वाले एक्सरे की खोज की और इसके कई महत्वपूर्ण उपयोग समझाए। इसके बाद 18 जनवरी 1896 को एच एल स्मिथ ने औपचारिक रूप से एक एक्सरे मशीन को पेश किया। इसके बाद 1904 में मेले क्लैरेंस ने सार्वजानिक इस्तेमाल के लिए एक पूर्ण रूप से कामकाजी एक्सरे मशीन पेश की। पहली बार एक्सरे मशीन का इस्तेमाल जूते बेचने के स्टोर्स में किया गया था।

एक्सरे मशीन की आविष्कार की कहानी बड़ी रोमांचक है क्योंकि एक्सरे मशीन का आविष्कार सोची समझी प्लानिंग नहीं थी बल्कि इसका आविष्कार गलती से हुआ था। दरअसल विल्हेम रोन्टजेन कैथोडिक रेज ट्यूब का आविष्कार करने में लगे थे लेकिन एक दिन उन्होंने देखा की लाइट जब चमक रही थी तो अपारदर्शी कवर होने के बावजूद भी इसके नीचे रखा पेपर साफ़ दिखाई दे रहा था। ये देखकर विल्हेम चौंक गए और वहां से उन्हें एक्सरे के आविष्कार का आइडिया मिला।

हालाँकि एक्सरे शरीर पर बुरे प्रभाव भी डालता है अगर लम्बे समय तक किसी अंग पर एक्सरे किया जाये तो उस अंग के आसपास की जीवित कोशिकाएं मृत हो जाती हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा की अगर एक ही अंग पर बार बार और अलग अलग समय पर ज्यादा एक्सरे लेने की क्रिया की जाये तो कैंसर होने का भी खतरा हो सकता है। इन्ही कारणों से सिर्फ जरुरत महसूस होने पर ही एक्सरे लिया जाता है, साधारणतः एक्सरे का इस्तेमाल मेडिसिन और सर्जरी में किया जाता है।

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